{"_id":"6253d28138ed016eca5a04db","slug":"96-lakh-rupees-loss-to-rodways-by-illigal-vendors","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ: अवैध रेवड़ी लगा रहे वेंडरों ने रोडवेज को दी 96 लाख रुपये की चोट, ढाई साल से दोबारा नहीं उठा ठेका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लखनऊ: अवैध रेवड़ी लगा रहे वेंडरों ने रोडवेज को दी 96 लाख रुपये की चोट, ढाई साल से दोबारा नहीं उठा ठेका
Mon, 11 Apr 2022 12:37 PM IST
ishwar ashish
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 11 Apr 2022 12:37 PM IST
सार
ढाई साल से ठेका न उठने पर अवैध वेंडर मलाई काट कर रहे हैं और रोडवेज को भारी नुकसान हो रहा है। अवैध ठेकेदारों से सांठगांठ कर यह पैसा बिचौलिए खा गए।
विज्ञापन
बस अड्डे पर अवैध रूप से बिक रही रेवड़ी।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजधानी लखनऊ में चारबाग व कैसरबाग बस अड्डे पर ढाई साल पहले खत्म हुआ रेवड़ी बेचने का ठेका अब तक दोबारा नहीं उठ सका। इसके बावजूद यहां रेवड़ी बेचने का सिलसिला कभी थमा नहीं। ढाई साल में अफसरों से मिलीभगत कर अवैध ठेकेदारों ने दोनों बस अड्डों से 14.40 करोड़ से ज्यादा की रेवड़ी बेच डाली है। इस अवधि में कोई ठेका न होने से दो साल में रोडवेज को 96 लाख के राजस्व की चपत लगी है। अवैध ठेकेदारों से सांठगांठ कर यह पैसा बिचौलिए खा गए।
विज्ञापन
एक अनुमान के मुताबिक दोनों बस अड्डों से दो लाख रुपये से अधिक की रेवड़ी बिक जाती है। इसमें कैसरबाग पर 1.50 लाख रुपये तो चारबाग पर 50 हजार रुपये की बिक्री शामिल है। अफसर रेवड़ी बेचने का दोनों बस अड्डे पर ठेका उठा ठेकेदार तय कर देते तो प्रति माह करीब 3.70 लाख रुपये का राजस्व मिलता। सूत्रों ने यह भी बताया कि ठेका उठता तो यह आय चार लाख रुपये से अधिक भी हो सकती थी।
विज्ञापन
आठ रुपये की रेवड़ी 15 में बेच रहे
मौका मुआयना करने पर पता चला कि कैसरबाग एवं चारबाग में 100 ग्राम वजन की रेवड़ी 15 रुपये में यात्रियों को बेची जाती है। इसे अवैध ठेकेदार लगभग 8 रुपये में खरीद कर लाते हैं। एक सेल्समैन ने बताया कि अवैध रूप से बस में रेवड़ी का एक पैकेट बेचने पर 2 रुपये का कमीशन मिलता है। सुबह से रात तक वह 500 पैकेट रेवड़ी के बेच लेता है।
विज्ञापन
कहां से कितनी आय
रोडवेज के अधिकृत ठेकेदार के जरिये जब चारबाग में रेवड़ी बेची जाती थी तो 1.20 लाख रुपये और कैसरबाग से 2.50 लाख रुपये प्रति माह आय हो रही थी। यह रेट करीब ढाई साल पुराना है। वैध ठेकेदार का ठेका लगभग ढाई साल पहले खत्म होने के बाद अवैध रूप से रेवड़ी बेची जाने लगी, जिससे रोडवेज को प्रति माह 3.70 लाख रुपये के राजस्व की चोट पहुंची।
कई बार हुआ ठेका उठाने का दिखावा
चहेते अवैध ठेकेदार रेवड़ी बेचते रहें और प्रशासनिक अफसर लोग न फंसे, इसके लिए ठेका उठाने का दिखावा कई बार हुआ। चारबाग एवं कैसरबाग के लिए अनगिनत बार टेंडर निकला। ठेकेदारों ने टेंडर भी डाले, लेकिन ठेका नहीं उठ सका। जबकि कई ठेकेदारों ने रेवड़ी बेचने का ठेका हथियाने के लिए बहुत ऊंचे-ऊंचे रेट भी दिए थे।
फैक्ट फाइल
रोजाना बिकी रेवड़ी 2.00 लाख
30 दिन में 60.00 लाख
एक साल में 7.20 करोड़
रोडवेज की होने वाली कमाई
प्रति माह 4.00 लाख
12 माह में 48.00 लाख
24 माह में 96.00 लाख
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ परिक्षेत्र पीके बोस का कहना है कि चारबाग बस अड्डे पर रेवड़ी बेचने वाले ठेकेदार को ठेका देने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। प्रशासनिक अनुमोदन के लिए मुख्यालय भेजा है। कैसरबाग का ठेका उठाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।