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Yasin Malik Sentenced : जम्मू-कश्मीर को हिंसा की आग में झोंकने वाले यासीन पर पहली बार कसा शिकंजा

Thu, 26 May 2022 02:07 AM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 26 May 2022 02:07 AM IST
सार

संगीन आरोपों के बावजूद सालों सरकारी सुरक्षा में खुलेआम घूमता रहा अलगाववादी यासीन मलिक। एनआईए ने टेरर फंडिंग में 2017 में केस दर्ज कर पांच सालों के भीतर अंजाम तक पहुंचाया। कश्मीरी पंडित बोले, उनके समुदाय की हत्याओं से जुड़े मामले भी खोले जाएं।

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Yasin Malik, who threw Jammu and Kashmir into the fire of violence, gets life imprisonment
यासीन मलिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पिछले तीन दशक से भी अधिक समय तक जम्मू-कश्मीर को हिंसा की आग में झोंकने का गुनहगार अलगाववादी नेता और प्रतिबंधित संगठन जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेके एलएफ) का आतंकी यासीन मलिक संगीन आरोपों के बावजूद सरकारी सुरक्षा में खुलेआम घूमता था। यासीन मलिक पर कसा शिकंजा पहली बार अंजाम तक पहुंचा है। घाटी में शांति के लिए सरकारी प्रयासों के तहत बातचीत में भी उसे शामिल किया गया। सरकारों की ओर से उसे शांति प्रयासों के लिए बातचीत के लिए बुलाया भी जाता था। प्रशासनिक व्यवस्था में उसकी जबर्दस्त दखल थी। हुर्रियत के अन्य नेताओं की तरह यासीन को भी सुरक्षा मुहैया कराई गई थी। ज्ञात हो कि टेरर फंडिंग मामले में उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई है। 

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यासीन मलिक पर 1990 के दशक में आतंकवाद के बीज बोने के आरोप हैं। कश्मीरी पंडितों के साथ ही आम नागरिकों की हत्या में भी यासीन मलिक का नाम शामिल रहा। बाद में पाकिस्तान के जेकेएलएफ से हाथ खींचने और हिजबुल मुजाहिदीन को आगे करने के बाद धीरे-धीरे यासीन मलिक अलगाववादी धड़े से जुड़ गया। केंद्र सरकार की ओर से कश्मीर समस्या के हल के लिए बुलाई गई बैठकों में भी उसे न्योता दिया गया। खुद को वह गांधी कहलाना पसंद करता था। इन सबकी आड़ में वह घाटी में हिंसा और आतंकवादियों को फंडिंग करता था। इसके लिए वह तमाम आतंकी संगठनों से फंड इकट्ठा करता था। 
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केंद्र सरकार की सख्ती के बाद एनआईए ने 2017 में यासीन पर हाथ डाला और पांच साल के भीतर उसे सजा तक पहुंचाया। कश्मीरी पंडितों को यासीन की सजा का लंबे समय से इंतजार था। पंडितों के अनुसार यासीन ने ही घाटी में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की शुरूआत की। जेकेएलएफ के आतंकियों ने निर्मम हत्याएं शुरू कीं, जिसकी वजह से पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। आतंकवाद के दौर से अब तक 804 पंडितों की हत्याओं के पीछे भी जेकेएलएफ का हाथ रहा है।
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कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति का कहना है कि टेरर फंडिंग में यासीन को सजा सुनाई गई है, लेकिन उन मुकदमों को भी खोला जाना चाहिए जिसमें जेकेएलएफ आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों की हत्या की। वह न केवल कश्मीरी पंडितों का गुनहगार है बल्कि घाटी के उन नौजवानों और परिवारों का भी कसूरवार है जिनके हाथों में बंदूक और पत्थर थमाए गए। उसके लिए उम्र कैद की सजा पर्याप्त नहीं है। कश्मीरी पंडितों की हत्याओं से जुड़े मामले भी खोले जाने चाहिए ताकि उन्हें न्याय मिल सके। 

