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चंदा जमा कर किसानों ने साफ करवाई इंदौरा माइनर
Updated Mon, 10 Jul 2017 01:03 AM IST
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चंदा जमा कर किसानों ने साफ करवाई इंदौरा माइनर
महराजगंज (रायबरेली)। ब्लॉक क्षेत्र में सिल्ट से पटी इंदौरा माइनर की सफाई के लिए आखिरकार किसानों ने खुद ही कमर कस ली। कई बार विभागीय अफसरों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर किसानों ने चंदा इकट्ठा करके माइनर की सफाई शुरू करा दी। अब किसानों को चिंता है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी व ठेकेदार कहीं इस काम को लेकर फर्जी भुगतान न करा लें।
इंदौरा माइनर शारदा खंड दक्षिणी से संबद्ध है। इस माइनर से मुख्य रूप से भदिहा, इंदौरा, अहमदगंज, पूरे बादल खां, महुवा थोड़ा, गुनावर आदि गांवों की करीब एक हजार एकड़ खेतों को पानी मिलता है। किसानों का कहना है कि कई साल से इस माइनर की सफाई नहीं कराई गई। इस वजह से पूरी माइनर में जगह-जगह सिल्ट जमा हो गई है। इससे पानी नहीं आता था। किसानों की धान की पौध तैयार थी। बरसात के पानी का कोई पक्का भरोसा नहीं होता है। किसानों चंद्रपाल यादव, रईस अहमद, रमेसर, रामसुख साहू, इस्तियाक खां, संतशरन चौहान, रामकुमार यादव, रामदुलारे आदि ने आपस में ही चंदा जामा कर किराए पर जेसीबी लेकर माइनर की सफाई शुरू करा दी।
अब किसानों की दूसरी चिंता इस बात की है कि उन्हें कहीं से पता चला है कि वे अधिकारी जो माइनर की सफाई में पैसा बजट न होने का बहाना बता कर लौटा देते थे, अब वही अधिकारी अपने जेसीबी ठेकेदारों के साथ मिलकर किसानों की कराई सफाई को विभागीय कार्य दिखाकर इसका भुगतान हड़पने की फिराक में हैं। किसानों ने डीएम से मांग की है कि इस काम को श्रमदान घोषित कर उन अफसरों के मंसूबों को नाकाम कर उन्हें ये हिदायत दे कि भविष्य में इस माइनर की सफाई हर साल समय से कराई जाए।
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महराजगंज (रायबरेली)। ब्लॉक क्षेत्र में सिल्ट से पटी इंदौरा माइनर की सफाई के लिए आखिरकार किसानों ने खुद ही कमर कस ली। कई बार विभागीय अफसरों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इस पर किसानों ने चंदा इकट्ठा करके माइनर की सफाई शुरू करा दी। अब किसानों को चिंता है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी व ठेकेदार कहीं इस काम को लेकर फर्जी भुगतान न करा लें।
इंदौरा माइनर शारदा खंड दक्षिणी से संबद्ध है। इस माइनर से मुख्य रूप से भदिहा, इंदौरा, अहमदगंज, पूरे बादल खां, महुवा थोड़ा, गुनावर आदि गांवों की करीब एक हजार एकड़ खेतों को पानी मिलता है। किसानों का कहना है कि कई साल से इस माइनर की सफाई नहीं कराई गई। इस वजह से पूरी माइनर में जगह-जगह सिल्ट जमा हो गई है। इससे पानी नहीं आता था। किसानों की धान की पौध तैयार थी। बरसात के पानी का कोई पक्का भरोसा नहीं होता है। किसानों चंद्रपाल यादव, रईस अहमद, रमेसर, रामसुख साहू, इस्तियाक खां, संतशरन चौहान, रामकुमार यादव, रामदुलारे आदि ने आपस में ही चंदा जामा कर किराए पर जेसीबी लेकर माइनर की सफाई शुरू करा दी।
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अब किसानों की दूसरी चिंता इस बात की है कि उन्हें कहीं से पता चला है कि वे अधिकारी जो माइनर की सफाई में पैसा बजट न होने का बहाना बता कर लौटा देते थे, अब वही अधिकारी अपने जेसीबी ठेकेदारों के साथ मिलकर किसानों की कराई सफाई को विभागीय कार्य दिखाकर इसका भुगतान हड़पने की फिराक में हैं। किसानों ने डीएम से मांग की है कि इस काम को श्रमदान घोषित कर उन अफसरों के मंसूबों को नाकाम कर उन्हें ये हिदायत दे कि भविष्य में इस माइनर की सफाई हर साल समय से कराई जाए।
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