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हर चौथा बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में
Updated Thu, 07 Sep 2017 10:16 PM IST
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सुल्तानपुर। तमाम सरकारी दावों के बावजूद जिले में कुपोषित बच्चों की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। जिले के कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
हालत यह है कि 22 लाख की आबादी में छह साल तक के करीब तीन लाख बच्चों में करीब 75 हजार कुपोषित व अतिकुपोषित हैं।
यानि कि हर चौथा बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में है। बाल विकास महकमे की सर्वे रिपोर्ट ही इसकी पोल खोल रही है। बाल विकास विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में बच्चों में कुपोषण व महिलाआें में एनीमिया की शिकायतें मिली हैं।
सर्वे में 50,436 बच्चे कुपोषित एवं 25,325 अतिकुपोषित पाए गए हैं। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या के अभी और बढ़ने के आसार हैं। विभाग में इसकी फीडिंग चल रही है।
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स्वास्थ्य एवं बाल विकास के संयुक्त सर्वे में 53 हजार महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई गई थीं। बच्चों को कुपोषण एवं अतिकुपोषण से बचाने के लिए सरकार की ओर से हॉट कुक्ड योजना संचालित की गई थी।
इसके तहत बच्चों को दूध, फल, घी व गर्म भोजन खिलाने की व्यवस्था आंगनबाड़ी केंद्रों पर की गई थी। अब यह योजना बंद हो गई है। मौजूदा समय में सिर्फ पुष्टाहार योजना संचालित की जा रही है।
महिलाओं की मिलती सिर्फ आयरन की गोली
महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयरन की गोलियां एवं अन्य दवाएं दी जाती हैं। पूर्व में महिलाओं को भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पौष्टिक आहार व दूध आदि दिया जाता था। अब यह योजना भी बंद हो गई।
बजट के अभाव में पौष्टिक आहार योजना बंद
कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए बजट के अभाव में पौष्टिक आहार योजना बंद हो गई। सिर्फ पुष्टाहार की आपूर्ति शासन से मिल रही है। बजट के अभाव में अन्य योजनाएं भी बंद चल रही हैं।
समस्या की जड़ में खानपान की कमी
बच्चों में कुपोषण की प्रमुख वजह चिकित्सक खानपान की कमी मानते हैं। डॉ. आरए वर्मा का कहना कि गर्भवती महिलाओं में खानपान की कमी से यह समस्या आती है।
बच्चे कमजोर व कुपोषित पैदा होते हैं। चिकित्सक डॉ. एएन सिंह का कहना है कि गर्भ के समय महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं स्वस्थ होंगी तो बच्चा तंदुरुस्त पैदा होगा। शहर निवासी शिल्पी का कहना है कि कुपोषण के पीछे जागरूकता की भी कमी है। महिलाएं अगर जागरूक हों तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की आवश्यकता है।
पुष्टाहार योजना का दिया जा रहा लाभ
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह का कहना है कि शासन से पुष्टाहार योजना संचालित है। योजना का लाभ बच्चों को दिया जा रहा है। अन्य योजना संचालित होने पर उसका भी लाभ दिया जाएगा।
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हालत यह है कि 22 लाख की आबादी में छह साल तक के करीब तीन लाख बच्चों में करीब 75 हजार कुपोषित व अतिकुपोषित हैं।
यानि कि हर चौथा बच्चा कुपोषण की गिरफ्त में है। बाल विकास महकमे की सर्वे रिपोर्ट ही इसकी पोल खोल रही है। बाल विकास विभाग की ओर से कराए गए सर्वे में बच्चों में कुपोषण व महिलाआें में एनीमिया की शिकायतें मिली हैं।
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सर्वे में 50,436 बच्चे कुपोषित एवं 25,325 अतिकुपोषित पाए गए हैं। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या के अभी और बढ़ने के आसार हैं। विभाग में इसकी फीडिंग चल रही है।
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स्वास्थ्य एवं बाल विकास के संयुक्त सर्वे में 53 हजार महिलाएं एनीमिया की शिकार पाई गई थीं। बच्चों को कुपोषण एवं अतिकुपोषण से बचाने के लिए सरकार की ओर से हॉट कुक्ड योजना संचालित की गई थी।
इसके तहत बच्चों को दूध, फल, घी व गर्म भोजन खिलाने की व्यवस्था आंगनबाड़ी केंद्रों पर की गई थी। अब यह योजना बंद हो गई है। मौजूदा समय में सिर्फ पुष्टाहार योजना संचालित की जा रही है।
महिलाओं की मिलती सिर्फ आयरन की गोली
महिलाओं को एनीमिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयरन की गोलियां एवं अन्य दवाएं दी जाती हैं। पूर्व में महिलाओं को भी आंगनबाड़ी केंद्रों पर पौष्टिक आहार व दूध आदि दिया जाता था। अब यह योजना भी बंद हो गई।
बजट के अभाव में पौष्टिक आहार योजना बंद
कुपोषण से बच्चों को बचाने के लिए बजट के अभाव में पौष्टिक आहार योजना बंद हो गई। सिर्फ पुष्टाहार की आपूर्ति शासन से मिल रही है। बजट के अभाव में अन्य योजनाएं भी बंद चल रही हैं।
समस्या की जड़ में खानपान की कमी
बच्चों में कुपोषण की प्रमुख वजह चिकित्सक खानपान की कमी मानते हैं। डॉ. आरए वर्मा का कहना कि गर्भवती महिलाओं में खानपान की कमी से यह समस्या आती है।
बच्चे कमजोर व कुपोषित पैदा होते हैं। चिकित्सक डॉ. एएन सिंह का कहना है कि गर्भ के समय महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
गर्भवती महिलाएं स्वस्थ होंगी तो बच्चा तंदुरुस्त पैदा होगा। शहर निवासी शिल्पी का कहना है कि कुपोषण के पीछे जागरूकता की भी कमी है। महिलाएं अगर जागरूक हों तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की आवश्यकता है।
पुष्टाहार योजना का दिया जा रहा लाभ
जिला कार्यक्रम अधिकारी आशा सिंह का कहना है कि शासन से पुष्टाहार योजना संचालित है। योजना का लाभ बच्चों को दिया जा रहा है। अन्य योजना संचालित होने पर उसका भी लाभ दिया जाएगा।