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900 आवंटियों को फिलहाल नहीं मिलेगा प्लॉट पर कब्जा
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sat, 15 Nov 2014 10:06 AM IST
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शीश महल में अवैध निर्माण सील करने की कार्रवाई अनिश्चितकाल के लिए टलने के बाद गोमती नगर विस्तार में भी ऐसे ही आसार हैं। विस्तार के 900 आवंटियों को फिलहाल प्लॉट पर कब्जा मिलने की उम्मीद नहीं है।
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दरअसल इस मसले पर कोर्ट ने एलडीए से विस्तार में कार्रवाई के बारे में 17 नवंबर को जवाब मांगा है। इससे पहले प्राधिकरण को कार्रवाई करनी थी, जिसकी संभावना नहीं दिखाई देती।
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इसके अलावा प्राधिकरण में कोई सक्षम अफसर न होने के कारण एलडीए की कार्रवाई भी दिशाविहीन हो गई हैं। गोमती नगर विस्तार में 900 आवंटियों को उनके प्लॉटों पर कब्जा देने के लिए एलडीए को बड़ा अभियान चलाना है।
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कोर्ट की सख्ती से उम्मीद जगी थी कि शायद जवाब देने से पहले अवैध कब्जे हटाए जा सकें। जवाब देने से पहले महज दो दिन का समय है। ऐसे में कार्रवाई होना संभव नहीं दिख रहा।
विस्तार में 900 ऐसे प्लॉट हैं, जिन पर अवैध कब्जेदार काबिज हैं। इस मामले में एलडीए के संयुक्त सचिव रणविजय सिंह की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी नेअपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
रिपोर्ट में मुख्य रूप से पूर्व में यहां तैनात रहे अभियंताओं को अवैध निर्माण के लिए दोषी पाया गया है। हालात तो यह है कि आवंटन के बाद भी अवैध निर्माण हुए। इसके लिए पांच सहायक और अवर अभियंताओं को दोषी माना गया।
गोमती नगर विस्तार में जिन गांवों का अर्जन किया गया था, वहां पहले किसानों के मकान बने थे। अर्जन वर्ष 2000 में और आवंटन 2005 में किया गया था।
पुनर्वास के नाम पर कई किसानों को अलग से प्लॉट और मुआवजा भी दिया गया, पर मकान नहीं ढहाए गए। यहां के जेई अफसरों को बताते रहे कि मकान बनने के बाद अर्जन किया गया है, इसलिए लीज प्लान नहीं बन सकेगा।
इस कारण कई बार लेआउट परिवर्तन करना पड़ा, जिसे सेंक्शन कराया गया। इस वजह से 1100 आवंटियों को उनके प्लॉटों पर कब्जा प्राधिकरण नहीं दे सका। 900 आवंटियों को अभी भी कब्जा देना बाकी है।