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दूषित पानी बिगाड़ रहा आठ लाख लोगों की सेहत

Sun, 24 Dec 2017 01:02 AM IST
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:02 AM IST
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दूषित पानी बिगाड़ रहा आठ लाख लोगों की सेहत
जिले में भूगर्भ जल की स्थिति चिंताजनक है। लगातार गिर रहे जलस्तार से पेयजल में फ्लोराइड व आर्सेनिक की मात्रा तेजी से बढ़ रही है। जिले में 1344 बस्तियाें की स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से लोगों की सेहत खराब हो रही है। जिले में तीन हजार इंडिया मार्का हैंडपंप दूषित पानी दे रहे हैं, लेकिन अब तक इन हैंडपंपों पर कोई चेतावनी निशान नहीं लगाया। जिले में करीब आठ लाख लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। शासन ने भले ही इस समस्या से निजात के लिए शहर में 200 वर्ग मीटर से ऊपर के नए भवनों के लिए रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन इस पर जिले के अधिकारी गंभीर नहीं है। दो सालों में 5 से 8 फिट जलस्तर गिरने से जिले में ज्यादातर किसानों के निजी नलकूप ठप हो रहे हैं।
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जिले में 68 हजार इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं। इनमें से करीब तीन हजार हैंडपंप दूषित पानी उगल रहे हैं। पूरे जिले में 1344 बस्तियां ऐसी हैं, जो दूषित पानी की चपेट में हैं। इन बस्तियाें की आबादी दो लाख से ज्यादा है। प्रत्येक आबादी में करीब डेढ़ सौ से अधिक लोग रहते हैं। इसके अलावा ग्रामीण इलाकों में छह लाख से अधिक लोग हैंडपंप का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए फ्लोराइड रिमूवल फ्लांट लगाने का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अब तक बजट नहीं मिलने से इसे नहीं लगाया जा सका है। अफसराें की मानें तो ऊंचाहार, लालगंज, डलमऊ तहसील में दूषित पानी की समस्या सबसे अधिक है। शासन ने भले ही शहरी क्षेत्र में 200 वर्ग मीटर भवन के निर्माण पर रेन वाटर हारवेंस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया, लेकिन भवन स्वामियां की कौन कहें, सरकारी विभाग ने इस सिस्टम को बनवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इससे बरसात का पानी बेकार बह जाता है। यदि रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगा दिया जाए तो काफी हद तक राहत मिल सकती है।
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टीबी, लीवर के बढ़ रहे रोगी
जिले में दूषित पानी पीने से टीबी, लीवर सिरोसिस, कैंसर जैसी बीमारियों से लोग पीड़ित हो रहे हैं। प्रतिदिन जिला अस्पताल में इन बीमारियों के मरीज आ रहे हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि शुद्ध पेयजल न मिल पाने की वजह से लोग टीबी व लीवर बीमारी की चपेट में आ ररहे हैं।
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प्रतिवर्ष लग रहे 300 समरसेबिल पंप
लघुसिंचाई के सहायक अभियंता नरेंद्र बहादुर सिंह की मानें तो जलस्तर गिरने से किसानों के निजी नलकूप काम नहीं कर रहे हैं। इससे वह तेजी से समरसेबिल करा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष विभाग की ओर से 100 से 150 वर्ष समरसेबिल पंप किसानों के लगवाए जाते हैं, जबकि इतने ही किसान निजी खर्च करके समरसेबिल पंप करवा रहे हैं।


कहीं पांच तो कहीं आठ फिट गिरा जलस्तार
तहसील जलस्तर दो साल पहले
लालगंज 40 फिट 35 फिट
डलमऊ 45 फिट 38 फिट
ऊंचाहार 36 फिट 30 फिट
महराजगंज 30 फिट 28 फिट
सदर 39 फिट 30 फिट
सलोन 33 फिट 28 फिट

लगाया जाना है फ्लोराइड रिमूवल सिस्टम
जिले की 1344 बस्तियों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए फ्लोराइड रिमूवल सिस्टम लगाया जाना है। इसके लिए जिला प्रशासन के माध्यम से शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। एक सिस्टम लग जाने से काफी हद तक स्थिति सामान्य हो जाएगी। एक सिस्टम लगाने में करीब 10 लाख रुपये खर्च होने हैं। बजट नहीं मिलने से सिस्टम अब तक नहीं लगाया जा सका है। -जनार्दन सिंह, अधिशासी अभियंता जल निगम
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