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अवैध डिप्लोमा के सहारे जेई बने बाबुओं पर गिरेगी गाज, दो माह में होंगे डिमोट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 11 Jun 2018 02:47 PM IST
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- फोटो : demo
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सपा शासन में पीडब्ल्यूडी में जेई प्रमोशन में हुए घपले की कार्रवाई को लटकाने पर शासन ने सख्त रुख अपनाया है। पीडब्ल्यूडी मुख्यालय को सभी मामलों में दो माह में अंतिम कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, गलत ढंग से प्रमोशन पाने वाले बाबू रोज नए-नए तिकड़म करके मामलों को लंबा खींचने की कोशिश कर रहे हैं।
पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता (जेई) के 5 फीसदी पद बाबुओं की पदोन्नति से भरने का नियम है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की नियमावली में यह संशोधन वर्ष 2013 में किया गया था। इसके तहत इंजीनियरिंग का वैध डिप्लोमा करने वाले बाबुओं को योग्य माना गया है। इस संशोधन के बाद तमाम बाबुओं ने दूरस्थ शिक्षा से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल करके प्रमोशन ले लिया।
सपा शासन में कुल 124 बाबुओं को जेई के पद पर प्रमोट किया गया था। इनमें से 112 का इंजीनियरिंग का डिप्लोमा अवैध है। इन 112 जेई को पदावनति का नोटिस भी दे दिया गया, पर उन्होंने यूजीसी समेत उन सभी संस्थानों के उन आदेशों की प्रतियां मांग लीं, जिनके आधार पर पदावनति का निर्णय लिया गया। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि ये आदेश करीब एक हजार पन्नों में हैं। अब प्रत्येक कर्मचारी को एक हजार पन्ने के आदेश उपलब्ध कराना किसी झमेले से कम नहीं है।
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हालांकि, मुख्यालय ने ये आदेश सॉफ्ट कॉपी में सभी खंडों को उपलब्ध करा दिए हैं, ताकि वे अपने स्तर से फोटो कॉपी कराकर संबंधित जेई को दे सकें। उधर, इस मामले में शासन ने निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीने में मामले में अंतिम निर्णय लेकर उसे रिपोर्ट भेजी जाए। इस संबंध में प्रमुख अभियंता आरसी बरनवाल ने बताया कि अधिकतम दो महीने के भीतर इन सभी मामलों में डिमोशन की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।
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पीडब्ल्यूडी में अवर अभियंता (जेई) के 5 फीसदी पद बाबुओं की पदोन्नति से भरने का नियम है। तृतीय श्रेणी कर्मचारियों की नियमावली में यह संशोधन वर्ष 2013 में किया गया था। इसके तहत इंजीनियरिंग का वैध डिप्लोमा करने वाले बाबुओं को योग्य माना गया है। इस संशोधन के बाद तमाम बाबुओं ने दूरस्थ शिक्षा से दो वर्षीय डिप्लोमा हासिल करके प्रमोशन ले लिया।
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सपा शासन में कुल 124 बाबुओं को जेई के पद पर प्रमोट किया गया था। इनमें से 112 का इंजीनियरिंग का डिप्लोमा अवैध है। इन 112 जेई को पदावनति का नोटिस भी दे दिया गया, पर उन्होंने यूजीसी समेत उन सभी संस्थानों के उन आदेशों की प्रतियां मांग लीं, जिनके आधार पर पदावनति का निर्णय लिया गया। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि ये आदेश करीब एक हजार पन्नों में हैं। अब प्रत्येक कर्मचारी को एक हजार पन्ने के आदेश उपलब्ध कराना किसी झमेले से कम नहीं है।
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हालांकि, मुख्यालय ने ये आदेश सॉफ्ट कॉपी में सभी खंडों को उपलब्ध करा दिए हैं, ताकि वे अपने स्तर से फोटो कॉपी कराकर संबंधित जेई को दे सकें। उधर, इस मामले में शासन ने निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीने में मामले में अंतिम निर्णय लेकर उसे रिपोर्ट भेजी जाए। इस संबंध में प्रमुख अभियंता आरसी बरनवाल ने बताया कि अधिकतम दो महीने के भीतर इन सभी मामलों में डिमोशन की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी।