जल निगम में भर्ती में हुई गड़बड़ी मामले में 122 सहायक अभियंताओं को बर्खास्त कर चुकी है सरकार
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जल निगम में हुई भर्ती में गड़बड़ी के मामले में योगी आदित्यनाथ सरकार 122 सहायक अभियंताओं को पहले ही बर्खास्त कर चुकी है। जनवरी में एसआईटी ने आजम खां से भी इस मामले में पूछताछ की थी। आजम खां के अलावा 10 अन्य लोगों से पूछताछ की गई थी।
एसआईटी ने अपनी जांच में जल निगम के तत्कालीन चेयरमैन आजम खां के अलावा जल निगम के तत्कालीन एमडी पीके आशुदानी, आजम खां के ओएसडी रहे सैयद आफाक अहमद, नगर विकास विभाग के पूर्व सचिव एसपी सिंह और तत्कालीन चीफ इंजीनियरअनिल कुमार खरे के खिलाफ साक्ष्य पाए।
2016 के अंत में 1300 पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी। इसमें 122 सहायक अभियंता, 853 अवर अभियंता, 335 नैत्यिक लिपिक और 32 आशुलिपिक की भर्ती हुई थी। जल निगम के ही कुछ अधिकारियों ने इस संबंध में शिकायत की थी जिसके बाद जांच शुरू हुई।
सरकार ने शिकायतों के आधार पर इस मामले की जांच एसआईटी को सौंपी थी। पिछले वर्ष 22 सितंबर को एसआईटी ने जल निगम बोर्ड के मुख्यालय पर छापा मारकर कागजात अपने कब्जे में लिए थे। कहा जा रहा है कि जांच के दायरे में ऑनलाइन परीक्षा कराने वाली एजेंसी अप्टेक भी शामिल है।
29 मार्च को शासन से मांगी गई थी अनुमति
इस पूरे मामले में एसआईटी के प्रमुख रहे आलोक प्रसाद ने 29 मार्च को शासन को पत्र भेज कर आरोपियों के खिलाफ केस चलाए जाने की अनुमति मांगी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि उक्त मामलों में जांच एजेंसी के पास केस चलाने के पर्याप्त सुबूत हैं।
रिपोर्ट पर गृह विभाग ने न्याय विभाग से राय मांगी थी। न्याय विभाग ने इस मामले में विस्तृत जांच कराए जाने की बात कही। इसके बाद शासन ने आजम खां के खिलाफ केस दर्ज करने की अनुमति दे दी।
58 हजार फर्जी राशन कार्ड मामले में भी जल्द दर्ज हो सकती है एफआईआर
सूत्रों का कहना है कि जल निगम में भर्ती के बाद जल्द ही मेरठ में बने 58 हजार फर्जी राशन कार्ड के मामले की भी एफआईआर दर्ज की जाएगी। आलोक प्रसाद ने इस मामले में भी एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। इस मामले में मेरठ के तत्कालीन डीआईओएस और सप्लाई इंस्पेक्टर समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है।