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Lucknow News: शहर के 94 प्रतिशत लोग छोड़ना चाहते हैं भिक्षावृत्ति
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रिपोर्ट जारी करते मंत्री असीम अरुण।
लखनऊ। बदलाव संस्था की ओर से भिक्षावृत्ति में संलिप्त लोगों की स्थिति पर आधारित सर्वेक्षण की रिपोर्ट शनिवार को जारी की गई। इसके मुताबिक, शहर के 94 प्रतिशत लोग भिक्षावृत्ति छोड़ना चाहते हैं। इस अवसर पर एक कार्यक्रम भी हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण भी पहुंचे। उन्होंने संस्था की तैयार रिपाेर्ट उपेक्षा और समावेश 2024–25 का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार के पास संसाधन तो हैं, लेकिन उसे धरातल पर लाने की जरूरत है। उन्होंने संस्थापक शरद पटेल के प्रयासों की सराहना की। समाज कल्याण के उपनिदेशक जे. राम, जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी सिंह, द कोशिश ट्रस्ट के संस्थापक प्रो. मो. तारिक व प्रो. विवेक कुमार सिंह (डीन-सोशल साइंस स्टडीज, प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज) कार्य की सराहना की। मौके पर बदलाव संस्था के सहसंस्थापक महेंद्र प्रताप, संजय वर्मा, आकांक्षा चंदेल, डॉ. अर्चना सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
-ये हैं आंकड़े
80% अशिक्षित।
33% के पास कोई पहचान पत्र नहीं।
48% लोग नशे की लत से जूझ रहे।
38% लोग फुटपाथ पर रातें गुजार रहे।
94% लोग भिक्षावृत्ति छोड़ना चाहते हैं।
70% बच्चे पढ़ाई करना चाहते हैं।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण भी पहुंचे। उन्होंने संस्था की तैयार रिपाेर्ट उपेक्षा और समावेश 2024–25 का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि भिक्षावृत्ति में लगे लोगों के पुनर्वास के लिए सरकार के पास संसाधन तो हैं, लेकिन उसे धरातल पर लाने की जरूरत है। उन्होंने संस्थापक शरद पटेल के प्रयासों की सराहना की। समाज कल्याण के उपनिदेशक जे. राम, जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी सिंह, द कोशिश ट्रस्ट के संस्थापक प्रो. मो. तारिक व प्रो. विवेक कुमार सिंह (डीन-सोशल साइंस स्टडीज, प्रो. राजेंद्र सिंह रज्जू भैया विश्वविद्यालय प्रयागराज) कार्य की सराहना की। मौके पर बदलाव संस्था के सहसंस्थापक महेंद्र प्रताप, संजय वर्मा, आकांक्षा चंदेल, डॉ. अर्चना सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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-ये हैं आंकड़े
80% अशिक्षित।
33% के पास कोई पहचान पत्र नहीं।
48% लोग नशे की लत से जूझ रहे।
38% लोग फुटपाथ पर रातें गुजार रहे।
94% लोग भिक्षावृत्ति छोड़ना चाहते हैं।
70% बच्चे पढ़ाई करना चाहते हैं।