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ब्रह्मा की कचहरी में लिया राम मंदिर का संकल्प
Updated Tue, 14 Nov 2017 10:30 PM IST
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बहराइच। निकाय चुनाव में पहली बार कमल का फूल खिलाने उतरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सामाजिकता की तो बातें की ही, साथ ही एक बार फिर राम मंदिर निर्माण का संकल्प दोहराया। बोले, अयोध्या के प्रथम द्वार पर न आता तो परिक्रमा पूरी नहीं होती। उन्होंने कहा कि उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। हौसला बनाएं व बढ़ाएं, उम्मीदें पूरी होंगी।
निकाय चुनाव में चुनाव प्रचार की परंपरा पहली बार भाजपा ने शुरू की है। देश के सबसे बड़े प्रदेश यूपी की कमान स्वयं योगी आदित्यनाथ ने संभाली है। इसके निहितार्थ राजनीतिक पंडित क्या तलाश रहे हैं, यह तो अलग बात है। लेकिन मंगलवार को बहराइच पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों पर निशाना साधा तो आस्था पर संवेदना जताई। गौरतलब हो कि बहराइच पौराणिक काल में ब्रह्माइच के नाम से जानी जाती थी। इसे ब्रह्मा की कचहरी भी कहा जाता है। ब्रह्मा की इस कचहरी में मुख्यमंत्री ने बातों ही बातों में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और दिलाया। बोले कि अवध क्षेत्र (अयोध्या) का प्रथम द्वार बहराइच है। यहां न आता तो परिक्रमा पूरी न होती। उम्मीदों को पंख लगेंगे व सपने साकार होंगे। हौसला बनाएं और बढ़ाएं। उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दे पर बेबाक बयानबाजी की। आध्यात्म, साहित्य के संग जनता को इतिहास के झरोखे तक ले गए। लेकिन एक बात सभी को अखरी कि मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सिविल लाइंस का छोटा सा मैदान क्यों चुना गया।
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निकाय चुनाव में चुनाव प्रचार की परंपरा पहली बार भाजपा ने शुरू की है। देश के सबसे बड़े प्रदेश यूपी की कमान स्वयं योगी आदित्यनाथ ने संभाली है। इसके निहितार्थ राजनीतिक पंडित क्या तलाश रहे हैं, यह तो अलग बात है। लेकिन मंगलवार को बहराइच पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विरोधियों पर निशाना साधा तो आस्था पर संवेदना जताई। गौरतलब हो कि बहराइच पौराणिक काल में ब्रह्माइच के नाम से जानी जाती थी। इसे ब्रह्मा की कचहरी भी कहा जाता है। ब्रह्मा की इस कचहरी में मुख्यमंत्री ने बातों ही बातों में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया और दिलाया। बोले कि अवध क्षेत्र (अयोध्या) का प्रथम द्वार बहराइच है। यहां न आता तो परिक्रमा पूरी न होती। उम्मीदों को पंख लगेंगे व सपने साकार होंगे। हौसला बनाएं और बढ़ाएं। उतार-चढ़ाव से घबराएं नहीं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न मुद्दे पर बेबाक बयानबाजी की। आध्यात्म, साहित्य के संग जनता को इतिहास के झरोखे तक ले गए। लेकिन एक बात सभी को अखरी कि मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सिविल लाइंस का छोटा सा मैदान क्यों चुना गया।
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