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जमीन पर स्कूल नहीं फिर भी उसके करीब 200 छात्र देंगे बोर्ड परीक्षा
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शिक्षा के नाम पर कारोबार करने वालों ने सारी सीमाएं लांघ दी है। इसका जीता जागता उदाहरण है सात साल पहले बंद हो चुके हिंद नगर स्थित स्टर्लिंग पब्लिक स्कूल के नाम पर भरे गए 200 बच्चों के परीक्षा फॉर्म।
अंधेरगर्दी इतनी कि इन हाई स्कूल व इंटर के छात्रों को परीक्षा केंद्र भी अलॉट कर दिए गए हैं। इसका खुलासा बुधवार शाम तब हुआ जब यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची जारी हुई, जिसमें इन छात्रों को बाकायदा अलग-अलग परीक्षा केंद्र अलॉट किए गए।
विभागीय गठजोड़ से गड़बड़ियों को अंजाम देने का यह अनोखा मामला है। वह भी तब जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
परीक्षा केंद्रों और शिफ्टिंग सूची की गहनता से पड़ताल में पता चला कि हिंद नगर स्थित स्टर्लिंग पब्लिक स्कूल के करीब 200 छात्रों को परीक्षा केंद्र अलॉट किया गया है जबकि यह स्कूल सात साल से जमीन पर है ही नहीं।
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यूपी सैनिक स्कूल में इंटर की करीब 15 छात्राएं, जनता इंटर कॉलेज में हाई स्कूल के 49 और इंटर के 45 छात्रों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
वहीं, हीरालाल यादव गर्ल्स इंटर कॉलेज में करीब 34 छात्राओं का परीक्षा केंद्र बनाया गया है। यह सभी छात्र स्टर्लिंग पब्लिक स्कूल के हैं।
सबसे बड़ा सवाल है कि जब स्कूल जमीन पर है ही नहीं तो छात्रों के फॉर्म कैसे भराये जा रहे हैं। ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बावजूद विभाग से अनुमति कैसे दी जा रही है।
दो साल पहले ही जांच में हुई थी पुष्टि
दो साल पहले ऐसा ही मामला संज्ञान में आने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान स्कूल अपने स्थान पर नहीं मिला। बताया जा रहा है कि वह सात साल से बंद चल रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेज दी थी। साथ ही स्कूल की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति भी कर दी थी, लेकिन इसे विभाग की हीलाहवाली कहा जाए या गठजोड़, कागजों पर स्कूल की मान्यता अभी भी चल रही है और छात्रों के बोर्ड फॉर्म भी भराये गए हैं।
परिषद को लेना है निर्णय
30 जनवरी तक आपत्तियां मंगाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट बनाकर माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेज दी जाएगी। निर्णय परिषद को लेना है।
- डॉ. मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
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अंधेरगर्दी इतनी कि इन हाई स्कूल व इंटर के छात्रों को परीक्षा केंद्र भी अलॉट कर दिए गए हैं। इसका खुलासा बुधवार शाम तब हुआ जब यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों की सूची जारी हुई, जिसमें इन छात्रों को बाकायदा अलग-अलग परीक्षा केंद्र अलॉट किए गए।
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विभागीय गठजोड़ से गड़बड़ियों को अंजाम देने का यह अनोखा मामला है। वह भी तब जब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
परीक्षा केंद्रों और शिफ्टिंग सूची की गहनता से पड़ताल में पता चला कि हिंद नगर स्थित स्टर्लिंग पब्लिक स्कूल के करीब 200 छात्रों को परीक्षा केंद्र अलॉट किया गया है जबकि यह स्कूल सात साल से जमीन पर है ही नहीं।
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यूपी सैनिक स्कूल में इंटर की करीब 15 छात्राएं, जनता इंटर कॉलेज में हाई स्कूल के 49 और इंटर के 45 छात्रों का परीक्षा केंद्र बनाया गया है।
वहीं, हीरालाल यादव गर्ल्स इंटर कॉलेज में करीब 34 छात्राओं का परीक्षा केंद्र बनाया गया है। यह सभी छात्र स्टर्लिंग पब्लिक स्कूल के हैं।
सबसे बड़ा सवाल है कि जब स्कूल जमीन पर है ही नहीं तो छात्रों के फॉर्म कैसे भराये जा रहे हैं। ऑनलाइन मॉनिटरिंग के बावजूद विभाग से अनुमति कैसे दी जा रही है।
दो साल पहले ही जांच में हुई थी पुष्टि
दो साल पहले ऐसा ही मामला संज्ञान में आने के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे। जांच के दौरान स्कूल अपने स्थान पर नहीं मिला। बताया जा रहा है कि वह सात साल से बंद चल रहा है। इसकी रिपोर्ट जिला विद्यालय निरीक्षक ने माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेज दी थी। साथ ही स्कूल की मान्यता समाप्त करने की संस्तुति भी कर दी थी, लेकिन इसे विभाग की हीलाहवाली कहा जाए या गठजोड़, कागजों पर स्कूल की मान्यता अभी भी चल रही है और छात्रों के बोर्ड फॉर्म भी भराये गए हैं।
परिषद को लेना है निर्णय
30 जनवरी तक आपत्तियां मंगाई जा रही है। इसकी रिपोर्ट बनाकर माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेज दी जाएगी। निर्णय परिषद को लेना है।
- डॉ. मुकेश कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक