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दांतों की गंदगी दे सकती है यह गंभीर रोग
Updated Wed, 09 Apr 2014 11:15 AM IST
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समय-समय पर दांत की जांच न कराए जाने से मुंह और गले के कैंसर का ख़तरा बढ़ जाता है, एक अध्ययन में ये पता चला है।
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इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने पाया है कि माउथवॉश का अत्यधिक इस्तेमाल - एक दिन में तीन बार से ज़्यादा - भी कैंसर के ख़तरे को बढ़ा देता है।
मुंह और गले के कैंसर के लिए धूम्रपान, ज़्यादा शराब पीना और ग़रीबी को मुख्य कारण मानना एक स्थापित धारणा है।
यूरोप के नौ देशों में 1,962 कैंसर रोगियों पर ये अध्ययन किया गया था।
इस अध्ययन को जर्मनी के ब्रेमेन में लीबनीज़ इंस्टीट्यूट फॉर प्रिवेंशन रिसर्च एंड एपिडेमोलॉजी विभाग (बिप्स) ने किया और इसमें ग्लासगो विश्वविद्यालय के डेंटल स्कूल के शोधकर्ता भी शामिल थे।
महत्वपूर्ण नतीजे
शोधकर्ताओं का कहना है कि चाहे मुंह में दांत न हों तब भी मुंह की जांच नियमित रूप से करानी चाहिए।
बिप्स के उप निदेशक प्रोफ़ेसर वॉल्फगैंग ऐरेन ने इस अध्ययन के नतीजों को बहुत ही महत्वपूर्ण बताया है।
उन्होंने कहा, ''अभी तक यह पता नहीं था कि दांतों की बिगड़ी सेहत के ये कारक मुंह और गले के कैंसर के ज्ञात कारणों- धूम्रपान, शराब पीने और ग़रीबी- से अलग हैं। ''
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उन्होंने कहा कि अध्ययन के नतीजे बहुत ही सूक्ष्म हैं और कई अन्य कारकों से जुड़े हुए हैं।
मुंह की ख़राब सेहत का संबंध उन सभी लोगों से है जिनके पूरे या कम दांत हैं या जिनके मसूड़ों से रक्तस्राव होता है।
ग्लासगो विश्वविद्यालय के डेंटल स्कूल के वरिष्ठ लेक्चरर डॉक्टर डेविड कानवे कहते हैं, ''लोगों को यह नहीं मान लेना चाहिए कि यदि वे नकली दांत का इस्तेमाल करते हैं और उनका कोई भी दांत नहीं बचा है तो उन्हें दंत चिकित्सक के पास जाने की कोई ज़रूरत नहीं है।''
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''इसके साथ ही यहां तक कि यदि आप नकली दांत इस्तेमाल करते हैं तब भी आप को नियमित जांच के लिए जाना चाहिए।''
अध्ययन में दांत की ख़राब हालत वाले लोग उन लोगों को माना गया है जिन्होंने कभी अपने दांतों को साफ़ नहीं किया और ना ही दांतों के डॉक्टर के पास गए।
डॉक्टर कोनवे का कहना है कि कितनी बार जांच करानी है ये चिकित्सक द्वारा ख़तरे के आकलन के आधार पर तय किया जाना चाहिए। यदि व्यक्ति कम ख़तरे की श्रेणी में आता है तो भी उसे हर वर्ष या दो वर्ष में दांत की जांच करानी चाहिए।
दांतों के डॉक्टर
गले और मुंह के कैंसर का माउथवॉश एक संभावित कारण हो सकता है लेकिन अभी इस ओर और शोध की ज़रूरत है।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला नहीं है जो सबके लिए समान हो। डॉक्टर के पास जाने का अंतराल छह महीने में एक बार हो सकता है लेकिन पांच साल में एक बार नहीं।
माउथवॉश के ख़तरे
शोधकर्ताओं का मानना है कि माउथवॉश और कैंसर के संबंध पर आगे शोध की ज़रूरत है।
अध्ययन में शामिल लोगों द्वारा सालों पहले इस्तेमाल किए जाने वाले माउथवॉश की प्रकृति के बारे में विश्लेषण करने में शोधकर्ता असमर्थ थे।
डॉक्टर कोनवे ने कहा, ''मैं माउथवॉश के इस्तेमाल को पूरी तरह से बंद करने की सलाह नहीं दूंगा।''
वो कहते हैं, "कुछ ऐसी स्थितियां होती हैं जब दांतों के डॉक्टर माउथवॉश की सलाह देते हैं। हो सकता है कि कुछ खास स्थितियों या दवा की वजह से मरीज में लार कम बनती हो। लेकिन मेरे लिए सामान्य रूप से जो सबसे ज़रूरी है, वो है फ़्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करना और नियमित रूप से दांतों के डॉक्टर को दिखाते रहना।''
अध्ययन के नतीजों को ओरल ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित किया जा रहा है।