अन्य अलगाववादियों को भी सजा का खुला रास्ता

यासीन मलिक को सजा से घाटी में हिंसा और टेरर फंडिंग के आरोप में गिरफ्तार किए गए मसर्रत आलम, दुख्तरान-ए-मिल्लत की आसिया अंद्राबी, शब्बीर शाह, अल्ताफ फंटूश समेत अन्य अलगाववादियों को सजा दिलाने का रास्ता भी खुल गया है। कानून के जानकारों का कहना है कि यासीन मलिक का टेरर फंडिंग का कानूनी आधार अन्य मुकदमों में भी आधार बन सकता है। हालांकि, अन्य अलगाववादियों के मामले अलग-अलग हैं।

सभी मामलों पर जल्द से जल्द हो ट्रायल: वैद
लंबे समय तक आतंकवाद से लड़ने वाले जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद कहते हैं कि 1990 में कश्मीरियों के नरसंहार का यासीन ही जिम्मेदार था। वह ही जेकेएलएफ का प्रमुख था। शुरूआत में जेकेएलएफ ही था, अन्य आतंकी संगठन बाद में आए। उसके खिलाफ अन्य मामले भी हैं जिन पर जल्द से जल्द ट्रायल होना चाहिए और उसमें सजा सुनाई जानी चाहिए। उसने हाफिज सईद, सलाहुद्दीन के साथ ही अन्य आतंकी संगठनों से पैसे लेकर घाटी को हिंसा की आग में झोंका। युवा पीढ़ी को बर्बाद किया। ऐसे सभी तत्वों और देश विरोधी इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। 


टेरर फंडिंग के अलावा भी यासीन पर कई संगीन आरोप

जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक पर टेरर फंडिंग के अलावा और भी कई संगीन आरोप हैं। इनमें वायुसेना के अधिकारियों की हत्या समेत तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण और रिहाई के बदले में पांच दुर्दांत आतंकियों को छोड़े जाने का भी आरोप है। जानकार बताते हैं कि नब्बे के दशक में जेकेएलएफ की वजह से ही कश्मीरी पंडितों को विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ा। सबसे पहले 1989 में आतंकियों ने भाजपा नेता टीका लाल टपलू की हत्या की गई। 

इस घटना के लगभग डेढ़ महीने बाद सेवानिवृत्त जज नीलकंठ गंजू की हरि सिंह स्ट्रीट में चार नवंबर 1989 को आतंकियों ने हत्या कर दी। यह हत्या आतंकी मकबूल भट को फांसी की सजा सुनाए जाने के बदले में की गई, क्योंकि गंजू ने ही उसे एक इंस्पेक्टर की हत्या मामले में सजा सुनाई थी। इसमें यासीन मलिक और जावेद मीर नलका के शामिल होने की बात भी सामने आई, लेकिन प्राथमिकी में अज्ञात आतंकियों का जिक्र है। 

आठ दिसंबर 1989 को गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद का यासीन मलिक व अन्य आतंकियों ने अपहरण कर लिया था। बदले में विभिन्न जेलों में बंद पांच खूंखार आतंकियों को छोड़ना पड़ा था। इसमें नलका भी था। इस घटना के लगभग डेढ़ माह बाद 25 जनवरी 1990 को यासीन मलिक व जेकेएलएफ के अन्य आतंकियों ने श्रीनगर में वायुसेना के जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग की। इसमें चार की मौत हो गई, जबकि 40 अन्य घायल हो गए। इन दोनों मामलों में टाडा कोर्ट में कार्यवाही चल रही है।

जम्मू में बंटीं मिठाइयां, कश्मीर में पत्थरबाजी

टेरर फंडिंग मामले में यासीन मलिक को उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद जम्मू में लोगों ने मिठाइयां बांटी तो कश्मीर में जेकेएलएफ का गढ़ माने जाने वाले माईसुमा इलाके में हालात बेकाबू हो गए। प्रदर्शन करते हुए भीड़ ने सुरक्षाबलों पर पथराव कर दिया। हालात नियंत्रण से बाहर होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और प्रदर्शनकारियों को भगाया। सूत्रों के अनुसार करीब 15 मिनट तक हालात खराब रहे, लेकिन सुरक्षा बलों ने इसे नियंत्रण में कर लिया। हिंसा न भड़के इसके लिए पुलिस ने माईसुमा और आसपास इलाकों को सील कर दिया है। उधर, श्रीनगर में बाजार आंशिक रूप से बंद रहे। सुनवाई के दौरान यासीन के परिवार वाले घर में कुरान पढ़ते नजर आए। 

