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घबराएं नहीं... 70 फीसदी कोरोना के मरीजों में दवा की जरूरत नहीं पड़ती

Sat, 27 Jun 2020 04:04 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 27 Jun 2020 04:04 PM IST
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70 percent corona patients do not require medicines
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay

लखनऊ में 70 फीसदी कोरोना मरीज बिना लक्षण वाले हैं। इनमें से 5 से 10 फीसदी को ही कुछ दवाएं देनी पड़ती हैं। जबकि अन्य कोरोना मरीज सिर्फ हेल्दी डाइट और विटामिन सी युक्त भोजन लेकर ठीक हो रहे हैं। ऐसे में चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। सिर्फ बचाव करने की जरूरत है। 

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मालूम हो कि राजधानी में अब तक कुल 1001 मरीज पाए जा चुके हैं। इसमें 797 राजधानी के मूल निवासी हैं। सीएमओ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि 70 फीसदी से ज्यादा में नहीं कोरोना के लक्षण नहीं मिले। ऐसे मरीज कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग के दौरान मिले थे। ये सभी मरीज आठ से दस दिन में ठीक हो गए और घर भेज दिया गया।

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फिर अस्पताल क्यों भेजा
बिना लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल भेजने के सवाल पर सीएमओ डॉक्टर नरेंद्र अग्रवाल कहते हैं कि इन्हें अस्पताल में रखने के पीछे मूल मकसद था कि हाई रिस्क श्रेणी वाले मरीजों में संक्रमण न फैलने पाए। हाई रिस्क श्रेणी में वृद्धजन, हृदय रोगी, ब्लड प्रेशर व डायबिटीज के मरीज, कैंसर, किडनी रोगी, टीबी रोगी, अस्थमा से पीड़ित और गर्भवती हैं।

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ज्यादातर मरीज बिना लक्षण वाले

70 percent corona patients do not require medicines
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अस्पतालों ने भी बना रखा है प्रोटोकॉल
लेवल-थ्री के अस्पताल में भी प्रोटोकॉल को तीन हिस्से में बांटा गया है। पीजीआई में पहुंचने वाले मरीजों को मॉडरेट की श्रेणी में होने के बाद भी कुछ दवाएं दी जाती हैं। 

सदर इलाके में करीब 120 मरीज मिले थे। इसमें 90 मरीज बिना लक्षण वाले थे। इसी तरह कैसरबाग व आसपास मिले करीब 90 मरीजों में 75 में कोई लक्षण नहीं मिले थे। पीएसी के करीब 90 मरीजों और आरपीएफ जीआरपी के 43 मरीजों में भी सिर्फ  पांच मरीज में लक्षण पाए गए थे। इसी तरह हेल्पलाइन सेंटर के 104 और उनके परिवार के 16 मरीजों में किसी में भी लक्षण नहीं पाया गया था। 

मरीजों काे बांटा चार श्रेणियाें में
माइल्ड :
इस श्रेणी के मरीज में किसी तरह के लक्षण नहीं होते हैं। सिर्फ  खानपान दुरुस्त रखा जाता है। बुखार आने पर पैरासीटामॉल और खांसी की दवा दी जाती है। 7 से दस दिन के बीच ठीक हो जाते हैं। स्थिति गंभीर हुई तो लेवल-2 के अस्पताल में रेफर किया जाता है।

मॉडरेट : ऐसे कोरोना मरीज वे होते हैं, जिनमें कुछ लक्षण होते हैं, लेकिन उनकी तीव्रता कम होती है। इन मरीजों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन, विटामिन सी, गले में खराश होने पर एजिंथो माईसिन जैसी दवाई दी जाती हैं। गरारा की सलाह दी जाती है।

गंभीर : इन मरीजों में लक्षण दिखाई पड़ते हैं। सीने में परेशानी होती है। शरीर में तेज दर्द और सांस लेने में भी दिक्कत आती है। इन्हें भर्ती करने पर इंजेक्शन और एंटीवायरल दवाएं दी जाती हैं। कुछ एंटीबायोटिक्स भी देनी पड़ती है। जरूरत पड़ने पर ऑक्सीजन भी दिया जाता है और डायलिसिस व अन्य तकनीक अपनाई जाती हैं।

अति गंभीर : इस श्रेणी में वे मरीज आते हैं, जिन्हें लगातार ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। इन मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा जाता है। एंटीबायोटिक्स,  एंटीवायरल के साथ प्लाज्मा थेरेपी की भी जरूरत पड़ सकती है। ऐसे मरीज लेवल 3 के अस्पताल में अनिवार्य रूप से रखे जाते हैं।

मरीज पर निर्भर करता है इलाज

70 percent corona patients do not require medicines
प्रतीकात्मक तस्वीर
केजीएमयू के संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट के प्रभारी डॉक्टर डी हिमांशु का कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीज को दवा की जरूरत नहीं होती है। केजीएमयू में आए बिना लक्षण वाले मरीज ठीक हुए हैं। लेकिन जिन मरीजों को शुगर ब्लड प्रेशर किडनी संबंधित बीमारी है और कोरोना के लक्षण नहीं है उन्हें दवाएं दी जाती हैं।

लोकबंधु अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. डीएस नेगी का कहना है कि बिना लक्षण वाले मरीज को कोई दवा नहीं दी जाती है। लेकिन उसमें किसी दूसरे तरह की समस्या है तो दवा देनी पड़ती है। गंभीर मरीज को रेफर कर दिया जाता है।

कहां कितने मरीज हैं भर्ती
   संस्थान               राजधानी के       बाहरी 
                              मरीज             मरीज
एसजीपीजीआई          58                 35
केजीएमयू                 44                 22
लोहिया संस्थान          67                   7
लोकबंधु अस्पताल     64                 12
आरएसएम बीकेटी    68                   0
कमांड हॉस्पिटल        7                    0
ईएसआई हॉस्पिटल   19                   0 

बिना लक्षण वाले और पहले से बीमारी की चपेट में न रहने वाले मरीजों को राम सागर मिश्रा अस्पताल बीकेटी, ईएसआई और लोकबंधु अस्पताल में रखा जाता है। मरीज की तबीयत खराब हुई तो केजीएमयूए, पीजीआई या लोहिया संस्थान भेजा जाता है। लोहिया संस्थान और केजीएमयू में भी बिना लक्षण वाले कुछ मरीज भेजे जाते हैं। इन मरीजों को दवा की जरूरत नहीं होती।  - डॉ. नरेंद्र अग्रवाल सीएमओ 
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