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अंतर जिला भर्ती पर लगी रोक को हटाया जाए
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ज्यौड़ियां। खौड़ की सीमावर्ती 15 पंचायतें हैं। जो भारत-पाकिस्तान सीमा की पांच किलोमीटर की पट्टी के अधीन हैं। यह एलओसी पर स्थित हैं। यहां के युवाओं के अनुसार वर्ष 2005 में जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस-नेकां गठबंधन सरकार थी और गुलाम नबी आजाद मुख्यमंत्री थे। विधानसभा क्षेत्र में अंतर जिला भर्ती का नियम पास हुआ। केंद्र में भी उस समय कांग्रेस की सरकार थी। इसका सीमावर्ती युवाओं को नौकरी पाने के लिए काफी अच्छा अवसर और लाभ मिला। हमारी खौड़ की सीमावर्ती 15 पंचायतों के लगभग एक हजार युवाओं ने रोजगार पाया।
युवाओं के मुताबिक वर्ष 2010 में अंतर जिला भर्ती पर रोक लगा दी गई। उस समय राज्य में कांग्रेस-नेकां गठबंधन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। बेरोजगारी की मार झेल रहे सीमावर्ती युवाओं ने बताया कि अंतर जिला भर्ती कर लगी इस रोक से हमें काफी नुकसान हुआ है। जब इस अंतर जिला भर्ती पर रोक लगी थी, तो जम्मू के युवाओं ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था। भाजपा उस समय विपक्ष में थी।
युवाओं ने बताया कि अंतर जिला भर्ती पर लगी रोक को अगर हटाया जाए। तो हमें रोजगार मिल सकता है। इस अवसर पर बेरोजगारी स्नातक युवक रवि कुमार, टोनी मनहास, पंकज मट्टू, अजय कुमार ने बताया कि अगर अंतर जिला भर्ती पर रोक नहीं लगाई जाती तो आज हम भी नौकरी कर रहे होते।
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युवाओं के मुताबिक वर्ष 2010 में अंतर जिला भर्ती पर रोक लगा दी गई। उस समय राज्य में कांग्रेस-नेकां गठबंधन की सरकार थी। केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। बेरोजगारी की मार झेल रहे सीमावर्ती युवाओं ने बताया कि अंतर जिला भर्ती कर लगी इस रोक से हमें काफी नुकसान हुआ है। जब इस अंतर जिला भर्ती पर रोक लगी थी, तो जम्मू के युवाओं ने काफी विरोध प्रदर्शन किया था। भाजपा उस समय विपक्ष में थी।
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युवाओं ने बताया कि अंतर जिला भर्ती पर लगी रोक को अगर हटाया जाए। तो हमें रोजगार मिल सकता है। इस अवसर पर बेरोजगारी स्नातक युवक रवि कुमार, टोनी मनहास, पंकज मट्टू, अजय कुमार ने बताया कि अगर अंतर जिला भर्ती पर रोक नहीं लगाई जाती तो आज हम भी नौकरी कर रहे होते।
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