फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   शीतलहर से बढ़ी ठंड, लुढ़का पारा

शीतलहर से बढ़ी ठंड, लुढ़का पारा

Fri, 15 Dec 2017 01:33 AM IST
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:33 AM IST
विज्ञापन
शीतलहर से बढ़ी ठंड, लुढ़का पारा
अचानक शुरू हुई कड़ाके की ठंड से जनजीवन हुआ अस्तव्यस्त
विज्ञापन

बहराइच। तराई में गुरुवार को अचानक मौसम बदल गया। बर्फीली हवा चलने लगी। शीतलहरी का एहसास हुआ। इससे दिन का पारा जहां दो डिग्री लुढ़क गया वहीं जनजीवन अस्तव्यस्त रहा। ठंड से लोग कांप उठे।

धुंध के चलते दोपहर तक दृश्यता महज 10 मीटर के आसपास ही थी। इसका असर परिवहन और रेल सेवा पर भी पड़ा। मौसमविदों की मानें तो तराई का मौसम और बिगड़ सकता है। आगामी दो दिन में और भी कड़ाके की ठंड का सामना करना पड़ेगा।
विज्ञापन


दिसंबर का आधा महीना बीत गया है। लेकिन अब तक कड़ाके की ठंड का एहसास लोगों को नहीं हुआ था। लग रहा था कि ठंडक पड़ेगी ही नहीं। लेकिन गुरुवार की भोर शीतलहरी के संग आई। बर्फीली हवा के साथ सुबह हुई। बिस्तर छोड़ने पर लोग कांप उठे।
विज्ञापन
विज्ञापन


घर के बाहर निकले तो धुंध और कोहरे से सामना हुआ। पौ फटने के साथ ही कोहरा तो कम होता गया। लेकिन धुंध और ठंड में कमी नहीं आई। सुबह घर से स्कूल के निकले लिए नन्हे-मुन्ने बच्चे सिहरते और ठिठुरते हुए स्कूल जाने को मजबूर रहे।

वहीं मजदूरी पेशा वर्ग के लोगों को भी काफी दिक्कतें उठानी पड़ीं। धुंध के कारण सड़क पर वाहन रेंगते दिखे। मैलानी, गोंडा और नेपालगंज प्रखंड पर ट्रेन सेवाएं भी निर्धारित समय से एक से डेढ़ घंटे विलंब से संचालित हुई।

फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह ने बताया कि पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हुई है। उसी का असर तराई के मैदानी इलाकों में दिख रहा है। उन्होंने कहा कि ठंडी हवा आठ किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चली।

जिससे ठिठुरन और गलन का सामना करना पड़ा। आगामी दो दिनों में और भी कड़ाके की ठंड से सामना हो सकता है। बर्फीली हवा के चलते गुरुवार को अधिकतम तापमान 20.05 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। जबकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस आंका गया है।

आलू और तिलहन के किसान रहें सजग
तराई में जिस तरह मौसम परिवर्तित हो रहा है। ऐसे में आलू और तिलहन के किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। आलू में जहां झुलसा रोग की संभावनाएं अधिक होती हैं। वहीं तिलहन में माहू के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है।

गेहूं में भी गेरुआ रोग की संभावनाएं होती हैं। ऐसे में किसान निरंतर खेत की निगरानी करें। फसल की पत्तियों के पीले होने या झुलसने पर तत्काल क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से संपर्क कर दवा का छिड़काव करें।


अब तक नहीं जले अलाव, ठिठुर रहे लोग
तराई में पारा लुढ़कने लगा है। कड़ाके की ठंड गुरुवार से शुरू हो गई है। लेकिन अब तक अलाव के कोई इंतजाम नहीं हो सके हैं। जबकि शासन ने अलाव का बजट पहले ही जिला प्रशासन को भेज दिया है। नगर क्षेत्र में भी अलाव की व्यवस्था न होने से राहगीर व रिक्शा चालकों के साथ गरीब तबके के लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed