हनोई नहीं देखा, तो समझिए आपने दुनिया को ठीक से देखा ही नहीं। लाल नदी के किनारे बसा पांच हजार साल पुराना यह शहर वियतनाम की राजधानी है। वियतनाम के संघर्षों और जिजीविषा का साक्षी रहा यह शहर अब अपनी जिंदादिली और बिंदासपने के कारण बड़ी तेजी से सैलानियों की पहली पसंद बनता जा रहा है। यह झीलों का शहर भी है और दुपहिया वाहनों का भी। आबादी में महिलाओं और पुरुषों की तादाद लगभग बराबर है। आदिकाल में मातृसत्तात्मक रहा यहां का समाज अब पुनः उसी दिशा में अग्रसर है। यहां आने वाला हर महत्वपूर्ण व्यक्ति वियेतनाम के महात्मा गांधी हो ची मिन्ह के स्मारक पर जरूर जाता है।
जीवन में एक बार 'हनोई' नहीं देखा तो आपने कुछ नहीं देखा
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डेढ किलोमीटर लंबी और लगभग आठ सौ मीटर चौड़ी विश्वप्रसिद्ध हॉन कीम झील ने इसे दो भागों में बांट दिया है। झील में बने दो टापुओं पर स्थित पगौड़ा और महल शहर की शान में चार चांद लगाते हैं। शहर से कुछ दूर स्थित तामचुक पगौड़ा में पुरे साल दुनिया भर से बुद्घ के अनुयाइयों का तांता लगा रहता है। शहर के एक हिस्से में लंबी-चौड़ी, साफ-सुथरी चमचम सड़कें हैं, तो दूसरे हिस्से में संकीर्ण सड़कें और ग्राहकों की भीड़ से लदे-फंदे पटरी बाजार। इन बाजारों में मुरादाबाद के पीतल से लेकर लगभग हर देश का सामान मिलेगा। हस्तशिल्प से लेकर इलेक्ट्रानिक और गहने तक। हनोई की सिल्क और कॉफी भी मशहूर है। खास बात यह है कि सैलानियों को यह शहर महंगा नहीं लगता।
एक खास बात, जो इस शहर को दुनिया के बाकी शहरों से अलग करती है, यह है कि यहां वीकएंड पर जबरदस्त मस्ती होती है। झील के किनारे शहर के प्रमुख बाजारों में शुक्रवार की शाम से रविवार की रात तक वाहनों, यहां तक कि साइकिलों का भी प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया जाता है। शुक्रवार को रात उतरते ही इन बाजारों की सड़कें और झील के किनारे बच्चों, युवाओं और अधेडों से गुलजार हो जाते हैं। इसके बाद नाच-गाना, एरोबिक्स, खेलकूद, कलाकारी, चित्रकारी और मस्ती का जो सिलसिला शुरू होता है उससे लगता है मानो धरती पर इन्द्रलोक का अक्स उतारने की कवायद की जा रही है। इनके अलावा शहर में और भी अनेक ऐसे दर्शनीय स्थल हैं जो आपको रिझाते, लुभाते और अरसे तक याद रह जाते हैं।