यूपी गजब है! एलटी ग्रेड के शिक्षक ले रहे प्रधानाचार्य का इंटरव्यू
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'जिस पद के लिए चयन की अर्हता नहीं रखते उसका चयन नहीं कर सकते' यदि यह फार्मूला उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में लागू हुआ तो उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में भी उथल-पुथल मचेगी।
यहां कार्यवाहक अध्यक्ष सहित दो सदस्य ऐेसे हैं, जो प्रधानाचार्य के चयन की अर्हता नहीं रखते हैं। ऐसे में उनको भी प्रधानाचार्य पद के लिए हो रहे साक्षात्कार की प्रक्रिया से बाहर होना पड़ सकता है।
उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष और कुछ सदस्यों को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। उन पर आरोप है कि प्राचार्य के पद के लिए हुए साक्षात्कार में वे असफल रहे हैं। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा को जांच करने का आदेश भी दिया है। सदस्यों के चयन का मानक उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में भी लागू होता है।
सदस्यों के पास नहीं है चयन की अर्हता
चयन बोर्ड में इन दिनों प्रधानाचार्य पद के लिए साक्षात्कार चल रहे हैं। प्रधानाचार्य का साक्षात्कार एलटी ग्रेड के शिक्षक (सदस्य) ले रहे हैं। इन सदस्यों के पास प्रधानाचार्य पद पर आवेदकों के चयन की अर्हता नहीं है।
सरकार ने यदि उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग में सदस्यों के बारे में कोई फैसला किया तो वही मानक चयन बोर्ड में भी लागू करना होगा। चयन बोर्ड की सदस्य और इन दिनों अध्यक्ष का प्रभार संभाल रहीं अनीता यादव इटावा के एक इंटर कॉलेज में एलटी ग्रेड की शिक्षिका हैं, सदस्य डॉ. आशालता सिंह लखनऊ के नेशनल इंटर कॉलेज में प्रवक्ता हैं, चयन बोर्ड में दूसरा कार्यकाल पाने वाले ललित कुमार श्रीवास्तव लखनऊ के एक स्कूल में शिक्षक हैं।
इसी के साथ डॉ. योगेंद्र प्रजापति बेचैन एवं डॉ. मो. उमर डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता हैं। इन दोनों डिग्री कॉलेज के शिक्षकों को छोड़कर सभी सदस्य प्रधानाचार्य पद के चयन की अर्हता नहीं रखते। सदस्य डॉ. आशालता सिंह इंटर कॉलेज में प्रवक्ता होने के कारण प्रधानाचार्य के चयन की पात्रता तो रखती हैं, परंतु साक्षात्कार लेने की अर्हता नहीं रखतीं।