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UP News: 300 एमबीबीएस छात्रों का भविष्य दांव पर, पांच साल पढ़ाई के बाद भी डिग्री को नहीं मिल पाई मान्यता

Thu, 11 May 2023 12:25 PM IST
ishwar ashish चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ
चंद्रभान यादव, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 11 May 2023 12:25 PM IST
सार

पांच साल की पढ़ाई के बाद छात्रों की डिग्री को मान्यता नहीं मिल पाई है। ये छात्र सड़क पर है। कॉलेजों का पंजीकरण न होने से उनका भविष्य अधर में लटक गया है।

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300 MBBS students degree not verified.
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

300 एमबीबीएस छात्र पांच साल की पढ़ाई के बाद सड़क पर हैं। उनकी डिग्री को मान्यता नहीं मिल पाई है। ऐसे में वे न तो नीट पीजी दे सकते हैं और न ही किसी मरीज का इलाज कर सकते हैं। उनका भविष्य दांव पर है, लिहाजा कॉलेज से लेकर महानिदेशालय तक चक्कर काट रहे हैं।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड सुपर स्पेशियलिटी आजमगढ़, शेख उलहिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज सहारनपुर व रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज बांदा में 2017 बैच में 100-100 छात्रों ने दाखिला लिया। चार साल पढ़ाई व एक साल इंटर्नशिप की, लेकिन डिग्री की बारी आई तो पता चला कि इन कॉलेजों को 2017 बैच के लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने सशर्त मान्यता दी थी। शर्तें पूरी न करने से इन्हें नियमित मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में इनका उप्र. मेडिकल फैकल्टी में पंजीयन नहीं हो सकता है।
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ये छात्र अब खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं, क्योंकि दाखिला लेने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि 5 साल कोर्स पूरा करते ही इनका कॅरियर बन जाएगा। कुछ छात्र परास्नातक में दाखिला लेना चाहते थे तो कुछ प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के तहत सरकारी अस्पताल में सेवा का सपना संजोए थे। पर अब ये छात्र निरंतर भागदौड़ कर रहे हैं। यह देख महानिदेशालय में नए सिरे से मान्यता संबंधी पत्रावलियों की पड़ताल शुरू की गई है।

2018 बैच पर भी संकट
इन कॉलेजों में 2018 बैच की भी इंटर्नशिप चल रही है। ये छात्र करीब छह माह बाद पास होकर निकलेंगे। इनके भी पंजीयन पर संकट है। यदि समय रहते इन पर फैसला नहीं हुआ तो 300 अन्य छात्रों को पंजीयन के लिए इंतजार करना पड़ेगा।

एमबीबीएस छात्रों की मान्यता में चूक की हो रही पड़ताल

प्रदेश के 300 एमबीबीएस छात्रों के पंजीयन में आ रही समस्या और मान्यता में कहां चूक हुई, इसकी पड़ताल कराई जा रही है। किसकी गलती से मान्यता फंसी रही, इस पर भी शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी। यह जानकारी देते हुए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई), किंजल सिंह ने बताया कि विधिक राय लेते हुए जल्द से जल्द छात्रों की समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जा रहा है।

मालूम हो कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) की टीम मेडिकल कॉलेजों का हर साल निरीक्षण करती है। शिक्षकों की संख्या, लैब व अन्य संसाधन के आधार पर संबंधित कॉलेज को मान्यता देती है। संसाधन कम होने पर सीटें कम कर दी जाती हैं। आजमगढ़, सहारनपुर और बांदा के मेडिकल कॉलेजों को 100-100 छात्रों के दाखिले की सशर्त मान्यता दी गई थी। 2019 में कोविड आ गया। ऐसे में इन कॉलेजों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई। स्थलीय परीक्षण नहीं हुआ। महानिदेशालय ने भी इस संबंध में सक्रियता नहीं दिखाई, जिसका नतीजा था कि 2017 व 2018 का मामला लंबित रहा। अब 2017 बैच के छात्र परीक्षा पास कर पंजीयन के लिए निकले तो समस्या पता चली।

- राजकीय मेडिकल कॉलेज एंड सुपर स्पेशियलिटी, आजमगढ़ के प्रधानाचार्य डॉ. आरपी शर्मा का कहना है कि कुछ समस्या आई है। मामले में डीजीएमई को पत्र लिखा गया है। शासन से भी बात चल रही है। कोशिश है कि जल्द से जल्द छात्रों को राहत दी जाए।

- रानी दुर्गावती राजकीय मेडिकल कॉलेज, बांदा की प्रधानाचार्य डॉ. सुनील कुमार का कहना है कि मैंने अभी कुछ दिन पहले कार्यभार ग्रहण किया है। यह मामला 2017 का है। उस वक्त भौतिक सत्यापन नहीं होने की वजह से मान्यता फंस गई है। समस्या का समाधान कराया जा रहा है।

- शेख उलहिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज, सहारनपुर के प्रधानाचार्य डॉ. संगीता अनेजा का कहना है कि  यह मामला मेरे कार्यभार ग्रहण करने से पहले का है फिर भी महानिदेशालय को अवगत कराया गया है।

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