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जंक फूड न खिलाएं, बच्चों को हृदय रोगी होने से बचाएं

Sat, 18 Nov 2017 12:19 AM IST
Updated Sat, 18 Nov 2017 12:19 AM IST
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जंक फूड न खिलाएं, बच्चों को हृदय रोगी होने से बचाएं
बहराइच। तराई के नौनिहाल हृदय के रोगी बन रहे हैं। इसका मुख्य कारण जंक फूड सेवन के साथ ही अनियमित दिनचर्या है। गंदगी भी इसका प्रमुख कारण है। जिले का हर 100वां नौनिहाल हृदय की बीमारी से पीड़ित है। इस मामले में अभिभावकों को ध्यान देने की जरूरत है। तभी नौनिहालों का हृदय सुरक्षित रहेगा। चाउमीन, बर्गर और पिज्जा के सेवन से बच्चों को बचाकर अभिभावक उन्हें सुरक्षित भविष्य दे सकते हैं। यह कहना है जिला अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव का। उन्होंने कहा कि 72 फीसदी बच्चे रूमैटिक हार्ट डिजीज की चपेट में हैं, जो अक्सर अस्पताल पहुंचते हैं। हृदय की बीमारी वैसे तो बड़े लोगों की बीमारी मानी जाती है, लेकिन अब उम्र का बंधन नहीं रहा। किस उम्र में कौन सी बीमारी हो जाए, कोई भरोसा नहीं। सीतापुर में नवोदय विद्यालय के 13 वर्षीय छात्र की हार्ट अटैक से हुई मौत के बाद लोग सोचने पर मजबूर हो गए हैं। बच्चों के स्वास्थ्य की चिंता अभिभावकों को सता रही है। इस मामले में जिला अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. मलय श्रीवास्तव को कुरेदा गया तो चौंकाने वाले मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि जंक फूड का सेवन नई पीढ़ी अधिक कर रही है। तीन वर्ष से 17 वर्ष के बच्चों व किशोरों को चाउमीन, बर्गर, पिज्जा के साथ ही अन्य जंक फूड भा रहे हैं। यही हृदय रोग का कारण है। इससे न सिर्फ मोटापा बढ़ता है। बल्कि धमनियों में रक्त का प्रवाह प्रभावित होता है। जिससे हृदय समुचित तरीके से काम नहीं कर पाता। इस कारण हार्ट अटैक, उलझन और बेचैनी के साथ ही बच्चे की एकाग्रता भंग होती है। इस मामले में अभिभावक सजग रहकर बच्चों की जिंदगी को संरक्षित कर सकते हैं।
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कंजेनाइटिल डिजीज और रूमेटिक हार्ट डिजीज के हैं रोगी
डॉ. मलय श्रीवास्तव ने बताया कि जिले में दो तरह के बाल हृदय रोगी हैं। इनमें कंजेनाइटिल डिजीज और रूमेटिक हार्ट डिजीज के रोगी शामिल हैं। कंजेनाइटिल हार्ट डिजीज में रोग जन्मजात होता है। इसमें दिल में छेद होना, बाल्ब का कनेक्शन गलत होना शामिल है। जबकि रूमेटिक हार्ट डिजीज में हृदय के बाल्ब का अधिक सिकुड़ना, अधिक फैलना प्रक्रिया होती है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी होती हैं। ऐसे रोगियों की संख्या 60 से 72 फीसदी के आसपास है।
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स्टेरप्टोकॉकस वायरस है परेशानी का सबब
डॉ. मलय ने बताया कि हृदय रोग तब प्रभावी होता है, जब स्टेरप्टोकॉकस वायरस शरीर में शक्तिशाली हो जाता है। इससे एंटी बॉडीज सुरक्षा तंत्र काम नहीं कर पाता। रोगी को गले में खराब के साथ घुटने, जोड़ में दर्द व सूजन महसूस होता है। यह स्थितियां छह वर्ष से 17 आयु वर्ष के बच्चों में अधिक होती हैं। समय से इलाज और जांच कर इस रोग पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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हृदय रोग के लक्षण
सीने में दर्द के साथ ही बेचैनी महसूस होना।
झटके और अजीब तरह के दर्द का अहसास होना।
पांव या घुटनों में सूजन के साथ दर्द होना।
गले में खराश और सर्दी-जुकाम निरंतर बने रहना।
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