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ब्लीडिंग नहीं रुकती तो हो सकता है यह रोग
अमर उजाला, दिल्ली ब्यूरो
Updated Thu, 17 Apr 2014 01:18 PM IST
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लगातार खून बहता है, कटने के बाद खून नहीं रुकता या अक्सर मसूड़ों और नाक से खून निकलता है तो यह हीमोफिलिया के लक्षण हो सकते हैं।
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विश्व हीमोफिलिया दिवस पर अब अस्पतालों में गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच कर बताया जा सकेगा कि होने वाले बच्चे को हीमोफिलिया है या नहीं। गर्भ में बीमारी का पता लगाने के लिए लोक नायक अस्पताल में जल्द ही जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
अभी तक यह व्यवस्था अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में है। विशेषज्ञों का मानना है कि योगा थेरेपी से भी मरीज की बीमारी में 50 फीसदी तक सुधार संभव है।
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लोक नायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेश गुप्ता ने बताया कि गर्भ में पल रहे बच्चे को हीमोफिलिया बीमारी की जांच की सुविधा मुफ्त उपलब्ध होगी, लेकिन सभी गर्भवती की जांच नहीं की जाएगी।
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जिनके परिवार में किसी को हीमोफिलिया है या पहला बच्चा हीमोफिलिया से पीड़ित है, उन्हीं के गर्भ में पल रहे बच्चे की जांच की जाएगी। गर्भ के 10 से 12 सप्ताह में जांच कर बीमारी का पता लगाया जा सकता है।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि हीमोफिलिया पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए फैक्टर आठ और फैक्टर नौ जितनी जरूरी ही योगा थेरेपी भी है। योगा थेरेपी के साथ-साथ खान-पान से भी असर पड़ता है। योगा थेरेपी से मरीज की बीमारी में 50 फीसदी तक सुधार संभव है।
डॉ. गुप्ता का कहना है कि फैक्टर आठ और फैक्टर नौ खून का थक्का जमाने में मददगार जरूर है, लेकिन रक्त स्राव को रोकने और खून का थक्का जमाने का यह स्थायी समाधान नहीं है। योगा थेरेपी में मरीजों को प्राणायाम सिखाया जाता है।
शारीरिक कार्य करने के लिए शरीर को संतुलित रखना मेडिटेशन भी सिखाया जाता है। बीमारी का पता लगाने के लिए स्क्रीनिंग टेस्ट फॉर ब्लीडिंग डिस्ऑर्डर की जाती है।
फैक्टर
फैक्टर आठ मरीज को दिन में दो बार देना पड़ता है जबकि फैक्टर नौ एक दिन में एक बार देना पड़ता है। फैक्टर की मात्रा मरीज के वजन के अनुसार तय की जाती है। हीमोफिलिया ए के मरीज को फैक्टर आठ और बी को फैक्टर नौ दिया जाता है। लोक नायक में मरीजों के परिजनों को फैक्टर देने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।
हीमोफिलिया के लक्षण
नाक से लगातार खून बहना, शरीर में किसी जगह कटने-फटने पर खून रुकने में देरी होना, किसी ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्त स्राव होना, ब्रश करते समय मसूढ़ों से खून निकलना, जोड़ों में सूजन आना, शरीर में आंतरिक रक्त स्राव होना आदि। यह अनुवांशिक बीमारी है जो मां से बच्चे में जाती है।
हीमोफीलिया के इलाज के लिए सेंटर
दिल्ली सरकार के लोक नायक अस्पताल, गुरु तेग बहादुर अस्पताल और दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल। भारत सरकार के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, ईसआई अस्पताल और सेंट्रल रेलवे अस्पताल। इसके अलावा कुछ निजी संस्थानों भी इलाज की सुविधा उपलब्ध है।