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अखिलेश यादव के बंगले की जांच के लिए बनेगी कमेटी, निर्माण में किया गया नियमों का उल्लंघन

Sat, 07 Jul 2018 10:33 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 07 Jul 2018 10:33 AM IST
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A committee to investigate akhilesh yadav bungalow issue.
- फोटो : amar ujala

सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के खाली किए गए सरकारी आवास की जांच के लिए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की जाएगी। इस बारे में पीडब्ल्यूडी के प्रमुख अभियंता ने राज्य संपत्ति अधिकारी (आरएसए) को पत्र लिखा है। माना जा रहा है कि इस सुझाव पर शासन स्तर पर जल्द ही निर्णय लेगा।

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अखिलेश यादव को बतौर पूर्व मुख्यमंत्री विक्रमादित्य मार्ग पर सरकारी आवास आवंटित था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इसे खाली करने के दौरान तोड़फोड़ की गई थी। हालांकि, पीडब्ल्यूडी की शुरुआती रिपोर्ट में इस तोड़फोड़ से हुए नुकसान को अधिक नहीं बताया गया था, पर शासन ने यह रिपोर्ट मंजूर नहीं की।
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इस पर पीडब्ल्यूडी मुख्यालय से आरएसए को पत्र भेजकर विशेषज्ञों की कमेटी से जांच कराने की संस्तुति की गई है। पत्र में कहा गया है कि कमेटी में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता (भवन) के साथ-साथ विभाग के चीफ आर्किटेक्ट, एक अधीक्षण अभियंता और उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के एमडी को भी शामिल किया जाए।
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इस मामले में हाईकोर्ट में एक पीआईएल भी दाखिल की गई है। इसलिए विभागीय अफसर नुकसान के आकलन की गणना में कोई चूक नहीं करना चाहते। पीडब्ल्यूडी की शासन को भेजी गई शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि पूर्व मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में एसी निकालने के दौरान दीवारों में तोड़फोड़ की गई थी। फॉल्स सीलिंग के साथ-साथ फर्श में लगे मार्बल को भी क्षतिग्रस्त किया गया, पर इस रिपोर्ट को शासन ने पूर्ण नहीं माना।

नक्शे में स्वीकृति से कहीं ज्यादा करवाया गया था काम

A committee to investigate akhilesh yadav bungalow issue.

पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी ने बताया कि बिल्डिंग निर्माण में 260 आइटम लगते हैं। किसी एक इंजीनियर के लिए इनकी जांच करना मुमकिन नहीं है। इसलिए इस काम को विशेषज्ञों की एक कमेटी ही कर सकती है। हकीकत में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास में राज्य संपत्ति विभाग से स्वीकृत नक्शे से कहीं ज्यादा काम कराया गया है।

रिकॉर्ड में सिर्फ ग्राउंड फ्लोर ही स्वीकृत है, जबकि फर्स्ट फ्लोर पर भी कमरों का निर्माण कराया गया। वेटिंग हॉल का भी निर्माण बिना सक्षम स्तर से स्वीकृति कर कराया गया। राज्य संपत्ति विभाग के सूत्रों के मुताबिक, अब यह निर्णय सरकार को करना है कि अतिरिक्त निर्माण कार्य में हुए नुकसान को शासकीय क्षति माना जाए या नहीं।

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