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लखनऊ आरबीआई - एचपीआई
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लखनऊ में प्रॉपर्टी खरीदना फायदे का सौदा, सबसे ज्यादा रिर्टन यहीं मिल रहा
आरबीआई ने जारी किया हाउस प्राइस इंडेक्स, 10 शहरों में रिटर्न के मामले में लखनऊ शीर्ष पर
05 वर्षों से देश के औसत से 41 फीसदी ज्यादा फायदा मिल रहा लखनऊ को
कानपुर-दिल्ली रिटर्न का फायदा देने में दूसरे व तीसरे नंबर पर
अभिषेक यादव/अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। आप यदि प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो इस लिहाज से लखनऊ में निवेश करना फायदे का सौदा होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी हाउस प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) के मुताबिक, कानपुर, दिल्ली, मुंबई समेत देश के दस प्रमुख शहरों में खरीदी गई आवासीय संपत्ति में किए गए निवेश पर सबसे ज्यादा रिटर्न लखनऊ में ही मिल रहा है। यहां सालाना रिटर्न 13.1 प्रतिशत है, जबकि देश में 9.3 यानी करीब 41 फीसदी ज्यादा। बीते एक वर्ष में भी लखनऊ में प्रॉपर्टी की कीमतें रिटर्न के लिहाज से चौथी सर्वाधिक रहीं।
आरबीआई के सहायक सलाहकार अजित प्रसाद के अनुसार, यह रिपोर्ट देश के 10 प्रमुख शहरों के आवास प्राधिकरणों से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्राधिकरणों और एजेंसियों में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के दर्ज आंकड़ों को आधार बनाया गया है। लखनऊ के इस ट्रेंड ने फिर एक बार साबित किया है कि क्यों लंबे समय के निवेश के लिहाज से संपत्तियां राजधानीवासियों की पसंद रही हैं। हालांकि तीन और एक साल के लिहाज से यह रिटर्न कम रहे हैं, लेकिन उम्मीद भी बनी हुई है कि लंबे समय के दौरान वे अच्छा रिटर्न पा सकेंगे।
ज्यादा फायदा चाहिए तो लंबे समय के लिए करें निवेश
- एचपीआई के मुताबिक, शॉर्ट टर्म के दौरान लखनऊ मेें संपत्तियों से रिटर्न उतना अच्छा नहीं रहा। हालांकि यह देश के औसत से बेहतर रहा।
- पिछले तीन वर्षों शहर में 10.1 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिला और सूची में दूसरा स्थान रहा। देश का औसत 6.7 प्रतिशत रहा।
- एक वर्ष के लिहाज से लखनऊ में प्रॉपर्टी पर रिटर्न 6.4 प्रतिशत ही रहा। देश का औसत 4.7 ही था। सूची में चौथा स्थान रहा।
-------------------
रिटर्न में उतार-चढ़ाव की वजह
इंडेक्स के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में लखनऊ में संपत्तियों का निर्माण तेजी से हुआ और मांग में अचानक से कमी आ गई। इसी कारण रिटर्न में उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
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पांच साल में दिल्ली-मुंबई से ज्यादा फायदा
शहर - रिटर्न प्रतिशत
लखनऊ - 13.1
कानपुर - 11.3
दिल्ली - 10.4
मुंबई - 9.8
कोची - 9.5
देश में औसत - 9.3
तीन साल में प्रदर्शन : देश में दूसरे स्थान पर लखनऊ
शहर - रिटर्न प्रतिशत
कोची - 17.3
लखनऊ - 10.1
मुंबई - 8.4
अहमदाबाद - 8
चेन्नई - 6.8
देश में औसत - 6.7
एक साल में प्रदर्शन : देश के औसत से ज्यादा
शहर - रिटर्न प्रतिशत
कोची - 28.8
चेन्नई - 13.8
बेंगलुरु - 7.8
लखनऊ - 6.4
मुंबई - 3.5
देश का औसत - 4.7
...लेकिन आवास विकास और एलडीए को नहीं मिल रहे खरीदार
2600 फ्लैट आवास विकास में खाली
3500 फ्लैट एलडीए के खाली
आरबीआई की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही लखनऊ में संपत्ति खरीदना फायदे का सौदा है, लेकिन आवास विकास परिषद व एलडीए के हजारों फ्लैटों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। यह सच तीन और एक वर्ष की अवधि में मिले कम रिटर्न की स्थिति को स्पष्ट भी करता है। अकेले आवास विकास परिषद के पास इस समय 30 लाख रुपये 80 लाख रुपये कीमत तक के करीब 2600 फ्लैट बिक नहीं रहे हैं। ये सभी रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी हैं। एलडीए के मामले में यह आंकड़ा 3.5 हजार फ्लैट तक पहुंच जाता है। इनकी कीमतें 22 लाख से एक करोड़ तक हैं। एलडीए ने हाल ही नई रिहायशी योजनाएं लाने से पहले प्राइवेट बिल्डराें के प्रोजेक्ट्स का सर्वे करवाया था, इसमें सामने आया कि करीब 26 हजार यूनिट बिकी नहीं हैं। इनमें रेडी टू मूव व निर्माणाधीन, दोनों प्रकार के फ्लैट शामिल हैं।
