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हां, मर्द को दर्द होता है, रोते भी हैं...

Mon, 06 Dec 2021 07:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Dec 2021 07:39 PM IST
सार

  •  पुरुषों में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़े  इमोशनल ब्रेकडाउन के मामले
  • भावनात्मक संवेदनाएं संभालने में साबित हो रहे कमजोर, इलाज के लिए पहुंच रहे मनोवैज्ञानिकों के पास

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Yes, men have pain, they cry too
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay

विस्तार


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(सुरभि गुप्ता )  मर्द को दर्द नहीं होता... पुरुषों पर यह कहावत अब सटीक नहीं बैठती। पुरुषों को दर्द होता है और वे रोते भी हैं। आर्थिक परेशानियां, नौकरी का चला जाना, रिश्तों का टूटना, सम्मान न मिलना, जरूरत से ज्यादा जिम्मेदारियों का बोझ जैसी कई तरह की सामाजिक और व्यक्तिगत दिक्कतें हैं जिनसे आजिज आकर वे मनोचिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं। ऐसे पुरुषों की बढ़ती संख्या जाहिर करती है कि वे भावनात्मक रूप से कमजोर हुए हैं। दो से तीन सालों में  पुरुषों में इमोशनल ब्रेकडाउन के मामले 15-20 प्रतिशत तक बढ़े हैं।


 

Yes, men have pain, they cry too
अवसाद - फोटो : पिक्साबे
मोतीलाल नेहरू मंडलीय चिकित्सालय कॉल्विन के मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान बताते हैं कि महिलाएं अक्सर अपनी भावनाएं सगे संबंधियों से साझा कर लेती थीं, जबकि पुरुष अपनी दिक्कतें जल्दी जाहिर नहीं होने देते थे। मगर पिछले कुछ वर्षों में पुरुषों में भावनात्मक अस्थिरता बढ़ी है। उनके अंदर भावनाओं को जज्ब करने की क्षमता घटी है।


 
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Yes, men have pain, they cry too
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
परेशान होकर जब वह हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते हैं और ओपीडी में आते हैं तो अपनी दिक्कतें बताते-बताते रोने तक लगते हैं। उनकी बातों को बहुत संयम के साथ सुनना और समझना पड़ता है। कुछ मामले तो इतने गंभीर होते हैं कि उन्हें ठीक करने के लिए दवाइयों के साथ छह-सात सिटिंग भी करनी पड़ती है। डॉ. राकेश बताते हैं कि ओपीडी में हर सप्ताह इमोशनल ब्रेकडाउन से जुड़ी समस्याओं से पीड़ित लगभग 100 लोग आते हैं। इनमें 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएं होती हैं।
 
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Depression - फोटो : Pixabay
वहीं, मनोविज्ञानशाला में मनोवैज्ञानिक कमलेश पांडेय ने बताया कि काउंसिलिंग के लिए आने वाले ज्यादातर पुरुषों का कहना होता है कि उन्हें घर-परिवार, नौकरी के प्रति जिम्मेदारियां निभाने में भावनात्मक सहयोग नहीं मिल रहा है। जिससे उन्हें संतुलन बनाने में दिक्कत आ रही है। कॉल्विन में नैदानिक मनोवैज्ञानिक डॉ. ईशान्या राज का कहना है कि पितृसत्तामक समाज होने की वजह से पुरुषों को शुरू से ही मजबूत दिखाया गया, जिससे चाहकर भी वे अपनी दिक्कतें साझा नहीं करते थे।

Yes, men have pain, they cry too
Depression - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
वे यह सोचते थे कि अगर उन्होेंने अपनी भावनात्मक दिक्कतों को व्यक्त किया तो लोग उन्हें कमजोर समझेंगे। इसीलिए जल्दी वे खुद कोे पूरी तरह जाहिर नहीं करते थे और अपने आसपास दीवार खींचे रहते थे। जिसके कारण उसी में घुटते रहते हें। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इसमें काफी हद तक बदलाव आया है। पुरुष भी काउंसलिंग के लिए अकेले या फिर परिजनों के साथ पहुंच रहे हैं।

 

Yes, men have pain, they cry too
cry couple - फोटो : cry couple
इमोशनल ब्रेकडाउन में इन दिक्कतों को झेल रहे
- स्ट्रेस रिएक्शन
- एडजेस्टमेंट डिसआर्डर
-  एनजाइटी
- डिप्रेशन

 

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depression - फोटो : depression
इमोशनल ब्रेकडाउन की समस्या को लेकर काउंसलिंग के लिए मनोचिकित्सकों के पास पहुंचने वालों पर एक नजर
 वर्ष         पुरुष          महिला
2019      1002        680
2020      1403         722
2021      1201        622
(आंकड़े कॉल्विन अस्पताल से।)
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