'समाज के डर से अनचाही औलाद को घर नहीं ले जाना चाहते'
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अनचाही बच्ची की मां बनी बाराबंकी की 13 साल की दुष्कर्म पीड़िता के पिता ने नवजात को अपनाने से इन्कार कर दिया है। समाज के तानों से परेशान दुष्कर्म पीड़िता के पिता से ‘अमर उजाला’ ने बातचीत की तो उनका दर्द छलक पड़ा।
बोले, ‘आखिर हम बच्ची को क्यों ले जाएं और कहां ले जाएं। लोगों ने पहले ही हमारा जीना दुश्वार कर रखा है। इस अनचाही औलाद को पालना हमारे वश में नहीं। हम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, उम्मीद है कि अदालत हमारी मजबूरी को समझेगी।
उन्होंने कहा है कि अदालत इसे किसी को गोद दिलवाए या फिर कोई अन्य प्रबंध करवा दे, हम इसे नहीं ले जाएंगे। कई दिनों से अस्पताल में बेटी की देखभाल कर रहे पिता बड़ी बेटी की तबीयत खराब होने के कारण अपनी पत्नी और अस्पताल में भर्ती बच्ची को छोड़कर बुधवार को बाराबंकी चले गए।
पीड़िता की मां ने खोया होशोहवास
उसकी मां तो मानो होशोहवास ही खो बैठी है। उसे समझ नहीं आ रहा कि वह अपनी बेटी को क्या ढांढस बंधाए। जिस बेटी को पढ़ा-लिखा कर वह कुछ बनाना और अपने हाथ से दुल्हन बनाने और उसके बच्चों को खिलाने का सपना देखा करती थी, आज उसकी कोख से जन्मी बच्ची को देख आंसू बहाने को मजबूर है।
...और नवजात की किस्मत में ही सजा
दुष्कर्म पीड़िता ने जिस बच्ची को जन्म दिया है, वह तो मानो अपनी किस्मत में सजा लिखवा कर आई है। जिस मां का उसे लाड़-प्यार मिलना था, वह खुद एक बच्ची है। कोर्ट उसके भविष्य को लेकर क्या फैसला देगा, यह तो तीन नवंबर को तय होगा।
फिलहाल तो जिस परिवार में उसने जन्म लिया है, लोकलाज के भय से उन्होंने उसके परित्याग का मन बना लिया है।अस्पताल से ही गोद लेने की कार्रवाई पूरी हो जाएकोर्ट इस मामले में तीन तारीख को फैसला सुनाएगा कि जन्मे बच्चे का क्या करना है।
बेटी की पीड़ा
नौ माह के दौरान जब-जब बच्ची में शारीरिक बदलाव होते, उसे कभी उल्टी या कभी अन्य परेशानियां होती तो वह चीख पड़ती थी। वह मां से पूछती थी कि मां ये क्यों हो रहा और कब तक होगा। मां अक्सर मुझसे उसे छिपाने की कोशिश करती थी। मेरी बच्ची अब बिल्कुल चुप है, वह कुछ नहीं कहती। उसका दर्द हमें उसकी आंखों में दिखता है।
अनचाही औलाद को किसी को गोद देना चाहते हैं
पीड़िता के पिता चाहते हैं कि बच्चे को किसी को गोद दे दिया जाए। गोद देने की कार्रवाई अस्पताल में रहते हुए ही पूरी कर ली जाए। वह किसी भी कीमत पर उसे गांव लेकर नहीं जाना चाहते। मेरे पास दो-तीन लोगों ने गोद लेने के लिए फोन किया है।
किस्मत अली,वकील, पीड़िता
कोर्ट ने तीन नवंबर तक अस्पताल में रखने को कहा
बाराबंकी निवासी दुष्कर्म पीड़िता बच्ची और उसके जन्मे बच्चे दोनों स्वस्थ हैं। बुधवार को कोर्ट को दोनों की स्थिति से अवगत करा दिया गया है। कोर्ट ने तीन नवंबर तक दोनों को अस्पताल में रखने का निर्देश दिया है। उनसे किसी को मिलने की इजाजत नहीं है, आगे जैसा अदालत का आदेश होगा, वैसा किया जाएगा।
डॉ. एससी तिवारी, सीएमएस, केजीएमयू
पिता के सवाल
•आखिर उस अपराध की सजा हम और हमारा परिवार क्यों भुगते, जो हमने किया ही नहीं।
•उस बच्चे को हम क्यों और कहां ले जाएं।
•समाज वाले हमें क्यों नहीं जीने दे रहे।
•क्यों नहीं समझ रहे मेरी बच्ची का दोष नहीं।
•ऐसे अनचाहे बच्चे के लिए समाज में कोई व्यवस्था क्यों नहीं।