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Jharkhand: गरीबी ने तोड़ा मानवता का बंधन, नवजात बेचने को मजबूर दंपति, सीएम हेमंत ने लिया संज्ञान
Sun, 07 Sep 2025 12:54 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Sun, 07 Sep 2025 12:54 PM IST
सार
पलामू जिले में गरीबी और तंगहाली के चलते रामचन्द्र राम और पिंकी देवी ने अपने नवजात को 50 हजार रुपये में बेच दिया। मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जिला प्रशासन को तुरंत कार्रवाई और पीड़ित परिवार को सरकारी मदद देने का आदेश दिया।
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नवजात को बेचने को मजबूर दंपति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
झारखंड में गरीबी और तंगहाली के कारण पलामू जिले में एक दंपति रामचन्द्र राम और पिंकी देवी ने अपने नवजात को महज 50 हजार रुपये में बेच दिया। दंपति ने स्वीकार किया कि उन्होंने यह कदम बीमारी का इलाज करवाने और पेट की आग को बुझाने के लिए उठाया। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पलामू के जिला प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने और पीड़ित परिवार को सरकारी मदद पहुंचाने का आदेश दिया। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने बच्चे को बरामद कर माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।
जानकारी के अनुसार, रामचन्द्र राम मजदूरी करते हैं और यूपी के रहने वाले हैं। वे कई वर्षो से पलामू में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। परिवार के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और जॉब कार्ड नहीं हैं, जिससे उन्हें सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था।
ये भी पढ़ें: Jharkhand News: सुरक्षाबल और नक्सलियों के बीच एनकाउंटर, एक नक्सली ढेर
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राज्य सरकार के बड़े दावों के बावजूद गरीब परिवार अपनी जीविका चलाने के लिए इतने कठिन कदम तक जाने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन अब पीड़ित परिवार को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में जुट गया है। हालांकि सवाल यह है कि झारखंड में ऐसे कई अन्य परिवार भी आज अपनी तंगहाली में जीवन यापन कर रहे हैं, क्या उन पर भी सरकार और मुख्यमंत्री की नजरें इसी तरह इनायत करेंगी।
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जानकारी के अनुसार, रामचन्द्र राम मजदूरी करते हैं और यूपी के रहने वाले हैं। वे कई वर्षो से पलामू में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। परिवार के पास राशन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर कार्ड और जॉब कार्ड नहीं हैं, जिससे उन्हें सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा था।
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राज्य सरकार के बड़े दावों के बावजूद गरीब परिवार अपनी जीविका चलाने के लिए इतने कठिन कदम तक जाने को मजबूर हैं। मुख्यमंत्री के संज्ञान में आने के बाद जिला प्रशासन अब पीड़ित परिवार को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में जुट गया है। हालांकि सवाल यह है कि झारखंड में ऐसे कई अन्य परिवार भी आज अपनी तंगहाली में जीवन यापन कर रहे हैं, क्या उन पर भी सरकार और मुख्यमंत्री की नजरें इसी तरह इनायत करेंगी।