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जाल में फंसा मगरमच्छ, गेरुआ नदी में छोड़ा
Updated Thu, 26 Oct 2017 11:02 PM IST
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उर्रा/मोतीपुर। मोतीपुर रेंज के गुलालपुरवा गांव में स्थित तालाब में रह रहा मगरमच्छ चार माह से हमलावर था। तट पर पहुंचने वाले मवेशी और ग्रामीणों पर मगरमच्छ हमला कर उन्हें घायल कर रहा था। कई लोगों की जान जाते-जाते बची। गुरुवार सुबह कुछ मछली के व्यवसायी शिकार करवाने पहुंचे तो उन पर भी मगरमच्छ ने हमला किया। इस पर व्यवसायियों ने क्षेत्र के जलीय शिकारियों को बुलवाकर जाल डलवाकर मगरमच्छ को पकड़वा लिया। सूचना पाकर पहुंचे वनकर्मियों ने मगरमच्छ को कब्जे में लेकर गेरुआ नदी में छोड़ा है। मगरमच्छ काफी वयस्क बताया जा रहा है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत गुलालपुरवा गांव में भगहर नाला से जुड़ा हुआ तालाब है। इस नाले में अगस्त माह में बाढ़ के पानी में बहकर एक मगरमच्छ आ गया था। तब से मगरमच्छ तालाब में ही रह रहा था। तालाब के तट पर पहुंचने वाले ग्रामीणों और मवेशियों पर हमला भी कर रहा था। बीते पखवारे भर से मगरमच्छ का हमला बढ़ गया था। कई ग्रामीणों की जान जाते-जाते बची। इस मामले में ग्रामीणों ने आवाज उठायी, लेकिन वनकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया। जिस तालाब में मगरमच्छ रहा था। उस तालाब का ठेका मछली व्यवसायी जगदीश ने ले रखा है। गुरुवार सुबह जगदीश तालाब में मछली का शिकार करवाने पहुंचे। उसी समय पुन: मगरमच्छ हमलावर हो गया। किसी तरह भागकर लोगों ने जान बचायी। जगदीश ने गोपिया गांव से दो जलीय जीव के शिकारियों को बुलवाकर जाल डलवाया। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हमलावर मगरमच्छ जाल में फंस गया। इसकी सूचना तत्काल वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद अहमद को दी गई। रेंजर ने टीम के साथ गांव पहुंचकर जाल में फंसे मगरमच्छ को कब्जे में लेकर कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में छोड़वा दिया है। इसके बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।
गुलालपुरवा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार माह से मगरमच्छ लोगों पर हमला कर रहा था। एक बालक समेत तीन ग्रामीण हमले में घायल हुए हैं। जबकि आधा दर्जन से अधिक बकरियोें व कुत्तों को मगरमच्छ ने निवाला बनाया। गुलालपुरवा निवासी योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तीन मगरमच्छ कई दिनों से ग्रामीणाें को परेशान कर रहा था। एक पकड़ा गया है। दो मगरमच्छ तालाब में होने की आशंका है। उसकी तलाश वनकर्मियों को करनी चाहिए।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत गुलालपुरवा गांव में भगहर नाला से जुड़ा हुआ तालाब है। इस नाले में अगस्त माह में बाढ़ के पानी में बहकर एक मगरमच्छ आ गया था। तब से मगरमच्छ तालाब में ही रह रहा था। तालाब के तट पर पहुंचने वाले ग्रामीणों और मवेशियों पर हमला भी कर रहा था। बीते पखवारे भर से मगरमच्छ का हमला बढ़ गया था। कई ग्रामीणों की जान जाते-जाते बची। इस मामले में ग्रामीणों ने आवाज उठायी, लेकिन वनकर्मियों ने ध्यान नहीं दिया। जिस तालाब में मगरमच्छ रहा था। उस तालाब का ठेका मछली व्यवसायी जगदीश ने ले रखा है। गुरुवार सुबह जगदीश तालाब में मछली का शिकार करवाने पहुंचे। उसी समय पुन: मगरमच्छ हमलावर हो गया। किसी तरह भागकर लोगों ने जान बचायी। जगदीश ने गोपिया गांव से दो जलीय जीव के शिकारियों को बुलवाकर जाल डलवाया। दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद हमलावर मगरमच्छ जाल में फंस गया। इसकी सूचना तत्काल वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद अहमद को दी गई। रेंजर ने टीम के साथ गांव पहुंचकर जाल में फंसे मगरमच्छ को कब्जे में लेकर कतर्नियाघाट के गेरुआ नदी में छोड़वा दिया है। इसके बाद गांव के लोगों ने राहत की सांस ली।
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गुलालपुरवा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले चार माह से मगरमच्छ लोगों पर हमला कर रहा था। एक बालक समेत तीन ग्रामीण हमले में घायल हुए हैं। जबकि आधा दर्जन से अधिक बकरियोें व कुत्तों को मगरमच्छ ने निवाला बनाया। गुलालपुरवा निवासी योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तीन मगरमच्छ कई दिनों से ग्रामीणाें को परेशान कर रहा था। एक पकड़ा गया है। दो मगरमच्छ तालाब में होने की आशंका है। उसकी तलाश वनकर्मियों को करनी चाहिए।
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