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Lucknow News: गुर्दे के 80 फीसदी रोगी उच्च रक्तचाप से पीड़ित, युवाओं में बढ़ रहा खतरा

Sun, 17 May 2026 01:21 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 17 May 2026 01:21 AM IST
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80% of kidney patients suffer from high blood pressure, increasing risk among young people
प्रतीकात्मक।
लखनऊ।
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गुर्दे की बीमारी से जूझ रहे करीब 80 फीसदी रोगी उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। पीजीआई के गुर्दा रोग विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है। डेढ़ माह के दौरान ओपीडी में आए छह हजार मरीजों में से 4800 में उच्च रक्तचाप पाया गया।

इनमें से अधिकांश को अपने बढ़े हुए रक्तचाप की जानकारी नहीं थी। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. नारायण प्रसाद ने उच्च रक्तचाप को साइलेंट किलर बताया है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते, जिससे रोगी अनजान रहते हैं। बढ़ा हुआ रक्तचाप दिल को खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। इससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है।
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लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप गुर्दा रोग, दिल का दौरा और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ाता है। गुर्दे की बीमारी, थायराइड विकार और कुछ हार्मोन की अधिकता भी रक्तचाप बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं। संस्थान के बाह्य रोगी विभाग में रोजाना लगभग 350 गुर्दा रोगी इलाज के लिए आते हैं।
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डॉ. नारायण प्रसाद ने बताया कि उच्च रक्तचाप के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। इससे गुर्दे की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है और जानलेवा बीमारियों का जोखिम बढ़ता है।

तनाव खराब कर रहा युवाओं की किडनी

मड़ियांव निवासी एक 40 वर्षीय युवक की दोनों गुर्दे लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप के कारण खराब हो गए। वह अब हफ्ते में एक या दो बार डायलिसिस करवा रहा है। इसी तरह, अस्पतालों में 30 से 45 वर्ष तक के युवाओं में उच्च रक्तचाप के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। इस आयु वर्ग में कई लोगों में गुर्दे संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं।



ये है कारण

गुर्दा रोग, हार्मोनल और थायराइड विकार, मोटापा, गर्भावस्था तथा बिना डॉक्टर की सलाह दवाओं का सेवन इसके प्रमुख कारण हैं।

बचाव के उपाय

रोजाना पांच ग्राम से ज्यादा नमक न खाएं और नियमित कसरत करें। रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को काबू में रखना चाहिए तथा धूम्रपान व शराब से दूरी बनानी चाहिए।
40 फीसदी युवा ओपीडी में आ रहे
केजीएमयू नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. विश्वजीत ने बताया कि पिछले पांच से दस वर्षों में युवाओं में हाइपरटेंशन के मामलों में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि देखी गई है। ओपीडी में रोज 150 मरीज आते हैं। इसमें से करीब 50 फीसदी से अधिक हाइपरटेंशन के मरीज होते हैं। इसमें 30 से 40 प्रतिशत मरीज 25 से 40 वर्ष के बीच में होते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं चलता कि उन्हें हाई बीपी है।

अधिक स्क्रीन टाइम से भी बढ़ रही बीपी
डॉ. विश्वजीत ने बताया लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप इस्तेमाल करने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कोर्टिसोल और एड्रेनालिन ज्यादा रिलीज होते हैं, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी भी जोखिम बढ़ा रही है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
लगातार सिर दर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, धुंधला दिखाई देना, थकान, बेचैनी और सीने में दर्द।
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