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मिलावटी सरसों का तेल बेचने वाले व्यवसायी को उम्रकैद
Updated Mon, 17 Jul 2017 11:48 PM IST
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मामला 2010 का, पूराबाजार के दुकानदार के खिलाफ दर्ज कराई थी रिपोर्ट
फैजाबाद। मिलावटी तेल बेचकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले व्यवसायी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गयी। कोर्ट ने आरोपी पर पांच हजार जुर्माना भी ठोका है। फैसला अपर जिलाजज हरिनाथ पांडेय की कोर्ट से सोमवार को हुआ है। मामला महाराजगंज थाने के पूराबाजार का है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरालाल ने 20 मई 2010 को पूराबाजार स्थित राजकुमार गुप्ता की खाद्य पदार्थ की दुकान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सरसों के तेल में मिलावट होने का संदेह होने पर दुकान से 600 मिली लीटर सरसों का तेल खरीदा था।
उसका नमूना बनाते हुए उन्होंने जांच के लिए राजकीय जन विशलेषक लखनऊ के यहां भेजा था। नमूने के विशलेषण रिपोर्ट में सरसों के तेल को अपमिश्रित पाया गया था जिसमें जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिंथेटिक कलर पाया गया था।
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जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने राजकुमार गुप्ता के खिलाफ महराजगंज थाने में की धारा 272,273 आईपीसी (खाद्य या पेय पदार्थ यह जानते हुए बेचना कि अपमिश्रित है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है) में रिपोर्ट लिखाई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने खाद्य अपमिश्रण का दोषी पाते हुए उसे सजा सुनाई।
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फैजाबाद। मिलावटी तेल बेचकर लोगों के जीवन से खिलवाड़ करने वाले व्यवसायी को आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई गयी। कोर्ट ने आरोपी पर पांच हजार जुर्माना भी ठोका है। फैसला अपर जिलाजज हरिनाथ पांडेय की कोर्ट से सोमवार को हुआ है। मामला महाराजगंज थाने के पूराबाजार का है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्र ने बताया कि मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हीरालाल ने 20 मई 2010 को पूराबाजार स्थित राजकुमार गुप्ता की खाद्य पदार्थ की दुकान का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने सरसों के तेल में मिलावट होने का संदेह होने पर दुकान से 600 मिली लीटर सरसों का तेल खरीदा था।
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उसका नमूना बनाते हुए उन्होंने जांच के लिए राजकीय जन विशलेषक लखनऊ के यहां भेजा था। नमूने के विशलेषण रिपोर्ट में सरसों के तेल को अपमिश्रित पाया गया था जिसमें जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिंथेटिक कलर पाया गया था।
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जांच रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने राजकुमार गुप्ता के खिलाफ महराजगंज थाने में की धारा 272,273 आईपीसी (खाद्य या पेय पदार्थ यह जानते हुए बेचना कि अपमिश्रित है और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है) में रिपोर्ट लिखाई थी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने खाद्य अपमिश्रण का दोषी पाते हुए उसे सजा सुनाई।