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शिव धनुष टूटते ही जयकारों से गूंजा पंडाल
Updated Tue, 24 Oct 2017 11:02 PM IST
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अंबेडकरनगर। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के गोविंदपुर अटिका में तीसरे दिन भी श्रीचंद्र लोक रामलीला समिति के कलाकारों ने रामलीला का मंचन किया। सोमवार रात सीता स्वयंवर, रावण वाणासुर संवाद व लक्ष्मण परशुराम संवाद का मंचन हुआ। शिव धनुष टूटते ही पूरा पंडाल भगवान श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा।
सोमवार रात रामलीला की शुरूआत भगवान श्रीराम की आरती से हुई। प्रथम दृश्य में मंच पर राजा जनक का दरबार दिखाया जाता है। जनक के निमंत्रण पर दूर देश के राजा व राजकुमार सीता स्वयंवर में पहुंचे थे। राजा जनक की शर्त थी कि जो शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। गुरु विश्वामित्र भी भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। सभा में मौजूद सभी राजा व राजकुमार बारी-बारी से शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने को आगे आते हैं मगर कोई भी धनुष को हिला तक न सका। ये देख राजा जनक काफी निराश हो जाते हैं। इसी बीच रावण भी सभा में पहुंच जाता है। रावण व वाणासुर संवाद दर्शकों को खूब भाया। बाद में गुरु की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं तो वह टूट जाता है। इससे पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठता है। मंच पर भगवान परशुराम का आगमन होता है। वह राजा जनक से सभा जुटने का कारण पूछते हैं। इस दौरान उनकी निगाह टूटे शिव धनुष पर पड़ी तो वे क्रोधित हो जाते हैं। परशुराम व लक्ष्मण का संवाद कलाकारों ने बेहद सजीव मंचन किया। आयोजन सफल बनाने में पंकज तिवारी, माता प्रसाद यादव, बृजेंद्र नंद तिवारी आदि का योगदान रहा।
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सोमवार रात रामलीला की शुरूआत भगवान श्रीराम की आरती से हुई। प्रथम दृश्य में मंच पर राजा जनक का दरबार दिखाया जाता है। जनक के निमंत्रण पर दूर देश के राजा व राजकुमार सीता स्वयंवर में पहुंचे थे। राजा जनक की शर्त थी कि जो शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी के साथ सीता का विवाह होगा। गुरु विश्वामित्र भी भगवान श्रीराम व लक्ष्मण को लेकर स्वयंवर में पहुंचते हैं। सभा में मौजूद सभी राजा व राजकुमार बारी-बारी से शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने को आगे आते हैं मगर कोई भी धनुष को हिला तक न सका। ये देख राजा जनक काफी निराश हो जाते हैं। इसी बीच रावण भी सभा में पहुंच जाता है। रावण व वाणासुर संवाद दर्शकों को खूब भाया। बाद में गुरु की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम शिव धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाते हैं तो वह टूट जाता है। इससे पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठता है। मंच पर भगवान परशुराम का आगमन होता है। वह राजा जनक से सभा जुटने का कारण पूछते हैं। इस दौरान उनकी निगाह टूटे शिव धनुष पर पड़ी तो वे क्रोधित हो जाते हैं। परशुराम व लक्ष्मण का संवाद कलाकारों ने बेहद सजीव मंचन किया। आयोजन सफल बनाने में पंकज तिवारी, माता प्रसाद यादव, बृजेंद्र नंद तिवारी आदि का योगदान रहा।
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