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मेडिकल कॉलेजों में अब 62 वर्ष की उम्र तक बन सकेंगे प्राचार्य, सेवा नियमावली में हुआ संशोधन

Fri, 30 Nov 2018 01:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 30 Nov 2018 01:31 AM IST
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medical college service regulations has been changed by government
डेमो - फोटो : डेमो
प्रदेश सरकार ने चिकित्सा शिक्षकों की कमी से उबरने के लिए उप्र राज्य चिकित्सा महाविद्यालय अध्यापकों की सेवा नियमावली में पांचवा संशोधन किया है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य के लिए आयुसीमा 55 से बढ़ाकर 62 वर्ष कर दी गई है। इसके लिए न्यूनतम आयु 55 वर्ष होगी। वहीं, प्रोफेसर पद के लिए आयुसीमा 45 से बढ़ाकर 55 वर्ष कर दी गई है। इसके लिए न्यूनतम आयु 35 वर्ष होगी।
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प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा डॉ. रजनीश दुबे ने इस संबंध में सेवा नियमावली जारी कर दी है। सहायक आचार्य पद पर भर्ती के लिए न्यूनतम आयु 26 और अधिकतम आयु 40 वर्ष कर दी गई है। पहले न्यूनतम आयु 21 और अधिकतम 35 वर्ष थी। महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा प्रो. केके गुप्ता ने बताया कि संशोधन से चिकित्सा शिक्षक मिलने में आसानी होगी और डॉक्टर भी इस सेवा के लिए आकर्षित होंगे।
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वेतन में भी बढ़ोतरी

प्रिंसिपल व प्रोफेसर का वेतन 1.44 लाख रुपये प्रतिमाह होगा। एसोसिएट प्रोफेसर को 1.31 लाख, असिस्टेंट प्रोफेसर को 68900 रुपए, प्राध्यापक को 57700 रुपये वेतन दिया जाएगा। पहले प्राध्यापक के रूप में कार्य करने के तीन साल बाद सहायक प्रोफेसर बनाया जाता था। नए संशोधन में पहले से कार्य कर रहे प्राध्यापक को एक वर्ष की सेवा पूरी करनी होगी। इसे सीनियर रेजीडेंस माना जाएगा। एक वर्ष की संतोषजनक सेवा पूरी करने के बाद सहायक आचार्य बनाया जाएगा।
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