2015 में सियासी रंगो में घुली दिखी रियासत की राजनीति
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साल 2015...। जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक पृष्ठभूमि पर अमिट छाप छोड़कर जा रहे इस साल ने राजनीति के कई रंग देखे। खंडित जनादेश के बाद नौ जनवरी से फरवरी तक राज्यपाल शासन रहा।
तमाम जोड़तोड़ की कोशिशों के बीच परस्पर वैचारिक मतभेदों वाली पीडीपी और भाजपा की गठबंधन सरकार बनी। एक मार्च 2015 का दिन रियासत के लिए ऐतिहासिक दिन रहा।
राम माधव-द्राबु में 55 दिनों तक चले गहन मंथन ने गठबंधन की बुनियाद रखी। हालांकि गठबंधन सरकार बनने के बाद वैचारिक मतभेद सामने आते रहे।
2015 में अहम सियासी घटनाक्रम
1. रियासत में नौ जनवरी को राज्यपाल शासन लागू हुआ।
2. राज्यसभा सीट पर नाटकीय ढंग से गुलाम नबी आजाद की जीत।
3. एक मार्च को पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार का शपथ ग्रहण।
4. मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के शांति पूर्ण चुनाव का श्रेय पाकिस्तान और आतंकियों को देने पर बवाल
5. एम्स के लिए जम्मू में कई दिन बंद रहा।
6. लेह परिषद चुनाव में भाजपा की शानदार जीत।
तीन बार आए प्रधानमंत्री मोदी
1. एक मार्च पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पार्टी के कई वरिष्ठ केंद्रीय नेताओं सहित
मौजूद रहे।
2. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के ससुर राज्य के पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय गिरधारी लाल डोगरा की 100 जयंती कार्यक्रम में हिस्सा लेने
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 जुलाई, 2015 को रियासत में आए।
3. नवंबर में श्रीनगर में रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80 हजार करोड़ के पैकेज की घोषणा की। बगलिहार दो परियोजना को भी
रियासत को समर्पित किया
सियासी नेता जो 2015 में दुनिया छोड़ गए
1. पूर्व सांसद जनक राज गुप्ता
2. पूर्व विधायक मीर गुलाम मोहम्मद पुंछी
3. पूर्व विधायक अब्दुल गनी शाह वीरी
4. पूर्व विधायक ख्वाजा सोना उल्ला डार
5. पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद मिसगर
6. पूर्व एमएलसी वीर चंद महाशा
7. पूर्व एमएलसी फरीदा मीर