फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   World Suicide Prevention Day

Jammu News: आत्महत्या की प्रवृत्ति वाला व्यक्ति देता है संकेत, उसे समझे और गंभीरता से लें

विज्ञापन
World Suicide Prevention Day
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस विशेष आज
विज्ञापन

- 15 से 25 साल की आयु में आत्महत्या करने वालों की संख्या बढ़ रही
- मनोचिकित्सक बोले -पढ़ाई का दबाव, समाज का डर, अभिभावकाें की बढ़ती अपेक्षा बना रहा कारण
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। मेरा जीवन ही व्यर्थ है। मन करता है मर जाऊं। पढ़ने के बाद भी मैं फेल हो गया। क्या फायदा ऐसा जीवन जीने का। जीवन में कुछ नहीं रखा सब दुखों से छुटकारा मिल जाए। अगर आपका दोस्त या बच्चा इस तरह की बात करता है तो उसे हंसी-मजाक में न लें। उसकी गंभीरता को समझें और तत्काल मनोचिकित्सक या मनोवैज्ञानिक के पास लेकर जाएं। इस तरह की बात करने वाले लोगों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ती है जो आखिर में आत्महत्या के प्रयास का कारण बन जाती है।
एनसीआरबी की 2022 की रिपोर्ट देखें तो जम्मू-कश्मीर में आत्महत्या की 2.4 दर है। यह राष्ट्रीय 12.4 दर से काफी कम है। बिहार, मणिपुर और नगालैंड के बाद सबसे कम है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में 2021 के मुकाबले यह दर 30.8 फीसदी बढ़ी है, जो चिंता का कारण है। गांधीनगर अस्पताल में मनोचिकित्सक डॉ. अखिल मीनिया कहते हैं कि प्रदेश में आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति 15 से 25 आयु वर्ग में है। इस वर्ग में न सिर्फ इस तरह की प्रवृति बढ़ी है, बल्कि आगे जाकर प्रयास में भी बदले हैं। बार-बार आत्महत्या करने की बातें कहने वाले लोगों को आत्मघाती आभासी कहते हैं। ये लोग आत्महत्या करूं या न करूं की स्थिति में रहते हैं। भले ही मजाक में कहते हैं, लेकिन संकेत देते हैं। इसे गंभीरता से लेना चाहिए। एक बार आत्महत्या करने वाला व्यक्ति दूसरी बार भी प्रयास करता है। आत्महत्या का एक बार प्रयास करने के बाद उपचार के दो से तीन सप्ताह बाद वह दोबारा ऐसा कर सकता है। यह सबसे ज्यादा जोखिम भरा समय होता है।
विज्ञापन

----
मानसिक स्वास्थ्य को समाज
अभी कलंक मानता है
डॉ. अखिल मीनिया कहते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर अभी लोगों को समझ नहीं है। वे इसे कलंक मनाते हैं। ओपीडी में अवसाद या मानसिक स्वास्थ्य से पीड़ित व्यक्ति उनके पास काफी देर से इलाज के लिए आते हैं। वे पहले अलग-अलग डॉक्टर या फिर धार्मिक विधियों का उपयोग करते हैं। अगर इसकी गंभीरता को समझते हुए लोग समय रहते मनोचिकित्सक के पास आएं तो बेहतर इलाज होता है। इसका इलाज उपलब्ध है, बस जरूरत है गंभीरता की।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
आत्महत्या करने के पीछे कई कारण
मनोरोग अस्पताल जम्मू में मनोचिकित्सक डॉ. राकेश बनाल कहते हैं कि जम्मू-कश्मीर में एक समय पर आत्महत्या न के बराबर थी। आतंकवाद और संघर्ष के दौर में इस तरह की प्रवृति लोगों में आने लगी। व्यक्ति के आत्महत्या करने के पीछे कई कारण होते हैं। अभिभावकों की उम्मीदें बच्चों से बढ़ी हैं। बच्चों को लगता है कि परीक्षा में अच्छे अंक से पास होना ही सबकुछ है। यही कारण विद्यार्थियों को आत्महत्या की तरफ ले जाता है। वहीं शादी व कॅरियर में परेशानी व्यस्कों में आत्महत्या की प्रवृत्ति को बढ़ाती है। उन्होंने कहा कि एक अध्ययन में पाया गया है कि कोविड-19 के बाद देश में आत्महत्या में दस फीसदी की वृद्धि हुई है। लोग कहते हैं कि आत्महत्या करने वाले बताते नहीं हैं। ऐसा नहीं होता। वे संकेत देते हैं।
----
भ्रांतियां
-जो लोग आत्महत्या की बात करते हैं, वे ऐसा नहीं करते।
- आत्महत्या अचानक होती है, बिना चेतावनी।
- आत्महत्या करने वाले लोग मरने के लिए पूरी तरह दृढ़ निश्चयी होते हैं।
- एक बार कोई व्यक्ति आत्महत्या का विचार करता है तो वह हमेशा आत्मघाती रहता है।
- आत्महत्या करने वाले सभी लोग मानसिक रूप से बीमार होते हैं।
वास्तविक तथ्य
- लगभग 80 फीसदी लोग आत्महत्या करने से पहले संकेत या चेतावनी देते हैं।
- अधिकतर लोग जीवन और मृत्यु के बीच असमंजस में रहते हैं।
- आत्महत्या करने वाले व्यक्ति प्राय: दुखी होते हैं, न की मानसिक रोगी हों।
- मनोचिकित्सक डॉ. राकेश बनाल के अनुसार
----
कुछ तथ्य
- जीएमसी जम्मू में हर महीने औसतन 50 से अधिक मामले जहर खाने के आते हैं।
- 2024 में जहर खाने के 857 मामले आए थे।
- 1289 मामलों में व्यक्ति की मौत का कारण फांसी या अन्य था।
- 2025 में मई तक ही 515 मामले जहर खाने के आए हैं।
---
स्टडी क्या बताती है
राजकीय मेडिकल कॉलेज जम्मू में आत्महत्या का प्रयास करने वाले मरीजों के मानसिक स्वास्थ्य पर अध्ययन किया गया है। इनमें 106 मरीजों को शामिल किया गया था। सबसे ज्यादा 40 मरीजों में मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर पाया गया। यानी डिप्रेशन आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया। बाइपोलर डिसऑर्डर के 23 मरीज, एंग्जायटी 18 मरीज, पीटीएसडी नौ मरीज, ओसीडी आठ और बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर के आठ मरीज थे। यह अध्ययन डॉ. अनिल कुमार, डॉ. राकेश बनाल, डॉ. अखिल मीनिया, डाॅ. विदिशा जुत्शी सभी जीएमसी जम्मू और डॉ. भवना सहानी (एस्काॅम) शामिल थीं।

------------------
हर साल 10 सितंबर को पूरी दुनिया में ''''विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस'''' के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को मनाने की शुरुआत 2003 में इंटरनेशनल एसोसिएशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन (आईएएसपी) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर की थी। इसे मनाने का उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि आत्महत्या को रोका जा सकता है। इस वर्ष का विषय आत्महत्या पर नैरेटिव को बदलना है। इसका उद्देश्य आत्महत्या से जुड़े मिथकों को चुनाैती देना, स्टिग्मा को कम करना और इसके प्रति खुलकर बात करने को बढ़ावा देना है।
----
इन नंबरों पर करें संपर्क
वेलनेस और मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन 18005990019
टी-मानस 14416
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed