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Lucknow News: एलडीए कॉलोनियों में मुख्य सड़क पर 90% कॉमर्शियल इमारतें अवैध

Thu, 06 Aug 2026 02:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 06 Aug 2026 02:39 AM IST
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90% of commercial buildings on main roads in LDA colonies are illegal
लखनऊ। शहर में अलीगंज, गोमतीनगर व विस्तार, जानकीपुरम व विस्तार, शारदा नगर आदि एलडीए की प्रमुख कॉलोनियां हैं। इनमें मुख्य सड़क के 90 प्रतिशत से अधिक मकानों को तोड़कर अवैध रूप से होटल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, अस्पताल, रेस्टोरेंट बना दिए गए हैं। पूरे शहर में करीब 30 हजार व्यावसायिक इमारतें अवैध तरीके से आवासीय भूखंडों पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर बनाई गई हैं।
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खास बात है कि इन इमारतों में से ज्यादातर का मानचित्र आवासीय में पास कराया गया है और इस्तेमाल कॉमर्शियल में किया जा रहा है। इनमें पार्किंग भी नहीं हैं। अवैध रूप से बनाए गए बेसमेंट पर भी व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। इनमें न तो आग से बचाव के जरूरी उपाय हैं और न ही किसी आपात स्थिति में राहत कार्य पहुंचाने के लिए आगे-पीछे जगह छोड़ी गई है।
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अवैध थी 15 लोगों की जान लेने वाली इमारत
22 जून को अलीगंज की जिस इमारत में आग लगने से 15 लोगों की जान गई, वह अवैध थी। आवासीय मानचित्र पास कराकर इसका व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा था। आग से बचाव के जरूरी उपाय नहीं थे। हादसे के बाद एलडीए ने तेजी दिखाते हुए शहर में करीब 150 बिल्डिंगों को फायर सेफ्टी न होने और अवैध निर्माण की वजह बताते हुए सील किया। इसका विरोध हुआ तो प्राधिकरण ने फायर सेफ्टी उपाय किए जाने का शपथपत्र लेकर बिल्डिंगों को खोल दिया। ऐसे में सुरक्षा के नाम पर की गई कार्रवाई महज दिखावा ही साबित हुई। हालांकि, जिस बिल्डिंग में आग लगी थी, उसे एलडीए ने 25 जुलाई को ध्वस्त कर दिया।
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इंजीनियरों की मिलीभगत से हुए निर्माण
अलीगंज हादसे के बाद हुई जांच में सामने आया था कि अवैध इमारत को ध्वस्त करने का आदेश वर्ष 2016 में हुआ था। उस वक्त मालिक ने यह शपथपत्र दिया था कि वह आवासीय निर्माण कर रहा है। इस आधार पर आदेश निरस्त कर दिया गया था। इसी तरह का खेल पूरे शहर में हुआ है। एलडीए के इंजीनियर कागजी कार्रवाई के लिए नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई तो करते हैं, पर बाद में शपथपत्र लेकर बिल्डिंग को खुलवा देते हैं।

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तय है अवैध निर्माण कराने का रेट
मानचित्र के विपरीत बिल्डिंग बनाने के लिए एलडीए इंजीनियरों का रेट तय है। एक जानकार ने बताया कि जब तक नक्शे के विपरीत इमारत बिल्डिंग बनती है, इंजीनियर हर महीना तय रकम के अलावा प्रति स्लैब रुपये अलग से लेते हैं। इस तरह चार मंजिला इमारत पर इंजीनियर 20 से 25 लाख रुपये तक वसूल लेते हैं। सील बिल्डिंग में निर्माण करने पर रेट दोगुना हो जाता है।
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