{"_id":"5ca115f5bdec22140d56af57","slug":"15-lakhs-people-suffer-from-scarcity-of-water-in-summer","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 लाख लोगों को गर्मी में नहीं मिलेगा पूरा पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 लाख लोगों को गर्मी में नहीं मिलेगा पूरा पानी
Mon, 01 Apr 2019 01:03 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Mon, 01 Apr 2019 01:03 AM IST
विज्ञापन
water
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शहरवासियों को मानक के अनुरूप पेयजल आपूर्ति के लिए जलकल विभाग को रोजाना करीब 900 एमएलडी पानी की जरूरत है। लेकिन उसे 330 एमएलडी पानी ही गोमती और शारदा सहायक नहर से मिल पाता है। जलकल विभाग पानी की आपूर्ति बढ़ाने की मांग सिंचाई विभाग से कर रहा है, लेकिन बढ़ा पानी मिल नहीं पा रहा है।
उधर, पेयजल आपूर्ति बेहतर करने को जो नई योजनाएं पास हुईं, वह भी अधूरी हैं। इससे इस गर्मी भी शहरवासियों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ेगा। शहर में जलकल विभाग के अभी तीन ही जलकल हैं। ऐशबाग, बालागंज और गोमती नगर स्थित तीसरा जलकल।
इन तीनों से करीब 15 लाख की आबादी को ही पानी की आपूर्ति हो पाती है, जबकि करीब 10 लाख की आबादी को पेयजल आपूर्ति के लिए अभी जलकल नहीं है। करीब तीन साल पहले शहर में चौथा और पांचवां जलकल बनाने की योजना पास हुई, लेकिन अब तक बन एक भी नहीं पाया।
विज्ञापन
चौथे जलकल के लिए तो अभी जमीन तक चिह्नित नहीं हो पाई है जबकि पांचवें जलकल का जो काम शुरू हुआ था वह जमीन विवाद में अटक गया है। वहीं कठौता के संकट को दूर करने के लिए अभी कोई सिस्टम नहीं बन पाया है। इस कारण अब अप्रैल में फिर पानी का संकट रहेगा।
चाहिए 100 क्यूसेक मिल रहा 30, विस्तार भी अटका
पेयजल संकट को कम करने के लिए तीसरे जलकल को रोजाना 100 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। तीसरे जलकल की योजना बनी थी तब इतने पानी की आवश्यकता महसूस की गई थी, लेकिन सिंचाई विभाग महज 30 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। पूरा पानी न मिल पाने के कारण तीसरे जलकल का विस्तार भी अटका है। इस जलकल में अभी 80 एमएलडी क्षमता का ही जल शोधन संयंत्र है। इतनी ही क्षमता का एक और संयंत्र बनना है। पानी की उपलब्धता न होेने के कारण इसका निर्माण नहीं किया गया है। वहीं 14 अप्रैल से यह एक माह के लिए बंद भी हो जाएगा।
बालागंज जलकल की क्षमता बढ़ी पर पानी नहीं
हरदोई रोड पर कन्हैया माधवपुर व उससे जुड़े इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए जेएनएनयूआरएम में 80 एमएलडी क्षमता वाले बालागंज जलकल की क्षमता 180 एमएलडी की गई, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। गोमती नदी से जरूरत का कच्चा पानी न मिल पाने के कारण अभी नए इलाकों को पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
यहां भी कच्चे पानी का रोना
गोमती से कच्चे पानी की आपूर्ति में कमी के कारण ऐशबाग जलकल की क्षमता में बढ़ोतरी का भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। जेएनएनयूआरएम में 200 एमएलडी क्षमता वाले ऐशबाग जलकल की क्षमता 45 एमएलडी बढ़ाने की योजना इसलिए बनाई गई थी कि इससेमेहंदीगंज, केकेसी, एमईएस और गढ़ी कनौरा की करीब दो लाख आबादी की पेयजल किल्लत दूर की जा सके। क्षमता विस्तार के लिए प्लांट तो जल निगम ने बना दिया है, लेकिन उसका फायदा नहीं मिल रहा है।
सबमर्सिबल से चल रहा काम
नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य मो. सलीम, समीर पाल सोनू, पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि जलकल विभाग की आपूर्ति ठीक नही हैं। उसको लेकर वार्ड में सबमर्सिबल लगवाने पड़ते हैं। नहीं तो पानी की बहुत समस्या हो जाए। पाइप लाइन बहुत पुरानी हैं जो आए दिन फट जाती हैं। जेएनएनयूआरएम में पानी की लाइन तो पड़ी, लेकिन वह महज दिखावा भर है।
कनेक्शन दे रहे, पानी का पता नहीं
अमृत मिशन योजना के तहत फ्री में पेयजल कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप बताते हैं कि पानी लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा है। अभी जलकल और जल निगम के बीच ही मरम्मत को लेकर विवाद है।
पेयजल किल्लत नहीं होने देंगे
