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यूपी में बंद हो सकती हैं 2000 मेगावाट की तापीय इकाइयां, उत्पन्न हो सकता है जबर्दस्त बिजली संकट
Mon, 19 Oct 2020 10:24 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 19 Oct 2020 10:24 PM IST
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- फोटो : पेक्सेल्स
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प्रदेश में करीब 2000 मेगावाट क्षमता की तापीय बिजली इकाइयों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। ये वह इकाइयों हैं जो पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण अथॉरिटी (ईपीसीए) द्वारा 2015 में तय पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं कर पाई हैं हैं और मानक से ज्यादा फ्लू गैस का उत्सर्जन कर रही हैं। ईपीसीए अगर इन इकाइयों को बंद करने का आदेश देता है तो प्रदेश में बिजली का जबर्दस्त संकट खड़ा हो सकता है।
आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता और खराब होने के मद्देनजर ईपीसीए ने यूपी और हरियाणा सरकार को उन तापीय बिजली इकाइयों को बंद करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दे दी है जो 2015 में तय किए पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करते हैं। प्रदेश में सार्वजनिक, निजी व सयुंक्त क्षेत्र में कुल मिलाकर 13000 मेगावाट से ज्यादा क्षमता की ताप बिजली इकाइयां हैं। इनमें बहुत सी इकाइयां काफी पुरानी हैं और ईपीसीए द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इनमें अनपरा ए बिजली घर की 210-210 मेगावाट क्षमता की तीन और अनपरा बी की 500-500 मेगावाट की दो, ओबरा की 200-200 मेगावाट की पांच इकाइयां, पारीछा की 110-110 मेगावाट की दो और हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक इकाई शामिल हैं।
ईपीसीए ने इन बिजलीघरों में प्रदूषण रोकने के लिए फ्यूल गैस डिसल्फराइज्ड सिस्टम (एफजीडीएस) और सेलेक्टिव कैटलिटिक रिड्यूसर (एससीआर) लगाने को कहा है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम इन इकाइयों में एफजीडीएस व एससीआर लगवाने की योजना तैयार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार कुछ इकाइयों में काम शुरू भी कराया गया है लेकिन इसकी प्रक्रिया काफी धीमी है। अगर ईपीसीए इन इकाइयों को बंद करने का आदेश देता है तो प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में 2000 मेगावाट की कमी हो जाएगी और इससे बिजली का जबर्दस्त संकट पैदा हो सकता है।
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उधर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार का कहना है कि तापीय इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र लगवाने के मामले में यूपी अन्य प्रदेशों के मुकाबले काफी आगे है। इस पर काम चल रहा है। जहां तक ईपीसीए के आदेश का सवाल है तो एनसीआर केसंदर्भ में हैं। एनसीआर में प्रदेश सरकार का कोई बिजलीघर नहीं है। एनटीपीसी के बिजलीघर हैं। अलबत्ता ईपीसीए ने एनसीआर क्षेत्र की वायु गुणता कुप्रभावित होने से रोकने के लिए पिछले साल की तरह कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसमें ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत गाजियाबाद व नोएडा में डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल बंद करने के आदेश के मद्देनजर दोनों जगह 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने को कहा गया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी को इसके निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अपरिहार्य परिस्थितियों में ही शटडाउन लेने को कहा गया है।
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आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता और खराब होने के मद्देनजर ईपीसीए ने यूपी और हरियाणा सरकार को उन तापीय बिजली इकाइयों को बंद करने के लिए तैयार रहने की चेतावनी दे दी है जो 2015 में तय किए पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करते हैं। प्रदेश में सार्वजनिक, निजी व सयुंक्त क्षेत्र में कुल मिलाकर 13000 मेगावाट से ज्यादा क्षमता की ताप बिजली इकाइयां हैं। इनमें बहुत सी इकाइयां काफी पुरानी हैं और ईपीसीए द्वारा निर्धारित पर्यावरणीय मानकों को पूरा नहीं करती हैं। इनमें अनपरा ए बिजली घर की 210-210 मेगावाट क्षमता की तीन और अनपरा बी की 500-500 मेगावाट की दो, ओबरा की 200-200 मेगावाट की पांच इकाइयां, पारीछा की 110-110 मेगावाट की दो और हरदुआगंज की 110 मेगावाट की एक इकाई शामिल हैं।
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ईपीसीए ने इन बिजलीघरों में प्रदूषण रोकने के लिए फ्यूल गैस डिसल्फराइज्ड सिस्टम (एफजीडीएस) और सेलेक्टिव कैटलिटिक रिड्यूसर (एससीआर) लगाने को कहा है। राज्य विद्युत उत्पादन निगम इन इकाइयों में एफजीडीएस व एससीआर लगवाने की योजना तैयार कर रहा है। सूत्रों के अनुसार कुछ इकाइयों में काम शुरू भी कराया गया है लेकिन इसकी प्रक्रिया काफी धीमी है। अगर ईपीसीए इन इकाइयों को बंद करने का आदेश देता है तो प्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता में 2000 मेगावाट की कमी हो जाएगी और इससे बिजली का जबर्दस्त संकट पैदा हो सकता है।
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उधर, अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व पावर कार्पोरशन के अध्यक्ष अरविंद कुमार का कहना है कि तापीय इकाइयों में प्रदूषण नियंत्रण संयंत्र लगवाने के मामले में यूपी अन्य प्रदेशों के मुकाबले काफी आगे है। इस पर काम चल रहा है। जहां तक ईपीसीए के आदेश का सवाल है तो एनसीआर केसंदर्भ में हैं। एनसीआर में प्रदेश सरकार का कोई बिजलीघर नहीं है। एनटीपीसी के बिजलीघर हैं। अलबत्ता ईपीसीए ने एनसीआर क्षेत्र की वायु गुणता कुप्रभावित होने से रोकने के लिए पिछले साल की तरह कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसमें ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत गाजियाबाद व नोएडा में डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल बंद करने के आदेश के मद्देनजर दोनों जगह 24 घंटे बिजली आपूर्ति करने को कहा गया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के एमडी को इसके निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अपरिहार्य परिस्थितियों में ही शटडाउन लेने को कहा गया है।