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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   zozila tunnel project not worked due to kashmir unrest

9000 करोड़ के जोजिला टनल प्रोजेक्ट को भी लगा घाटी की हिंसा का ग्रहण

Fri, 21 Oct 2016 08:56 PM IST
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू
ओमपाल संब्याल, अमर उजाला/जम्मू Updated Fri, 21 Oct 2016 08:56 PM IST
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zozila tunnel project not worked due to kashmir unrest
जोजिला दर्रे में टनल तैयार करना जरूरी - फोटो : Demo Pic

रियासत में अब तक के सबसे मुश्किल और दुर्गम माने जा रहे जोजिला टनल प्रोजेक्ट को भी घाटी की हिंसा का ग्रहण लग गया। रोड शो के जरिए निर्माण एजेंसियों को आकर्षित करने का फार्मूृला भी सिरे नहीं चढ़ पाया। नेशनल हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने इस प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट के लिए तीन मर्तबा टेंडर जारी किए ।

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लेकिन तीनों ही बार कोई भी निर्माण एजेंसी प्रोजेक्ट को अपने हाथ में लेने को राजी नहीं हुई। इसके पीछे रियासत में आए दिन बनने वाले तनावपूर्ण हालात और बीओटी यानी बिल्ड,ऑपरेट एंड ट्रांसफर मोड है। इसमेें निवेशक को सारा खर्च पहले खुद करना पड़ता है। समय से प्रोजेक्ट पूरा न हो पाने पर घाटे के डर से निर्माण एजेंसियां आगे नहीं आ रहीं।
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जोजिला दर्रे पर 14.083 किलोमीटर लंबी टनल बनाई जाएगी। दक्षिण एशिया की सबसे लंबी टनल के प्रोजेक्ट पर 9090 करोड़ रुपये की लागत आएगी। टनल तैयार होने से लद्दाख रीजन साल भर देश से जुड़ा रहेगा। वर्तमान में यह इलाका चार से पांच महीने तक कटा रहता है। यही वजह है कि प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री कार्यालय मानीटर कर रहा है।

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सामरिक चुनौतियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है प्रोजेक्ट

zozila tunnel project not worked due to kashmir unrest
जोजिला दर्रे में टनल तैयार करना जरूरी - फोटो : Demp Pic.

लद्दाख रीजन को श्रीनगर से 12 महीने लगातार जोड़े रखने के लिए जोजिला दर्रे में टनल तैयार करना न सिर्फ स्थानीय आबादी की जरूरत है बल्कि पाकिस्तान और चीन की सामरिक चुनौतियों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है। एनएचआईडीसीएल के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि प्रोजेक्ट पहले मिनिस्ट्री आफ रोड ट्रांस्पोर्ट एंड हाईवे के पास था जिसे बाद में निगम को दे दिया गया।

प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए अंतरराष्ट्र्रीय बिडर चाहिए। निगम ने पहली बार मेट्रो शहरों में रोड शो कर अंतरराष्ट्र्रीय बिडर आकर्षित करने का प्रयास किया। लेकिन, तीन बार टेंडर किया गया जो बैरंग रहा है। अब इसकी नए सिरे से समीक्षा कर मामला मंत्रालय को रेफर किया जाएगा। 


 
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