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चाईबासा की बेटी ने खोजी 'बाल उगाने' की नई तकनीक, अमेरिकी संस्था ने दिया ये खास सम्मान

Wed, 20 Dec 2017 06:50 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Wed, 20 Dec 2017 06:50 PM IST
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First Indian doctor shalini malhotra included in the Board of Directors of American agency ABHRS
डॉक्टर शालिनी मल्होत्रा - फोटो : Facebook
पहली बार किसी भारतीय डॉक्टर को अमेरिकन बोर्ड ऑफ हेयर रिस्टोरेशन सर्जरी (एबीएचआरएस) के निदेशक मंडल में शामिल किया गया है। ये गौरव हासिल किया है झारखंड के चाईबासा में जन्मी डॉ. शालिनी मल्होत्रा ने। यह संस्था अमेरिका में वैसे चिकित्सकों को मान्यता देती है जो हेयर ट्रांसप्लांट का काम करते हैं। 
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एबीएचआरएस हेयर रिस्टोरेशन सर्जरी की मान्यता देने वाला दुनिया की एकमात्र संस्था है। अमेरिका में इस संस्था की इजाजत के बगैर कोई भी डॉक्टर हेयर ट्रांसप्लांट का काम नहीं कर सकता है। शालिनी का जन्म झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा में साल 1982 में हुआ था। शालिनी के पिता ए.के. मल्होत्रा इंडियन फॉरेस्ट सर्विस (आईएफएस) के झारखंड कैडर के अधिकारी रहे हैं। वे झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पद से रिटायर हुए। शालिनी की पढ़ाई-लिखाई चाईबासा, गया और हजारीबाग से हुई है। 
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शालिनी ने दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल से मेडिकल की पढ़ाई कर एमबीबीएस और पीजी की डिग्री हासिल की। शालिनी ने अमेरिका से बाल प्रत्यारोपण में विशेषज्ञता हासिल की है। डॉ. शालिनी निजी प्रैक्टिस करती हैं। वह अमेरिका में बाल प्रत्यारोपण की अनुमति लेने के लिए आयोजित परीक्षा में परीक्षक के रूप में भी शामिल रहेंगी। संस्था की बैठक साल में छह बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या निजी उपस्थिति के जरिये होगी। एबीएचआरएस के निदेशक मंडल में शालिनी का कार्यकाल 31 दिसंबर 2020 तक होगा। बोर्ड की कार्यकारी निदेशक पीटर बी कैनालिला ने डॉ. शालिनी को यह जानकारी दी है। 
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डेढ़ हजार लोगों का हेयर रेस्टोरेशन कर चुकी हैं 
डॉ. शालिनी ने हेयर रेस्टोरेशन सर्जरी की बिल्कुल नई तकनीक का इजाद किया है। इसका पेटेंट कराने के लिए वे आवेदन कर रही हैं। अपनी नई तकनीक से वह अब तक 1,500 लोगों का बाल प्रत्यारोपण कर चुकी हैं। डॉ. शालिनी की इलाज की गई नई तकनीक की तारीफ इस अमेरिकी संस्था ने भी की है। जिससे बाल प्रत्यारोपण की उनकी नई तकनीक को विश्व स्तर पर मान्यता मिली है। डॉ. शालिनी कहती है कि झारखंड ने उनसे खासा लगाव है। झारखंड की फिजा उनके जहन में रची बसी है और झारखंड जाने का कोई भी मौका चूकती नहीं हैं। 
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