{"_id":"59b18d5c4f1c1be57f8b4c79","slug":"41504808284-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बाल विकास राज्यमंत्री के जिले में सर्वाधिक कुपोषित बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बाल विकास राज्यमंत्री के जिले में सर्वाधिक कुपोषित बच्चे
Updated Thu, 07 Sep 2017 11:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। नीति आयोग ने देशभर में कुपोषण के शिकार बच्चों के आंकड़े जुटाकर सबसे खराब स्थिति वाले 100 जिलों की सूची जारी की है। इनमें उत्तर प्रदेश के 29 जिले शामिल हैं। अवध क्षेत्र के तीन जिले तो टॉप थ्री में हैं। राज्य की बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल के गृह जनपद बहराइच में सर्वाधिक बच्चे कुपोषित हैं। बावजूद इसके सरकारी योजनाएं धरातल पर उतर ही नहीं सकीं। यहां 2236 गर्भवती महिलाएं एनीमिक हैं। वहीं 11 हजार बच्चे कुपोषित और 40 हजार बच्चे अतिकुपोषित मिले हैं।
बहराइच जनपद में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से 15 परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 3094 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। बाल विकास महकमे पर ग्रामीण क्षेत्र की 43,366 गर्भवती महिलाओं और चार लाख के करीब बच्चों की सेहत सुधारने का जिम्मा है। सदर विधायक अनुपमा जायसवाल के योगी सरकार में बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री बनने के बाद जिले के हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी, मगर ऐसा होता दिख नहीं रहा। वर्ष 2016 के दिसंबर माह में जिले में 5 वर्ष तक के 56 हजार 810 बच्चों का वजन कराया गया था। इसमें 14 हजार के करीब कुपोषित और 42 हजार के करीब अतिकुपोषित बच्चे मिले थे। वर्ष 2017 के जुलाई माह तक इन बच्चों की सेहत में कोई सुधार नहीं दिखा। अभी भी 11 हजार 748 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं 40 हजार 623 बच्चे अतिकुपोषित हैं। 43,366 गर्भवती महिलाओं में 2236 एनीमिक मिली हैं। जिनमें से गंभीर 348 महिलाओं का जिला अस्पताल में इलाज हो रहा है।
कुपोषण का मुख्य कारण
सीएमओ डॉ अरुण पांडे बताते हैं कि गरीबी, अशिक्षा, योजनाओं के प्रचार प्रसार का अभाव, कम उम्र में विवाह व बच्चों के जन्म में अंतर कम होना कुपोषण का मुख्य कारण है। माता कुपोषित हुई तो निश्चित ही बच्चा भी कुपोषित होगा। जिले में औसतन सौ में से 35-40 बच्चों का जन्म के समय वजन औसत से कम होता है। इसका कारण जन्म देने वाली माता में रक्त अल्पता होना है।
विज्ञापन
कुपोषण से बचाव के उपाय
डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों की सही उम्र पर ही शादी करें। बच्चों के जन्म में कम से कम तीन वर्ष का अंतर होना चाहिए। गर्भ की जानकारी होने के साथ ही योग्य चिकित्सक की देखरेख में समय समय पर जांच कराते रहना चाहिए। संस्थागत प्रसव कराने के साथ ही गर्भधात्री व प्रसूतिका को पौष्टिक भोजन करना चाहिए। अशिक्षा, बाल विवाह से दूर रह कर कुपोषण से बचा जा सकता है। साथ ही गर्भधात्री महिला को घर पर उपलब्ध होने वाले जैसे दाल, हरी सब्जी, दूध, मौसमी फल आदि का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। गर्भ के दौरान आयरन की गोली चिकित्सक की सलाह से लेते रहना चाहिए।
