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Famous Temples of Rishikesh: चारधाम यात्रा शुरू करने से पहले ऋषिकेश के इन मंदिरों के जरूर करें दर्शन
Sat, 18 May 2024 01:11 PM IST
श्रुति गौड़
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्रुति गौड़
Updated Sat, 18 May 2024 01:11 PM IST
सार
अगर आप चारधाम की यात्रा पर जा रहे हैं तो ऋषिकेश के इन मंदिरों में हाथ जोड़ने के लिए जरूर जाएं।
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ऋषिकेश के मशहूर मंदिर
- फोटो : instagram
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विस्तार
Famous Temples of Rishikesh: हाल ही में केदारनाथ के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का भी आरंभ हो गया है। यहां श्रद्धालुओं को हर तरह की सुविधा देने के लिए सरकार भी लगातार कदम उठा रही है। चारधाम के कपाट खुलने के साथ ही सभी मंदिरों में हजारों की तादाद में लोग पहुंच रहे हैं। इस यात्रा का आरंभ ऋषिकेश से होता है। इसे चारधाम का गेटवे भी कहा जाता है। ज्यादातर लोग यहीं से अपनी यात्रा की शुरुआत करते हैं।
ऋषिकेश को योग और आध्यात्म की नगरी भी कहा जाता है। ऐसे मे यहां का माहौल काफी शांतिभरा होता है। अगर आप भी चारधाम की यात्रा पर जा रहे हैं तो पहले एक दिन के लिए ऋषिकेश जरूर जाएं। यहां कई ऐसे फेमस मंदिर हैं, जहां लोग चारधाम की यात्रा से पहले माथा जरूर टेकते हैं। इन मंदिरों की अपनी अलग मान्यता है। आइए आपको भी इनके बारे में बताते हैं, ताकि आप भी यहां जाकर भगवान के दर्शन कर सकें।
भरत मंदिर
ये मंदिर ऋषिकेश शहर के मध्य में स्थित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की मुर्ति स्थापित है। इसे शहर का बहुत पुराना और सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। उन्हीं के नाम पर इस शहर को ऋषिकेश नाम दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन कराए जाते हैं, उसी के बाद चारधाम के कपाट खोले जाते हैं।
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सत्यनारायण का मंदिर
ये मंदिर ऋषिकेश में लक्ष्मण झूले के पास स्थित है। इसका इतिहास तकरीबन 500 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है जब मोटर मार्ग की सुविधा नहीं थी, तो चारधाम जाने वाले यात्री इसी मंदिर में एक रात आराम करते थे। रात बीतने के बाद वो अगले दिन अपनी यात्रा आरंभ करते थे।
गरुण मंदिर
गरुण चट्टी में स्थित ये मंदिर ऋषिकेश से तकरीबन 10 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने गरुण देव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था। कहा जाता है कि जो लोग बद्रीनाथ धाम नहीं जा पाते हैं, उन्हें इस मंदिर में जाने से समान फल की प्राप्ति होती है।
आदि बद्री द्वारकाधीश मंदिर
लक्ष्मण झूला में जो श्री सच्चा अखिलेश्वर मंदिर स्थित है, उसी के सामने आदि बद्री द्वारकाधीश मंदिर है। यहां आपको चारों धाम का गंगा जल आसानी से मिल सकता है। यहां भगवान विष्णु की मुर्ति स्थापित है। जो लोग चारधाम नहीं जा पाते हैं, वो यहां ये चारधाम का जल लेकर जा सकते हैं।
गौरी शंकर महादेव मंदिर
मान्यता है कि त्रिवेणी संगम के पास स्थित इस मंदिर में तकरीबन 60,000 वर्ष पहले माता पार्वती ने ऋषि के तप से उठने की प्रतीक्षा की थी। एक समय में ये रास्ता बद्रीनाथ धाम का पैदल मार्ग हुआ करता था। लोग पहले त्रिवेणी नदी में स्नान करते थे और फिर उसके बाद ही अपनी यात्रा शुरू करते थे।
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ऋषिकेश को योग और आध्यात्म की नगरी भी कहा जाता है। ऐसे मे यहां का माहौल काफी शांतिभरा होता है। अगर आप भी चारधाम की यात्रा पर जा रहे हैं तो पहले एक दिन के लिए ऋषिकेश जरूर जाएं। यहां कई ऐसे फेमस मंदिर हैं, जहां लोग चारधाम की यात्रा से पहले माथा जरूर टेकते हैं। इन मंदिरों की अपनी अलग मान्यता है। आइए आपको भी इनके बारे में बताते हैं, ताकि आप भी यहां जाकर भगवान के दर्शन कर सकें।
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भरत मंदिर
ये मंदिर ऋषिकेश शहर के मध्य में स्थित है। इस मंदिर में भगवान विष्णु की मुर्ति स्थापित है। इसे शहर का बहुत पुराना और सबसे पवित्र मंदिर माना जाता है। उन्हीं के नाम पर इस शहर को ऋषिकेश नाम दिया गया है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु के चरणों के दर्शन कराए जाते हैं, उसी के बाद चारधाम के कपाट खोले जाते हैं।
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सत्यनारायण का मंदिर
ये मंदिर ऋषिकेश में लक्ष्मण झूले के पास स्थित है। इसका इतिहास तकरीबन 500 साल से ज्यादा पुराना बताया जाता है। ऐसा कहा जाता है जब मोटर मार्ग की सुविधा नहीं थी, तो चारधाम जाने वाले यात्री इसी मंदिर में एक रात आराम करते थे। रात बीतने के बाद वो अगले दिन अपनी यात्रा आरंभ करते थे।
गरुण मंदिर
गरुण चट्टी में स्थित ये मंदिर ऋषिकेश से तकरीबन 10 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि यहां भगवान विष्णु ने गरुण देव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था। कहा जाता है कि जो लोग बद्रीनाथ धाम नहीं जा पाते हैं, उन्हें इस मंदिर में जाने से समान फल की प्राप्ति होती है।
आदि बद्री द्वारकाधीश मंदिर
लक्ष्मण झूला में जो श्री सच्चा अखिलेश्वर मंदिर स्थित है, उसी के सामने आदि बद्री द्वारकाधीश मंदिर है। यहां आपको चारों धाम का गंगा जल आसानी से मिल सकता है। यहां भगवान विष्णु की मुर्ति स्थापित है। जो लोग चारधाम नहीं जा पाते हैं, वो यहां ये चारधाम का जल लेकर जा सकते हैं।
गौरी शंकर महादेव मंदिर
मान्यता है कि त्रिवेणी संगम के पास स्थित इस मंदिर में तकरीबन 60,000 वर्ष पहले माता पार्वती ने ऋषि के तप से उठने की प्रतीक्षा की थी। एक समय में ये रास्ता बद्रीनाथ धाम का पैदल मार्ग हुआ करता था। लोग पहले त्रिवेणी नदी में स्नान करते थे और फिर उसके बाद ही अपनी यात्रा शुरू करते थे।