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खून के रिश्ते में शादी का बड़ा है यह नुकसान
धर्मेंद्र त्यागी/अमर उजाला, आगरा
Updated Sat, 28 Sep 2013 12:41 PM IST
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भले ही आधुनिक सोच इससे इत्तफाक न रखें, लेकिन वैज्ञानिक सत्य यही है। खून के रिश्तों में शादी करना बच्चों के लिए खतरे से खाली नहीं है। रक्त संबंध वाले पति-पत्नी के बच्चे जन्मजात बीमारी से ग्रस्त होते हैं। इनमें 12 फीसदी हृदय रोगी हो जाते हैं।
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यूएसए के यूनीवर्सिटी ऑफ अलबामा मेडिसिन एवं कार्डियोवैसक्यूलर डिसीज के डायरेक्टर डॉ. नवीन चंदा ने अपने शोध में पाया कि खून के रिश्ते में शादी से पैदा हुए बच्चों में 12 फीसदी जन्मजात हृदय रोगी होते हैं।
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रक्त संबंधी पति-पत्नी के क्रोमोसोम के टकराने से बच्चों के हृदय तक आघात पहुंचता है। इससे दिल की बीमारियां पैदा होती हैं। पांच से आठ फीसदी बच्चों के वाल्व में जन्मजात छेद होते हैं। उनकी मानें तो मिडिल ईस्ट देशों के बच्चों में यह बीमारी तेजी से पनप रही है।
यह है पहचान
बच्चों के नाखून नीले पड़ना, बुरी तरह से हांफना, गले में खराश और जकड़न रहना, मेहनत का कार्य करने से बेहोश हो जाना जैसे लक्षण पर बच्चे को तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाएं।
इकोकार्डियोलोजी से उपचार संभव
डॉ. नंदा ने बताया कि ईकोकार्डियोग्राफी से वाल्व की सिकुड़न और छेद का उपचार संभव है। प्रौब के जरिए हृदय में साउंड रेज से संक्रमित क्षेत्र और वाल्व में छेद की सटीक जानकारी हासिल होती है। वाल्व का डायग्नोस कर 2-3 मिली मीटर तक के छेदों को ठीक किया जा सकता है।