19 मई को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत यासीन मलिक दोषी करार दिया गया था। जम्मू-कश्मीर पुलिस को इनपुट मिले थे कि यासीन मलिक की सजा की सुनवाई के चलते श्रीनगर के संवेदनशील इलाकों में हिंसा भड़क सकती है। हालात खराब होने की संभावना है। इसके मद्देनजर पुलिस ने पहले ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर दिए थे। सभी संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस जवानों के साथ अर्द्धसैनिक बल के जवान तैनात किए गए थे। बुधवार सुबह से ही चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल मुस्तैद दिखे।    
        
श्रीनगर शहर के डाउनटाउन के साथ-साथ सिविल लाइंस के कुछ इलाकों में बंद दिखा। माईसुमा (यासीन मलिक का घर), लाल चौक, हरी सिंह हाई स्ट्रीट, महाराजा बाजार आदि इलाकों में दुकानें और अन्य प्रतिष्ठान बंद रहे। सड़कों पर भी यातायात व लोगों की आवाजाही कम दिखी। 
बुधवार दोपहर बाद माईसुमा में स्थित यासीन मलिक के घर के बाहर बड़ी संख्या में महिलाएं और युवा इकट्ठा हुए। उन्होंने मलिक की रिहाई की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जैसे-जैसे फैसले की घड़ी नजदीक आती गई भीड़ भी बढ़ती गई। पुलिस ने लोगों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया।    

ड्रोन से रखी गई नजर
माईसुमा इलाके में जहां यासीन मलिक का घर है, वहां सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी थी। सुरक्षा बल ड्रोन के जरिए उस इलाके पर नजर रखे हुए थे।     

यासीन को सजा पर प्रदेश में हाई अलर्ट

आतंकी और अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर पूरे प्रदेश में हाई अलर्ट कर दिया गया है। एलओसी से लेकर बॉर्डर तक बीएसएफ एवं सेना की ओर से कड़ी निगरानी रखी जा रही है। यासीन की सजा से बौखला कर आतंकी संगठन किसी वारदात को अंजाम दे सकते हैं। ऐसे में पुलिस को चौकस रहने के लिए कहा गया है। 

वहीं कटड़ा वैष्णो देवी, जम्मू के रघुनाथ मंदिर, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और एयरपोर्ट पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए हैं। बुधवार को पुलिस की ओर से नेशनल हाईवे के नगरोटा और झज्जर कोटली में विशेष नाका लगाकर कश्मीर आने-जाने वाले वाहनों की जांच की गई। इसके अलावा जम्मू के कुंजवानी, बिक्रम चौक, पुराने शहर में भी पुलिस की तरफ से नाके लगाकर वाहनों को जांचा गया। अर्धसैनिक बलों के साथ पुलिस सीमावर्ती गांव में गश्त कर रही है। सभी एसएचओ को निजी तौर पर गश्त की अगुवाई करने के लिए कहा गया है। 

संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बल तैनात
एसएसपी चंदन कोहली का कहना है कि महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा बढ़ाई गई है। पुलिस अफसर व्यक्तिगत तौर पर सुरक्षा हालात पर नजर रख रहे हैं। शहर के संवेदनशील इलाकों में अर्धसैनिक बलों के साथ पुलिस को तैनात किया गया है, ताकि किसी भी संदिग्ध या देश विरोधी तत्व पर नजर रखी जा सके। माहौल बिगाड़ने की फिराक में बैठे लोगों पर भी पुलिस की पैनी नजर है।

कश्मीर घाटी में सशस्त्र पुलिस के अमले की छुट्टियों पर रोक

यासीन मलिक को सजा सुनाए जाने पर कश्मीर घाटी में विरोध के बीच पुलिस के जम्मू-कश्मीर पुलिस के आर्म्ड (सशस्त्र) विंग में छुट्टियों पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। आर्म्ड पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, आईजी, डीआईजी समेत अन्य अफसरों से कहा गया है कि आईआरपी की यूनिटों में तत्काल प्रभाव से आदेश पर अमल सुनिश्चित किया जाए। अत्यावश्यक आदेश में कहा गया है कि जवानों और अफसरों की सभी तरह की छुट्टियों पर तत्काल रोक लगाई जाती है। यूनिटों के कमांडेंट आदेश पर अमल सुनिश्चित करेंगे।

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