बजट ही नहीं, योजना बंद
यूपी सरकार ने हौसला पोषण मिशन योजना चलाई थी। जिसके तहत डिब्बाबंद दूध और घी का वितरण किया जा रहा था। हालांकि मार्च 2017 से यह योजना बंद कर दी गई। अब कुपोषण दूर करने के लिए कोई बजट नहीं है। हॉट कुक के लिए भी फरवरी में बजट आया था। इसके बाद से कोई बजट नहीं मिला। बजट आने पर कार्रवाई की जाएगी। - सुनील श्रीवास्तव, डीपीओ, बहराइच
विज्ञापन
बहराइच जनपद में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से 15 परियोजनाओं का संचालन किया जा रहा है। जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में 3094 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। बाल विकास महकमे पर ग्रामीण क्षेत्र की 43,366 गर्भवती महिलाओं और चार लाख के करीब बच्चों की सेहत सुधारने का जिम्मा है। सदर विधायक अनुपमा जायसवाल के योगी सरकार में बाल विकास एवं पुष्टाहार राज्यमंत्री बनने के बाद जिले के हालात सुधरने की उम्मीद जगी थी, मगर ऐसा होता दिख नहीं रहा। वर्ष 2016 के दिसंबर माह में जिले में 5 वर्ष तक के 56 हजार 810 बच्चों का वजन कराया गया था। इसमें 14 हजार के करीब कुपोषित और 42 हजार के करीब अतिकुपोषित बच्चे मिले थे। वर्ष 2017 के जुलाई माह तक इन बच्चों की सेहत में कोई सुधार नहीं दिखा। अभी भी 11 हजार 748 बच्चे कुपोषित हैं। वहीं 40 हजार 623 बच्चे अतिकुपोषित हैं। 43,366 गर्भवती महिलाओं में 2236 एनीमिक मिली हैं। जिनमें से गंभीर 348 महिलाओं का जिला अस्पताल में इलाज हो रहा है।
विज्ञापन
कुपोषण का मुख्य कारण
सीएमओ डॉ अरुण पांडे बताते हैं कि गरीबी, अशिक्षा, योजनाओं के प्रचार प्रसार का अभाव, कम उम्र में विवाह व बच्चों के जन्म में अंतर कम होना कुपोषण का मुख्य कारण है। माता कुपोषित हुई तो निश्चित ही बच्चा भी कुपोषित होगा। जिले में औसतन सौ में से 35-40 बच्चों का जन्म के समय वजन औसत से कम होता है। इसका कारण जन्म देने वाली माता में रक्त अल्पता होना है।
विज्ञापन
कुपोषण से बचाव के उपाय
डॉक्टर बताते हैं कि बच्चों की सही उम्र पर ही शादी करें। बच्चों के जन्म में कम से कम तीन वर्ष का अंतर होना चाहिए। गर्भ की जानकारी होने के साथ ही योग्य चिकित्सक की देखरेख में समय समय पर जांच कराते रहना चाहिए। संस्थागत प्रसव कराने के साथ ही गर्भधात्री व प्रसूतिका को पौष्टिक भोजन करना चाहिए। अशिक्षा, बाल विवाह से दूर रह कर कुपोषण से बचा जा सकता है। साथ ही गर्भधात्री महिला को घर पर उपलब्ध होने वाले जैसे दाल, हरी सब्जी, दूध, मौसमी फल आदि का अधिक से अधिक सेवन करना चाहिए। गर्भ के दौरान आयरन की गोली चिकित्सक की सलाह से लेते रहना चाहिए।
बजट ही नहीं, योजना बंद
यूपी सरकार ने हौसला पोषण मिशन योजना चलाई थी। जिसके तहत डिब्बाबंद दूध और घी का वितरण किया जा रहा था। हालांकि मार्च 2017 से यह योजना बंद कर दी गई। अब कुपोषण दूर करने के लिए कोई बजट नहीं है। हॉट कुक के लिए भी फरवरी में बजट आया था। इसके बाद से कोई बजट नहीं मिला। बजट आने पर कार्रवाई की जाएगी। - सुनील श्रीवास्तव, डीपीओ, बहराइच