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माईसिटी के लिए योगी राहुल पर हमलावर
Updated Sun, 16 Dec 2018 12:04 AM IST
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अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समरसता कुंभ में शनिवार को कहा कि अगर मुगलों और अंग्रेजों द्वारा थोपे गए भेदभाव को स्वीकार न किया गया होता तो यह देश कभी गुलाम नहीं होता। वेद की अधिकतर ऋचाएं दलितों के पूर्वज ऋषियों ने रचीं। राम से साक्षात्कार कराने वाले वाल्मीकि हैं, वाल्मीकि रामायण आधार ग्रंथ है। फिर वाल्मीकि समाज से छुआछूत करते हैं।
भारतीय समाज और संस्कृति ने कभी छुआछूत और भेदभाव को महत्व नहीं दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी कभी छुआछूत की भावना को नहीं माना आज फेसबुक और गूगल हमारे उपनिषद और पुराण से अधिक प्रामाणिक नहीं हैं। फेसबुक और गूगल के ज्ञान से उबरना होगा।
अवध विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समरसता कुंभ में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सबरीमाला मामले को लेकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश है। जबकि सभी जानते हैं कि वहां की परंपरा क्या है। जो कभी मंदिर नहीं गए, वह सबरीमाला पर कोर्ट गए और बयान दे रहे हैं। उसी तरह कुंभ के बड़े आयोजन को लेकर भी माहौल बनाया जा रहा है।
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कुंभ का आयोजन भारत की हर जाति, हर धर्म, संप्रदाय, वर्ग के लिए संगम के तट पर डुबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लेकर संगम पुण्य कमाने के लिए होता है। इस भाव को आत्मसात करने के लिए हम सब तैयार हैं। यह कुंभ एक बार फिर सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का प्रतीक बनेगा।
विदेशी धन खाकर बदनाम कर रहे कुछ लोग
मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा पर प्रहार करने वालों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया के एक कोने में बैठकर कुछ लोग लगातार भारतीय परंपरा को तोड़ने की कोशिश करते हैं। वह कुंभ को पर्यावरण, दलित व महिला विरोधी बताते हैं। विदेशी धन खाकर भारत में बैठकर भारत को बदनाम करने का काम करते हैं। ऐसे लोग भारत की परंपरा व संस्कृति को आज भी नहीं समझ पाए हैं। कुंभ भारतीय संस्कृति में मानवता का सबसे बड़ा मिलन स्थल है। मानवता के इस संगम में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है।
बजरंगबली, शबरी भगवान राम के वनवासी जीवन के सहयोगी
योगी ने कहा कि हमारी सनातन परंपरा ने कभी जाति-धर्म-अस्पृश्यता को महत्व नहीं दिया। अयोध्या की धरती तो कभी ऐसा सोच भी नहीं सकती। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की परंपरा ने कभी छुआछूत के भाव को नहीं माना। निषादराज उनके मित्र थे, शबरी कौन थीं, हनुमान कौन थे, बंदर और भालू कौन थे, उनके वनवासी जीवन के सहयोगी कौन थे? सबको लेकर राम ने रामराज्य की आधारशिला रखी थी।
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भारतीय समाज और संस्कृति ने कभी छुआछूत और भेदभाव को महत्व नहीं दिया। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने भी कभी छुआछूत की भावना को नहीं माना आज फेसबुक और गूगल हमारे उपनिषद और पुराण से अधिक प्रामाणिक नहीं हैं। फेसबुक और गूगल के ज्ञान से उबरना होगा।
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अवध विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित समरसता कुंभ में पहुंचे मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सबरीमाला मामले को लेकर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश है। जबकि सभी जानते हैं कि वहां की परंपरा क्या है। जो कभी मंदिर नहीं गए, वह सबरीमाला पर कोर्ट गए और बयान दे रहे हैं। उसी तरह कुंभ के बड़े आयोजन को लेकर भी माहौल बनाया जा रहा है।
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कुंभ का आयोजन भारत की हर जाति, हर धर्म, संप्रदाय, वर्ग के लिए संगम के तट पर डुबकी लगाकर मां गंगा का आशीर्वाद लेकर संगम पुण्य कमाने के लिए होता है। इस भाव को आत्मसात करने के लिए हम सब तैयार हैं। यह कुंभ एक बार फिर सामाजिक समरसता और आपसी प्रेम का प्रतीक बनेगा।
विदेशी धन खाकर बदनाम कर रहे कुछ लोग
मुख्यमंत्री ने भारतीय परंपरा पर प्रहार करने वालों पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दुनिया के एक कोने में बैठकर कुछ लोग लगातार भारतीय परंपरा को तोड़ने की कोशिश करते हैं। वह कुंभ को पर्यावरण, दलित व महिला विरोधी बताते हैं। विदेशी धन खाकर भारत में बैठकर भारत को बदनाम करने का काम करते हैं। ऐसे लोग भारत की परंपरा व संस्कृति को आज भी नहीं समझ पाए हैं। कुंभ भारतीय संस्कृति में मानवता का सबसे बड़ा मिलन स्थल है। मानवता के इस संगम में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है।
बजरंगबली, शबरी भगवान राम के वनवासी जीवन के सहयोगी
योगी ने कहा कि हमारी सनातन परंपरा ने कभी जाति-धर्म-अस्पृश्यता को महत्व नहीं दिया। अयोध्या की धरती तो कभी ऐसा सोच भी नहीं सकती। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की परंपरा ने कभी छुआछूत के भाव को नहीं माना। निषादराज उनके मित्र थे, शबरी कौन थीं, हनुमान कौन थे, बंदर और भालू कौन थे, उनके वनवासी जीवन के सहयोगी कौन थे? सबको लेकर राम ने रामराज्य की आधारशिला रखी थी।