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नहीं हुए कटान रोकने के उपाय, चुरईपुरवा में दहशत बरकरार
Updated Sat, 09 Sep 2017 10:03 PM IST
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राजीचौराहा (बहराइच)। घाघरा नदी की कटान निरंतर जारी है। इस समय नदी की लहरें चुरईपुरवा प्राथमिक विद्यालय पर थपेड़े ले रही हैं। वहीं दो ग्रामीणों के मकान भी शनिवार को नदी में समाहित हो गए। अब महज गांव में 41 मकान बचे हैं। अफरा-तफरी की स्थिति है। लोगों का पलायन जारी है।
महसी तहसील अंतर्गत चुरईपुरवा गांव में 175 लोगों के मकान थे। लेकिन धीरे-धीरे अब तक 134 मकान नदी में समाहित हो चुके हैं। महज 41 मकान शेष हैं। इन मकानों पर भी घाघरा की लहरें कहर बरपा रही हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय पर इस समय नदी की लहरें थपेड़े ले रही हैं। इसके चलते कब स्कूल नदी में समाहित हो जाए, कहा नहीं जा सकता। गांव के लोगों ने कटान रोकने के लिए पत्र लिखा, लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग भी बेबस दिखा। ऐसे में अब चुरईपुरवा गांव का प्राथमिक विद्यालय भी नदी में समाहित होने के कगार पर है। वहीं कटान तेज होने से गांव के लोग आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं। उपजिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने बताया कि कटान हो रही है। जिन लोगों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। उन्हें मुआवजा प्रदान किया जाएगा। राजस्वकर्मी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। गांव से निकल रहे लोगों को सुरक्षित बसाने के इंतजाम भी निरंतर जारी हैं।
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महसी तहसील अंतर्गत चुरईपुरवा गांव में 175 लोगों के मकान थे। लेकिन धीरे-धीरे अब तक 134 मकान नदी में समाहित हो चुके हैं। महज 41 मकान शेष हैं। इन मकानों पर भी घाघरा की लहरें कहर बरपा रही हैं। गांव के प्राथमिक विद्यालय पर इस समय नदी की लहरें थपेड़े ले रही हैं। इसके चलते कब स्कूल नदी में समाहित हो जाए, कहा नहीं जा सकता। गांव के लोगों ने कटान रोकने के लिए पत्र लिखा, लेकिन प्रशासन और सिंचाई विभाग भी बेबस दिखा। ऐसे में अब चुरईपुरवा गांव का प्राथमिक विद्यालय भी नदी में समाहित होने के कगार पर है। वहीं कटान तेज होने से गांव के लोग आशियाने उजाड़कर पलायन कर रहे हैं। उपजिलाधिकारी नागेंद्र कुमार ने बताया कि कटान हो रही है। जिन लोगों के मकान नदी में समाहित हुए हैं। उन्हें मुआवजा प्रदान किया जाएगा। राजस्वकर्मी रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। गांव से निकल रहे लोगों को सुरक्षित बसाने के इंतजाम भी निरंतर जारी हैं।
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