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आरबीआई ने जारी किया हाउस प्राइस इंडेक्स, 10 शहरों में रिटर्न के मामले में लखनऊ शीर्ष पर
05 वर्षों से देश के औसत से 41 फीसदी ज्यादा फायदा मिल रहा लखनऊ को
कानपुर-दिल्ली रिटर्न का फायदा देने में दूसरे व तीसरे नंबर पर
अभिषेक यादव/अमर उजाला ब्यूरो
लखनऊ। आप यदि प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं तो इस लिहाज से लखनऊ में निवेश करना फायदे का सौदा होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा जारी हाउस प्राइस इंडेक्स (एचपीआई) के मुताबिक, कानपुर, दिल्ली, मुंबई समेत देश के दस प्रमुख शहरों में खरीदी गई आवासीय संपत्ति में किए गए निवेश पर सबसे ज्यादा रिटर्न लखनऊ में ही मिल रहा है। यहां सालाना रिटर्न 13.1 प्रतिशत है, जबकि देश में 9.3 यानी करीब 41 फीसदी ज्यादा। बीते एक वर्ष में भी लखनऊ में प्रॉपर्टी की कीमतें रिटर्न के लिहाज से चौथी सर्वाधिक रहीं।
आरबीआई के सहायक सलाहकार अजित प्रसाद के अनुसार, यह रिपोर्ट देश के 10 प्रमुख शहरों के आवास प्राधिकरणों से मिले आंकड़ों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्राधिकरणों और एजेंसियों में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त के दर्ज आंकड़ों को आधार बनाया गया है। लखनऊ के इस ट्रेंड ने फिर एक बार साबित किया है कि क्यों लंबे समय के निवेश के लिहाज से संपत्तियां राजधानीवासियों की पसंद रही हैं। हालांकि तीन और एक साल के लिहाज से यह रिटर्न कम रहे हैं, लेकिन उम्मीद भी बनी हुई है कि लंबे समय के दौरान वे अच्छा रिटर्न पा सकेंगे।
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ज्यादा फायदा चाहिए तो लंबे समय के लिए करें निवेश
- एचपीआई के मुताबिक, शॉर्ट टर्म के दौरान लखनऊ मेें संपत्तियों से रिटर्न उतना अच्छा नहीं रहा। हालांकि यह देश के औसत से बेहतर रहा।
- पिछले तीन वर्षों शहर में 10.1 प्रतिशत सालाना रिटर्न मिला और सूची में दूसरा स्थान रहा। देश का औसत 6.7 प्रतिशत रहा।
- एक वर्ष के लिहाज से लखनऊ में प्रॉपर्टी पर रिटर्न 6.4 प्रतिशत ही रहा। देश का औसत 4.7 ही था। सूची में चौथा स्थान रहा।
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रिटर्न में उतार-चढ़ाव की वजह
इंडेक्स के मुताबिक, बीते तीन वर्षों में लखनऊ में संपत्तियों का निर्माण तेजी से हुआ और मांग में अचानक से कमी आ गई। इसी कारण रिटर्न में उतार-चढ़ाव दिख रहा है।
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पांच साल में दिल्ली-मुंबई से ज्यादा फायदा
शहर - रिटर्न प्रतिशत
लखनऊ - 13.1
कानपुर - 11.3
दिल्ली - 10.4
मुंबई - 9.8
कोची - 9.5
देश में औसत - 9.3
तीन साल में प्रदर्शन : देश में दूसरे स्थान पर लखनऊ
शहर - रिटर्न प्रतिशत
कोची - 17.3
लखनऊ - 10.1
मुंबई - 8.4
अहमदाबाद - 8
चेन्नई - 6.8
देश में औसत - 6.7
एक साल में प्रदर्शन : देश के औसत से ज्यादा
शहर - रिटर्न प्रतिशत
कोची - 28.8
चेन्नई - 13.8
बेंगलुरु - 7.8
लखनऊ - 6.4
मुंबई - 3.5
देश का औसत - 4.7
...लेकिन आवास विकास और एलडीए को नहीं मिल रहे खरीदार
2600 फ्लैट आवास विकास में खाली
3500 फ्लैट एलडीए के खाली
आरबीआई की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही लखनऊ में संपत्ति खरीदना फायदे का सौदा है, लेकिन आवास विकास परिषद व एलडीए के हजारों फ्लैटों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। यह सच तीन और एक वर्ष की अवधि में मिले कम रिटर्न की स्थिति को स्पष्ट भी करता है। अकेले आवास विकास परिषद के पास इस समय 30 लाख रुपये 80 लाख रुपये कीमत तक के करीब 2600 फ्लैट बिक नहीं रहे हैं। ये सभी रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी हैं। एलडीए के मामले में यह आंकड़ा 3.5 हजार फ्लैट तक पहुंच जाता है। इनकी कीमतें 22 लाख से एक करोड़ तक हैं। एलडीए ने हाल ही नई रिहायशी योजनाएं लाने से पहले प्राइवेट बिल्डराें के प्रोजेक्ट्स का सर्वे करवाया था, इसमें सामने आया कि करीब 26 हजार यूनिट बिकी नहीं हैं। इनमें रेडी टू मूव व निर्माणाधीन, दोनों प्रकार के फ्लैट शामिल हैं।