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BIT Mesra Student Death: परिसर में छात्र की मौत पर बीआईटी मेसरा देगा 20 लाख जुर्माना, झारखंड हाईकोर्ट का फैसला

Thu, 14 Aug 2025 02:15 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Thu, 14 Aug 2025 02:15 AM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह पैसा पिछले साल परिसर में मारे गए एक छात्र के माता-पिता को दिया जाएगा। जस्टिस संजय प्रसाद की पीठ ने कहा, बीआईटी-मेसरा अपनी देखरेख में एक छात्र की सुरक्षा करने के अपने कर्तव्य में विफल रहा और संस्थागत विफलता के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई। 

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BIT Mesra Student Death Row Rs 20 lakh fine for on campus mishap Jharkhand High Court Order hindi news
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने बिड़ला प्रौद्योगिकी संस्थान (बीआईटी), मेसरा पर 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह पैसा पिछले साल परिसर में मारे गए एक छात्र के माता-पिता को दिया जाएगा। कोर्ट ने छात्रों के सामने आने वाली चिकित्सा आपात स्थितियों से निपटने के लिए राज्य भर के शैक्षणिक संस्थानों और स्कूलों की ओर से पालन किए जाने वाले दिशा-निर्देश भी तैयार किए।

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जस्टिस संजय प्रसाद की पीठ ने कहा, बीआईटी-मेसरा अपनी देखरेख में एक छात्र की सुरक्षा करने के अपने कर्तव्य में विफल रहा और संस्थागत विफलता के कारण एक व्यक्ति की जान चली गई। कोर्ट ने 12 अगस्त को आदेश दिया था कि झारखंड के सभी शैक्षणिक संस्थानों की ओर से एंबुलेंस सुविधाओं वाले सरकारी और निजी अस्पतालों की एक सूची बनाई जाए।
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स्कूल-कॉलेजों में संचालित होना चाहिए क्लिनिक
कोर्ट ने आदेश दिया कि हर स्कूल और कॉलेज में एक मेडिकल डिस्पेंसरी या क्लिनिक संचालित होना चाहिए, जिसमें 500 से 1,000 छात्रों पर एक पुरुष और एक महिला डॉक्टर हों और उन्हें दवाइयां और जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध हों। आदेश में कहा गया है कि कक्षाओं और संस्थान के प्रमुख स्थानों पर सूचना पट्टों पर अस्पतालों और डॉक्टरों के नाम और उनके संपर्क नंबर भी प्रमुखता से प्रदर्शित किए जाने चाहिए।

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अदालत ने सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी दिया निर्देश
अदालत ने कक्षाओं और छात्रावास के प्रवेश द्वारों के अंदर और बाहर सीसीटीवी कैमरे लगाने का भी निर्देश दिया। इसके अलावा, छात्रों और संस्थान के बीच संपर्क बनाए रखने के लिए एक अलग शिकायत प्रकोष्ठ और एक छात्र निगरानी दल का गठन करने का भी निर्देश दिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों की शिकायत निवारण के लिए संस्थान को एक पोर्टल या वेबसाइट बनाना चाहिए। जस्टिस प्रसाद ने दोषियों मौसम कुमार सिंह, अभिषेक कुमार, साहिल अंसारी और इरफान अंसारी की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उनकी याचिकाएं खारिज कर दीं। अदालत ने इससे पहले डीजीपी और राज्य सरकार को शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने का आदेश दिया था।

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