फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   45 lakh students will get advantage by this decision.

छात्रों की फीस वापसी पर सरकार का बड़ा फैसला

Wed, 24 Sep 2014 02:25 AM IST
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया/अमर उजाला, लखनऊ Updated Wed, 24 Sep 2014 02:25 AM IST
विज्ञापन
45 lakh students will get advantage by this decision.

गरीब छात्रों की फीस की भरपाई के नियमों में भारी बदलाव करते हुए राज्य सरकार ने इसके लिए सीमा तय कर दी है। अब सामान्य और पिछड़े वर्ग के छात्रों की फीस की वापसी 50 हजार रुपये तक ही की जाएगी।

विज्ञापन


अब तक संस्थान को दी गई पूरी फीस का भुगतान इन वर्गों के छात्रों को किया जाता था। हालांकि एससी-एसटी के छात्रों को इस सीमा से बाहर रखा गया है। इन छात्रों की वास्तविक फीस की प्रतिपूर्ति की जाएगी। इस सत्र में करीब 45 लाख विद्यार्थियों को फीस की प्रतिपूर्ति की जानी है।
विज्ञापन


नई नियमावली के तहत पहले पुराने छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति के बाद ही नए छात्रों पर विचार किया जाएगा। समाज कल्याण के प्रमुख सचिव सुनील कुमार और पिछड़ा वर्ग के प्रमुख सचिव रजनीश गुप्ता ने सामान्य, पिछड़े और अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना (तृतीय संशोधन) नियमावली-2014 जारी कर दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

निजी कॉलेजों को छात्रों को भी लाभ

45 lakh students will get advantage by this decision.

नई नियमावली में कहा गया है कि संस्थान में जो फीस तय है या फिर पचास हजार रुपये तक, जो भी कम होगा उसका ही भुगतान सामान्य व पिछड़े वर्ग के छात्रों को किया जाएगा।

यही नहीं ऐसे निजी संस्थान जिन्हें खुद अपनी फीस तय करने का अधिकार है, उनके छात्रों को दूसरे संस्थानों में उन्हीं पाठ्यक्रमों की तय फीस या पचास हजार रुपये, जो भी कम हो वापस की जाएगी।

ऐसे संस्थान जिनकी शासन ने फीस तय नहीं की है तो वहां के छात्रों को सरकारी संस्थानों में ली जा रही फीस का ही भुगतान किया जाएगा। हालांकि एससी-एसटी के छात्रों को पहले की ही तरह वास्तविक फीस का भुगतान किया जाएगा।

नियमावली में यह भी साफ कर दिया गया है कि अगर छात्र ने ऑनलाइन फीस गलती से भी कम भर दी है तो उसे उतनी ही रकम वापस की जाएगी। वह पचास हजार रुपये की सीमा तक के भुगतान का दावा नहीं कर सकेगा।

अब तक यह थी व्यवस्था

45 lakh students will get advantage by this decision.

अब तक राज्य सरकार विद्यार्थियों से ली जाने वाली पूरी फीस उन्हें वापस करती थी। एमबीबीएस जैसे पाठ्यक्रमों में फीस वापसी की रकम 3-5 लाख रुपये तक होती थी। भरपाई के लिए सभी वर्गों के गरीब बच्चों के लिए समान व्यवस्था थी।

इन्हें मिलता है लाभ
फीस वापसी का लाभ उन्हीं छात्र-छात्राओं को मिलता है, जिनके अभिभावकों की सालाना आमदनी दो लाख रुपये से अधिक नहीं है। यह फॉर्मूला सारे वर्गों के गरीब छात्र-छात्राओं पर लागू होता है।

...पर पात्रता की अब एक और शर्त
नियमावली में फीस वापसी के लिए पात्रता में अभिभावक की आमदनी के साथ ही योग्यता को भी जोड़ दिया गया है। यानी कम आय वर्ग और पिछली कक्षा में अधिक अंक पाए विद्यार्थियों को इसमें तरजीह दी जाएगी। वहीं पाठ्यक्रमों को ग्रुप में बांट दिया गया है और उसके आधार पर वेटेज अंक तय कर दिए गए हैं।

मसलन इंटरमीडिएट, आईटीआई, पॉलीटेक्निक और मैट्रिकुलेशन स्तरीय पाठ्यक्रमों (ऐसे कोर्स जिनमें प्रवेश की योग्यता हाईस्कूल है) के विद्यार्थियों को वरीयताक्रम में सबसे ऊपर रखा गया है।

बदलाव के पीछे ये है असली मंशा

45 lakh students will get advantage by this decision.

ज्यादा से ज्यादा छात्रों को योजना के दायरे में लाना
फीस प्रतिपूर्ति में मनमानियों पर अंकुश लगाना

गड़बड़ी रोकने के लिए उठाए कदम
ऑनलाइन दी गई सूचना में गड़बड़ी मिलने पर शिक्षण संस्थान और संबंधित छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। राजस्व परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध आय प्रमाणपत्र ही सही माने जाएंगे। प्रदेश के बाहर के छात्रों को पांच वर्ष के भीतर का निवास प्रमाणपत्र देना होगा।

ऐसी मनमानियों पर लगेगा अंकुश
पहले संस्थान फीस ज्यादा तय करवा लेते थे। फर्जी एडमिशन कर फीस की भरपाई करा दी जाती और उसमें हिस्सा वसूल लिया जाता था।

सीधे छात्र के खाते में पैसा देने के बजाय जिलों और फिर खाते में फीस भेजे जाने से गड़बड़ियां सामने आती थीं। हापुड़, गौतमबुद्धनगर में ऐसे मामले सामने आए थे जिनमें फीस प्रतिपूर्ति की फर्जी लिस्ट तैयार कर ली गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed