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तालाबों और झीलों में उड़ रही धूल
Updated Wed, 21 Mar 2018 11:32 PM IST
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तालाबों और झीलों में उड़ रही धूल
सीतापुर। प्राकृतिक जल स्रोत अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। ज्यादातर तालाबों और झीलों में पानी की लहरें नहीं बल्कि धूल नजर आ रही है। प्राकृतिक जल स्रोतों की दुर्दशा से जलस्तर में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।
जिले में करीब आठ हजार तालाब हैं जबकि 20 से ज्यादा झीलें हैं। आज से चार दशक पहले तक पानी की जरूरतें यही तालाब व झीलें पूरी करती थीं। देखरेख और संरक्षण के अभाव में आज इनका वजूद खतरे में है।
मौजूदा समय में इन तालाबों और झीलों की हालत इस कदर दयनीय है कि ज्यादातर तालाब व झीलें सूख गई हैं। इनमें पानी भराए जाने और इनका संरक्षण करने को लेकर शासन-प्रशासन संजीदा नहीं दिखता।
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हर साल की तरह एक बार फिर 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाएगा। सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कई तरह के आयोजन कर प्राकृतिक जल स्रोत के संरक्षण व पुनर्जीवन को लेकर भाषणबाजी होगी।
जल जागरूकता की मुहिम चलाने की वकालत करते हुए इसके लिए ताना-बाना भी बुना जाएगा। उसके बाद जिम्मेदार फिर से जल जागरूकता और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण की कवायद ठंडे बस्ते में डालकर भूल जाएंगे।
शासन-प्रशासन की ओर से प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए गंभीरता से ठोस पहल नहीं की गई तो भविष्य में भारी जल संकट से जूझना पड़ सकता है।
एडीएम विनय पाठक ने बताया कि, मनरेगा से तालाबों व झीलों की खुदाई कराई जाती है। हाल में ही कई तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स के माध्यम से अभियान चलाकर तालाबों से कब्जे भी हटवाए गए हैं।
डीसी मनरेगा सुशील सिंह ने बताया कि, प्राकृतिक तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार मनरेगा के तहत कराए जाने का प्रावधान है। ग्राम पंचायतें यदि प्रस्ताव देती हैं तो कार्य कराया जाता है।
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सीतापुर। प्राकृतिक जल स्रोत अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं। ज्यादातर तालाबों और झीलों में पानी की लहरें नहीं बल्कि धूल नजर आ रही है। प्राकृतिक जल स्रोतों की दुर्दशा से जलस्तर में भी गिरावट दर्ज की जा रही है।
जिले में करीब आठ हजार तालाब हैं जबकि 20 से ज्यादा झीलें हैं। आज से चार दशक पहले तक पानी की जरूरतें यही तालाब व झीलें पूरी करती थीं। देखरेख और संरक्षण के अभाव में आज इनका वजूद खतरे में है।
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मौजूदा समय में इन तालाबों और झीलों की हालत इस कदर दयनीय है कि ज्यादातर तालाब व झीलें सूख गई हैं। इनमें पानी भराए जाने और इनका संरक्षण करने को लेकर शासन-प्रशासन संजीदा नहीं दिखता।
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हर साल की तरह एक बार फिर 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाएगा। सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर कई तरह के आयोजन कर प्राकृतिक जल स्रोत के संरक्षण व पुनर्जीवन को लेकर भाषणबाजी होगी।
जल जागरूकता की मुहिम चलाने की वकालत करते हुए इसके लिए ताना-बाना भी बुना जाएगा। उसके बाद जिम्मेदार फिर से जल जागरूकता और प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण की कवायद ठंडे बस्ते में डालकर भूल जाएंगे।
शासन-प्रशासन की ओर से प्राकृतिक जल स्रोतों को सहेजने के लिए गंभीरता से ठोस पहल नहीं की गई तो भविष्य में भारी जल संकट से जूझना पड़ सकता है।
एडीएम विनय पाठक ने बताया कि, मनरेगा से तालाबों व झीलों की खुदाई कराई जाती है। हाल में ही कई तालाबों का जीर्णोद्धार कराया गया है। एंटी भूमाफिया टास्क फोर्स के माध्यम से अभियान चलाकर तालाबों से कब्जे भी हटवाए गए हैं।
डीसी मनरेगा सुशील सिंह ने बताया कि, प्राकृतिक तालाबों और कुओं का जीर्णोद्धार मनरेगा के तहत कराए जाने का प्रावधान है। ग्राम पंचायतें यदि प्रस्ताव देती हैं तो कार्य कराया जाता है।