यदि हमारे शरीर में पानी पर्याप्त मात्रा में होता है तो शरीर में कोई समस्या नहीं होती लेकिन यदि पानी की मात्रा किसी कारणवश कम हो जाती है तो शरीर अस्वस्थ हो जाता है और तरह-तरह की पीड़ादायी बीमारियां होने लगती हैं। डिहाईड्रेशन की समस्या किसी को भी हो सकती है। इसे बड़े तो बूझ लेते हैं लेकिन छोटे बच्चे इसे नहीं समझ पाते हैं और वे परेशान होते रहते हैं। अगली स्लाइड्स के माध्यम से जानें बच्चों में होने वाले डिहाइड्रेशन की वजह, लक्षण और उपाय।
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वजह-
बच्चों में निर्जलीकरण के पीछे वैसे तो कई कारण हो सकते हैं। बच्चों के जब दांत निकलते हैं तो वे खाना- पीना छोड़ देते हैं, ऐसे में उनके शरीर में पानी की कमी होना सामान्य बात है। पेट के इंफेक्शन से बच्चों को उल्टी- दस्त का होना, बुखार आना, स्तनपान न करने आदि से बच्चों का शरीर डिहाईड्रेट होता है। गर्मी के मौसम में यह समस्या बच्चों को अधिक होती है।
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लक्षण-
छोटे बच्चे जब किसी भी कारणवश बीमार पड़ते हैं, तो सबसे पहले उनके व्यवहार में परिवर्तन आता है। वे चिड़चिड़े हो जाते हैं, रोने लगते हैं। छोटे बच्चों को बार-बार पेशाब करने की आदत होती है। लेकिन यदि बच्चे को तीन घंटे या उससे ज्यादा समय तक पेशाब नहीं आ रही तो शिशु के शरीर में पानी की कमी है। होंठ फटना, आंसू न आना, सांसों का तेज होना भी बच्चों में पानी की मात्रा के कम होने के लक्षण है।
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उपचार-
प्राथमिक उपचार के तौर पर शिशु को अधिक से अधिक तरल पदार्थ दें, स्तनपान कराएं। गाय या भैंस के दूध के बजाय फॉर्मूला दूध देवें। बच्चे को हर घंटे चम्मच से ओआरएस का घोल पिलाएं। शिशु को तबतक तरल पदार्थ देते रहें जबतक उसकी पेशाब का रंग सामान्य न हो। यदि बच्चा इन उपायों के बावजूद भी ठीक नहीं हो पा रहा है, तो तुरंत उसे डॉक्टर के पास लेकर जाएं। यदि वह तरल पदार्थ नहीं ले पा रहा है तो उसे नस के जरिये भी फ्लूइड दिया जा सकेगा।