Bhai Dooj 2024: आज है भाई दूज, जानें दिवाली के बाद क्यों और कैसे मनाया जाता है ये त्योहार
भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं और भाइयों की लंबी आयु की कामना करती हैं। अलग-अलग स्थानों पर भाई दूज मनाने का अलग रिवाज है।
विस्तार
Bhai Dooj 2024 Kab Hai : भाई दूज का पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। यह पर्व भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए मनाया जाता है और इस दिन बहनें अपने भाइयों की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना से पूजा करती हैं। भाई दूज को यम द्वितीया भी कहा जाता है क्योंकि यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि में होता है। इस त्योहार के पीछे कई धार्मिक कथाएं और मान्यताएं प्रचलित हैं, जो इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।
कब है भाई दूज 2024
इस वर्ष भाई दूज 3 नवंबर 2024 को मनाया जा रहा है। दरअसल इस वर्ष दीपावली दो दिन रही। 31 अक्तूबर और 1 नवंबर दोनों ही दिन कार्तिक मास की अमावस्या तिथि है। ऐसे में 2 नवंबर को गोवर्धन पूजा और 3 नवंबर को भाई दूज मनाया जा रहा है।
भाई दूज मनाने का तरीका
भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों के लिए विशेष पूजा-अर्चना करती हैं और भाइयों की लंबी आयु की कामना करती हैं। अलग-अलग स्थानों पर भाई दूज मनाने का अलग रिवाज है। कुछ जगहों पर बहन दीवार या जमीन पर पूजा की चौक बनाती हैं। इस चौक पर पूजन किया जाता है। इसमें चावल के आटे से चौक बनती है।
फिर बहन भाई के हल्दी-चूने का तिलक लगाती हैं और मुंह मीठा कराती हैं। भाई भी बहन को शगुन देते हैं। इसे रक्षाबंधन के समान ही माना जाता है, लेकिन यह राखी बांधने के बजाय तिलक करने का त्यौहार है।
भाई दूज से जुड़ी मान्यताएं
भाई दूज से जुड़ी दो कथाएं हैं। पहली कथा, यमराज और यमुना जी से जुड़ी है। हिंदू धर्म में मृत्यु के देवता यमराज की एक बहन हैं, जिनका नाम यमुना है। कहते हैं कि एक बार यमराज जी अपनी बहन यमुना के आग्रह पर उनके घर आए थे। तब यमुना जी ने अपने भाई का आदर सत्कार कर उन्हें तिलक लगाया और भोजन कराया। इसपर यमराज जी बहुत प्रसन्न हुए और यमुना जी वरदान मांगने को कहा। यमुना जी ने सभी भाइयों की लंबी आयु और सुख समृद्धि का वरदान मांगा। तभी से इस दिन बहन अपने भाइयों के लिए पूजन करती हैं और तिलक लगाकर लंबी आयु की प्रार्थना करती हैं।
भगवान श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा
एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने गए थे। सुभद्रा ने उनका स्वागत करते हुए तिलक लगाया और मिठाई खिलाई। इस परंपरा के चलते भी भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।
भाई दूज के नियम और परंपरा
तिलक की परंपरा- भाई दूज पर बहनें अपने भाई को रोली, चंदन, या कुमकुम से तिलक करती हैं। कुछ जगहों पर हल्दी और चूने के मिश्रण से तिलक बनाकर भाई के माथे पर लगाया जाता है। तिलक के बाद भाई की आरती उतारी जाती है और मिठाई खिलाई जाती है।
थाल सजाना- बहनें इस दिन विशेष थाल सजाती हैं, जिसमें रोली, अक्षत (चावल), दीपक, मिठाई और नारियल रखा जाता है। इस थाल को पूजा के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
भाई को भोजन कराना- मान्यता है कि इस दिन भाई अपनी बहन के घर भोजन करे तो उसे दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसलिए कई घरों में भाई को बहन के हाथ से बना भोजन कराया जाता है।
उपहार का आदान-प्रदान- इस दिन भाई अपनी बहन को उपहार देते हैं, जो उनकी बहन के प्रति प्यार और देखभाल का प्रतीक है।
सूर्यास्त से पहले पूजा- मान्यता है कि भाई दूज की पूजा सूर्यास्त से पहले ही कर लेनी चाहिए, ताकि शुभ फलों की प्राप्ति हो।