भारत, कई किलों और महलों का घर होने के नाते, एक यात्री के लिए सबसे उम्दा देश है। भारत का इतिहास बहुत धनी और खूबसूरत रहा है जिसकी गवाही आज भी महल और किले देते हैं। आज हम भारत की ऐसी जगह के बारे में में बताने जा रहे हैं जहां पहुंच कर न सिर्फ आप अपने सोशल मीडिया के लिए ढेर सारी शानदार तस्वीरें खींच पाएंगे बल्कि इतिहास में हुई कलाकारी पर सोच में पड़ जाएंगे।
हैदराबाद में स्थित गोलकोंडा किला वास्तव में इस अवधारणा को सही ठहराता है। 500 वर्षों पुराना, गोलकोंडा किला अभी भी मजबूत खड़ा है। एक बार जब आप किले के अंदर कदम रखते हैं, तो आपको ऐसा लगेगा जैसे एक छोटे-राज्य में प्रवेश कर गए हैं। ये किला एक समय में हैदराबाद की महिमा और गौरव था, कई युद्धों की गवाही देती इसकी दीवारें अभी भी अतीत की कहानियों की कहती हैं। वास्तव में, गोलकुंडा किला इतिहास और रहस्य दोनों में समृद्ध है।
इस किले ने प्राचीन काकतीय, बहमनियों, कुतुब शाहियों से लेकर मुगलों तक के कई राजवंशों को देखा है। इसके चारों ओर किस्से हैं, इतिहास और मिथक का मिश्रण है। इस किले की कहानी आपको उस समय में वापस ले जाती है जब हैदराबाद वैश्विक प्रभाव वाला शहर भी नहीं था।
गोलकुंडा उस समय अस्पष्टता और ग्लैमर का स्थान था और आज आपको बस इसके पिछले गौरव की झलक देखने को मिलेगी। इसके अलावा, प्रतिष्ठित कीमती पत्थरों के लिए यह माना जाता है कि प्रसिद्ध कोहिनूर, दरिया-ए-नूर और होप डायमंड का यहीं पता लगाया गया था।
माना जाता है कि एक गुप्त भूमिगत मार्ग है जो दरबार हॉल को जोड़ता है, जो कि शीर्ष पर स्थित है, और पहाड़ी के तल पर स्थित महलों में से एक है। हालांकि यह मार्ग राजघरानों के लिए भागने का मार्ग था। गुंबद के नीचे राजसी पोर्टिको के भीतर ताली बजाने की कोशिश करें और आप बाला हिसार मंडप में ताली की आवाज सुन पाएंगे, जो लगभग 1 किमी दूर है।