इन 5 जगहों से मिलने हैं बिजली विभाग को 2052 करोड़
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एक तरफ आम आदमी पर बिजली की दरों का बोझ बढ़ाया जा रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी विभागों से बिल की वसूली नहीं हो पा रही है। पांच बड़े सरकारी विभाग पावर कॉर्पोरेशन का 2052 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं।
जबकि सरकारी,गैर सरकार उपभोक्ताओं पर पूरे सूबे में बिजली बिल का कुल बकाया 23,890 करोड़ रुपये है। इसका खुलासा नियामक आयोग में पावर कॉर्पोरेशन की ओर से दाखिल किए बकाये की रिपोर्ट से हुआ है।
यह रिपोर्ट दरों के ऐलान से पहले दाखिल की गई थी लेकिन आयोग ने संज्ञान ही नहीं लिया।बिजली कंपनियों के घाटे की एक बड़ी वजह बकाया की वसूली न कर पाना है।
राजस्व वसूली न हो पाने का ठीकरा साल दर साल उपभोक्ताओं के सिर दरों में बढ़ोतरी के रूप में फोड़ा जा रहा है। नियामक आयोग ने नई बिजली दरों के निर्धारण की प्रक्रिया के दौरान ही पावर कॉर्पोरेशन से बकाये का विस्तृत ब्यौरा दाखिल करने को कहा था।
आयोग और पावर कॉर्पोरेशन की बढ़ी मुश्किलें
कॉर्पोरेशन ने 16 जून को रिपोर्ट तो दाखिल कर दी लेकिन आयोग ने इस पर विचार किए बगैर ही 18 जून को नई दरों का ऐलान कर दिया।
बकाये का मामला हाईकोर्ट में पहुंच जाने के बाद पावर कॉर्पोरेशन के साथ-साथ आयोग की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। क्योंकि पीआईएल में इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए कहा गया है कि पहले बकाया वसूला जाए फिर दरें बढ़ाई जाएं। पावर कॉर्पोरेशन व नियामक आयोग को 8 जुलाई को हाईकोर्ट के समक्ष जवाब दाखिल करना है।
जानिए किस विभाग पर कितना बकाया
जल संस्थान 926.25
सिंचाई विभाग 710.56
जल निगम 307.61
स्थानीय निकाय 90.54
नदी प्रदूषण 17.95
(नोट : बकाया रकम करोड़ रुपये में)