महाप्रबंधक जलकल विभाग एसके वर्मा ने बताया कि शहरवासियों को पेयजल की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। जहां पर नदी से पानी नहीं मिल पा रहा है वहां पर नलकूप चलाकर कमी को पूरा किया जा रहा है। पांचवें और चौथे जलकल के लिए सिंचाई विभाग पानी उपलब्ध कराएगा। पांचवें जलकल का जमीन विवाद दूर कराया जा रहा है। पूरी कोशिश है कि कठौता बंद होने से कम से कम असर पड़े।
विज्ञापन
उधर, पेयजल आपूर्ति बेहतर करने को जो नई योजनाएं पास हुईं, वह भी अधूरी हैं। इससे इस गर्मी भी शहरवासियों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ेगा। शहर में जलकल विभाग के अभी तीन ही जलकल हैं। ऐशबाग, बालागंज और गोमती नगर स्थित तीसरा जलकल।
विज्ञापन
इन तीनों से करीब 15 लाख की आबादी को ही पानी की आपूर्ति हो पाती है, जबकि करीब 10 लाख की आबादी को पेयजल आपूर्ति के लिए अभी जलकल नहीं है। करीब तीन साल पहले शहर में चौथा और पांचवां जलकल बनाने की योजना पास हुई, लेकिन अब तक बन एक भी नहीं पाया।
विज्ञापन
चौथे जलकल के लिए तो अभी जमीन तक चिह्नित नहीं हो पाई है जबकि पांचवें जलकल का जो काम शुरू हुआ था वह जमीन विवाद में अटक गया है। वहीं कठौता के संकट को दूर करने के लिए अभी कोई सिस्टम नहीं बन पाया है। इस कारण अब अप्रैल में फिर पानी का संकट रहेगा।
चाहिए 100 क्यूसेक मिल रहा 30, विस्तार भी अटका
पेयजल संकट को कम करने के लिए तीसरे जलकल को रोजाना 100 क्यूसेक पानी की आवश्यकता है। तीसरे जलकल की योजना बनी थी तब इतने पानी की आवश्यकता महसूस की गई थी, लेकिन सिंचाई विभाग महज 30 क्यूसेक पानी ही उपलब्ध करा पा रहा है। पूरा पानी न मिल पाने के कारण तीसरे जलकल का विस्तार भी अटका है। इस जलकल में अभी 80 एमएलडी क्षमता का ही जल शोधन संयंत्र है। इतनी ही क्षमता का एक और संयंत्र बनना है। पानी की उपलब्धता न होेने के कारण इसका निर्माण नहीं किया गया है। वहीं 14 अप्रैल से यह एक माह के लिए बंद भी हो जाएगा।
बालागंज जलकल की क्षमता बढ़ी पर पानी नहीं
हरदोई रोड पर कन्हैया माधवपुर व उससे जुड़े इलाकों में पेयजल आपूर्ति के लिए जेएनएनयूआरएम में 80 एमएलडी क्षमता वाले बालागंज जलकल की क्षमता 180 एमएलडी की गई, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं हुआ। गोमती नदी से जरूरत का कच्चा पानी न मिल पाने के कारण अभी नए इलाकों को पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है।
यहां भी कच्चे पानी का रोना
गोमती से कच्चे पानी की आपूर्ति में कमी के कारण ऐशबाग जलकल की क्षमता में बढ़ोतरी का भी कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। जेएनएनयूआरएम में 200 एमएलडी क्षमता वाले ऐशबाग जलकल की क्षमता 45 एमएलडी बढ़ाने की योजना इसलिए बनाई गई थी कि इससेमेहंदीगंज, केकेसी, एमईएस और गढ़ी कनौरा की करीब दो लाख आबादी की पेयजल किल्लत दूर की जा सके। क्षमता विस्तार के लिए प्लांट तो जल निगम ने बना दिया है, लेकिन उसका फायदा नहीं मिल रहा है।
सबमर्सिबल से चल रहा काम
नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य मो. सलीम, समीर पाल सोनू, पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि जलकल विभाग की आपूर्ति ठीक नही हैं। उसको लेकर वार्ड में सबमर्सिबल लगवाने पड़ते हैं। नहीं तो पानी की बहुत समस्या हो जाए। पाइप लाइन बहुत पुरानी हैं जो आए दिन फट जाती हैं। जेएनएनयूआरएम में पानी की लाइन तो पड़ी, लेकिन वह महज दिखावा भर है।
कनेक्शन दे रहे, पानी का पता नहीं
अमृत मिशन योजना के तहत फ्री में पेयजल कनेक्शन दिए जा रहे हैं, लेकिन लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है। इस्माइलगंज द्वितीय वार्ड के पूर्व पार्षद रुद्र प्रताप बताते हैं कि पानी लोगों के घरों तक नहीं पहुंच रहा है। अभी जलकल और जल निगम के बीच ही मरम्मत को लेकर विवाद है।
पेयजल किल्लत नहीं होने देंगे
महाप्रबंधक जलकल विभाग एसके वर्मा ने बताया कि शहरवासियों को पेयजल की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। जहां पर नदी से पानी नहीं मिल पा रहा है वहां पर नलकूप चलाकर कमी को पूरा किया जा रहा है। पांचवें और चौथे जलकल के लिए सिंचाई विभाग पानी उपलब्ध कराएगा। पांचवें जलकल का जमीन विवाद दूर कराया जा रहा है। पूरी कोशिश है कि कठौता बंद होने से कम से कम असर पड़े।