प्यार की कहानी: 7 दशक का साथ और फिर 12 घंटे के अंतराल में दोनों ने दुनिया छोड़ दी
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कई कहानियां आपको भीतर से भावुक कर देती हैं। ऐसी ही कहानी जॉर्जिया के एक बुजुर्ग दंपति की है जो अब इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। सात दशक तक एक-दूसरे का साथ निभाने के बाद, हाल ही में बारह घंटे के अंतराल में दोनों ने दुनिया छोड़ दी। पहले पति ने प्राण त्यागे और ठीक बारह घंटे के भीतर पत्नी का भी देहांत हो गया। 71 साल के शादीशुदा जीवन के बाद 94 साल के हर्बट और 88 साल की मर्लिन फ्रांसिस की जीवन लीला समाप्त हो गई। इस घटना को सुनकर और पढ़कर लोग कह रहे हैं कि क्या जोड़ी और कैसा प्यार था? एक सुबह मरा और दूसरा शाम को। इस तरह की कई घटनाएं पहले भी सामने आई हैं जहां पति-पत्नी ने एक साथ या फिर कुछ घंटे के भीतर प्राण त्यागे हैं। ऐसी घटनाओं में लोग दोनों के बीच के प्यार और जुड़ाव के बारे में सोचकर भावुक हो उठते हैं। आइए जानते हैं हर्बट और मर्लिन की प्रेम कहानी के बारे में...
हर्बट और मर्लिन की मुलाकात 1940 में हुई। यह मुलाकात एक कैफे में हुई थी। ठीक एक साल बाद दोनों ही शादी के बंधन में बंध गए। उस वक्त हर्बट 22 साल के थे और मर्लिन 16 साल की थीं। 2018 में यह जोड़ा अपनी 70वीं सालगिरह के जश्न के दौरान भी दुनियाभर में चर्चाओं में आया था। उस वक्त पश्चिमी मीडिया ने इस जोड़ों को टीवी पर मिसाल के तौर पर पेश किया था। उसी वक्त इस जोड़े ने अपनी प्रेम कहानी के बारे में दुनिया को बताया था। हर्बट ने उस वक्त बताया था- फ्रांसिस एक कैफे में काम करती थी जहां मैंने उसे पहली बार देखा। पहली नजर में ही मुझे मर्लिन से प्यार हो गया। मैं उसे देखते रहा। मेरी नजरें उस पर से हटी ही नहीं। कुछ देर बाद मैं उसके करीब था और बातें कर रहा था।
हाल ही में 12 जुलाई को हर्बट की मौत हुई है। वह 94 साल के थे और दोपहर के 2.20 बजे उन्होंने आखिरी सांस ली। हर्बट की मौत के 12 घंटे के भीतर उनकी पत्नी मर्लिन ने भी ठीक रात के 2.20 बजे दुनिया को अलविदा कहा। यह अपने आप में अजब का संयोग है। दोनों की ही मौत एक ही वक्त में बारह घंटे के अंतराल में हुई। इस कपल के छह बच्चे और कई नाती-पोते हैं। पिछले साल हर्बट ने बताया था कि वह वक्त के पाबंद नहीं थे और इसी वजह से शादी के दिन भी उन्हें देर हो गई थी। चर्च में सभी मेहमान आ चुके थे। दुल्हन तैयार थी और दुल्हा एक घंटा लेट पहुंचा। हर्बट ने 22 साल तक फौज की नौकरी की और फिर रिटायर होकर घर आ गए। उत्कृष्ट सेवा के लिए उन्हें सेना के सर्वोच्च पदक से भी सम्मानित किया गया था।